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Home Rajya पश्चिम-बंगाल मेदिनीपुर से टिकट नहीं देने का फैसला था गलत, अब फिर से पुरानी भूमिका में दिखेंगे घोष

मेदिनीपुर से टिकट नहीं देने का फैसला था गलत, अब फिर से पुरानी भूमिका में दिखेंगे घोष

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मेदिनीपुर से टिकट नहीं देने का फैसला था गलत, अब फिर से पुरानी भूमिका में दिखेंगे घोष

राज्य के सभी जिलों का दौरा करेंगे भाजपा नेता दिलीप घोष, कार्यकर्ताओं से करेंगे बात कोलकाता. दुर्गापुर-बर्दवान लोकसभा सीट से चुनाव हारने वाले भाजपा नेता दिलीप घोष ने फिर पार्टी के प्रदर्शन पर सवाल उठाया है. दिलीप घोष ने गुरुवार को कहा कि चुनाव में जीत-हार होती है. लेकिन बंगाल में भाजपा का संगठन कमजोर पड़ गया था. भाजपा कार्यकर्ता उत्साह के साथ मैदान में नहीं उतरे. मेदिनीपुर से हटा कर दुर्गापुर-बर्दवान में उम्मीदवार बनाने को लेकर पूछे जाने पर उन्होंने कहा कि मेदिनीपुर में बूथ स्तर पर उन्होंने मजबूत संगठन तैयार किया था. उन्हाेंने कई काम भी किये थे. संसद कोष से काफी राशि इलाके में खर्च की थी. लोग काफी खुश भी थे. सभी दल के लोग मेरे पक्ष में थे. कोई कारण रहा होगा कि पार्टी ने फिर से मेदिनीपुर से टिकट नहीं दिया. यह फैसला गलत था. यह चुनावी नतीजों से साफ हो गया है. इस बार हम प्रथम लाइन कार्यकर्ता तक नहीं पहुंच पाये, इसलिए भाजपा का वोट कम हुआ. हमें पराजय झेलनी पड़ी. भाजपा कार्यकर्ताओं पर हो रहे हमले को लेकर पूछे जाने पर दिलीप घोष ने कहा कि चुनाव बाद इस राज्य में इस तरह की घटना देखी जा रही है. जो भाजपा के साथ खड़े हैं, वे इसे अच्छी तरह से जानते भी हैं. पिछले 10 साल से यह हो रहा है. पुलिस पर अब कोई भरोसा नहीं करता. इसके बाद भी भाजपा कार्यकर्ता पार्टी के साथ डट कर खड़े हुए हैं. उन्होंने कहा कि 19 जून तक राज्य में केंद्रीय वाहिनी है. उनका कहना था कि वह सभी जिलों में जायेंगे. भाजपा कार्यकर्ताओं से बात करेंगे. वह इस काम को जल्द-जल्द शुरू कर देंगे. उन्होंने कहा : इससे पहले भी ऐसा कर चुका हूं. फिर से करूंगा. उन्होंने बताया कि मेदिनीपुर से भी कई लोगों ने फोन कर बात की. सभी हताश हैं. जब वह पार्टी अध्यक्ष थे, तो राज्य भर में घूमते थे. पार्टी हमें फिर से दायित्व दे या न दे, लेकिन मेरी भूमिका नहीं बदलेगी. पुराने कार्यकर्ता जीत की गारंटी : घोष कोलकाता. राज्य में लोकसभा चुनावों में निराशाजनक प्रदर्शन के मद्देनजर भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) की प्रदेश इकाई में दिख रही दरार के बीच दिग्गज नेता दिलीप घोष के बयान ने पार्टी में ‘पुराने बनाम नये’ को लेकर नयी बहस शुरू होने की अटकलें तेज कर दी है. घोष ने गुरुवार को ‘एक्स’ पर पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी के बयान का हवाला देते हुए लिखा : एक चीज हमेशा ध्यान रखिये कि पार्टी के पुराने से पुराने कार्यकर्ता को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए. अगर जरूरत पड़े, तो 10 नये कार्यकर्ताओं को अलग कर दीजिये, क्योंकि पुराने कार्यकर्ता हमारी जीत की गारंटी हैं. नये कार्यकर्ताओं पर बहुत जल्दी विश्वास नहीं करना चाहिए. बर्दवान-दुर्गापुर सीट पर तृणमूल कांग्रेस के कीर्ति आजाद ने दिलीप घोष को करीब 1.38 लाख मतों से हराया है, जिसके बाद भाजपा नेता ने यह टिप्पणी की है. दिलीप घोष को लेकर नया प्लान बना रहा आरएसएस कोलकाता. बर्दवान-दुर्गापुर सीट से हारने के बाद पूर्व भाजपा सांसद दिलीप घोष काफी दुखी नजर आ रहे हैं. हालांकि, आरएसएस दिलीप घोष को लेकर नया प्लान बनाने में लगा है. सूत्रों के अनुसार, दिलीप को आरएसएस बंगाल विधानसभा में विपक्ष का नेता बनाना चाहता है. भाजपा के पुराने नेताओं को संघ फ्रंट पर लाना चाह रहा है. बता दें कि सांसद बनने के बाद जून मालिया मेदिनीपुर के विधायक पद से जल्द इस्तीफा दे देंगी. यहां भी अगले कुछ हफ्तों में उपचुनाव होगा. आरएसएस इस सीट से दिलीप घोष को चुनाव लड़ाने की योजना बना रहा है. गौरतलब है कि 2016 में खड़गपुर से विधायक चुने जाने के बाद दिलीप घोष ने संसदीय राजनीति पर काफी प्रभाव डाला था. खबर है कि दिल्ली में एनडीए गठबंधन की सरकार बनने के बाद भाजपा विभिन्न राज्यों में संगठनात्मक फेरबदल शुरू करेगी. बंगाल भाजपा के अध्यक्ष को भी बदला जा सकता है. दरअसल शुभेंदु के नेता प्रतिपक्ष बनने के बाद दिलीप घोष जैसे नेताओं को किनारे कर दिया गया था. घोष के नेतृत्व में भाजपा ने बंगाल में क्रमश: दो बार लोकसभा और विधानसभा चुनाव में बेहतरीन प्रदर्शन किया था. लेकिन 2021 के विधानसभा चुनाव के बाद सुकांत मजूमदार पार्टी के अध्यक्ष बनाये गये. उसके बाद से ही पार्टी के प्रर्दशन में गिरावट देखी जा रही है. बर्दवान-दुर्गापुर सीट से दिलीप घोष को उम्मीदवार बनाये जाने के बाद से ही भाजपा का एक खेमा नाराज था. अब दिलीप की हार से प्रदेश नेतृत्व की क्षमता पर सवाल उठने लगे हैं.

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