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Home पश्चिम-बंगाल कोलकाता ममता बनर्जी की जनहित योजनाओं को बंद नहीं करेगी शुभेंदु अधिकारी सरकार, लाभार्थियों की होगी सघन जांच

ममता बनर्जी की जनहित योजनाओं को बंद नहीं करेगी शुभेंदु अधिकारी सरकार, लाभार्थियों की होगी सघन जांच

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ममता बनर्जी की जनहित योजनाओं को बंद नहीं करेगी शुभेंदु अधिकारी सरकार, लाभार्थियों की होगी सघन जांच
पश्चिम बंगाल के वित्त मंत्री स्वपन दासगुप्ता.

WB Welfare Schemes: पश्चिम बंगाल की राजनीति और आम जनता के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण प्रशासनिक फैसला सामने आया है. राज्य की नवगठित भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) सरकार ने तृणमूल कांग्रेस (TMC) सरकार के कार्यकाल में शुरू की गयी प्रमुख सामाजिक कल्याणकारी योजनाओं (Social Welfare Schemes) को जारी रखने का निर्णय लिया है.

लाभार्थियों की सूची की होगी गहन जांच

हालांकि, इन योजनाओं में बड़े पैमाने पर चल रही अनियमितताओं और धांधली को रोकने के लिए लाभार्थियों की सूची का व्यापक पुनरीक्षण (Comprehensive Review) यानी गहन जांच करने जा रही है, ताकि सरकारी धन का लाभ केवल वास्तविक और जरूरतमंद लोगों तक ही पहुंचे.

फर्जीवाड़ा रोकने के लिए अंतिम वोटर लिस्ट से होगा मिलान

अधिकारियों के मुताबिक, ममता बनर्जी के शासनकाल में राजनीतिक प्रभाव के कारण लाखों अपात्र लोगों को इन योजनाओं से जोड़ दिया गया था. कई मामलों में एक ही परिवार के कई सदस्य एक ही योजना का लाभ उठा रहे थे. इस लीकेज को रोकने के लिए सरकार अब लाभार्थियों के डेटा का मिलान अंतिम मतदाता सूची से किया जायेगा.

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वोटर लिस्ट में कट गये थे 80 लाख संदिग्ध के नाम

नवंबर 2025 में शुरू हुए विशेष मतदाता सूची पुनरीक्षण (SIR) से पहले बंगाल में 7.6 करोड़ वोटर थे. एसआईआर के बाद यह संख्या घटकर 6.8 करोड़ रह गयी. यानी लगभग 80 लाख संदिग्ध नाम वोटर लिस्ट से हटा दिये गये. जिन लोगों के नाम वोटर लिस्ट से कट चुके हैं, उन्हें कल्याणकारी योजनाओं की सूची से भी बाहर कर दिया जायेगा. जरूरत पड़ने पर घर-घर जाकर सत्यापन किया जायेगा, ताकि केवल वास्तविक भारतीय नागरिकों को ही लाभ मिले.

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वित्त मंत्री ने बजट में दिये थे सुधार के संकेत

अपना पहला बजट पेश करते हुए वित्त मंत्री स्वपन दासगुप्ता ने बंगाल विधानसभा में कहा था कि सभी मौजूदा सामाजिक सुरक्षा योजनाएं जारी रहेंगी. उनको प्रभावी और पारदर्शी बनाने के लिए जरूरी सुधार किये जायेंगे. इसी कड़ी में सरकार ने हाल ही में आयोजित ‘जनकल्याण शिविरों’ के माध्यम से आये नये आवेदनों की स्क्रूटनी शुरू कर दी है. वृद्धावस्था व विधवा पेंशन जैसी कुछ योजनाओं के वितरण को सत्यापन पूरा होने तक अस्थायी रूप से रोक दिया है. कन्याश्री (96.3 लाख लाभार्थी) और रूपश्री (1.43 लाख लाभार्थी) जैसी बड़ी योजनाओं पर भी कड़ी निगरानी रखी जा रही है.

WB Welfare Schemes: ‘कृषक बंधु’ योजना हुई कबाड़

इस बड़े शुद्धिकरण अभियान के तहत राज्य सरकार ने तृणमूल कांग्रेस की महत्वाकांक्षी कृषक बंधु (Krishak Bandhu) योजना को पूरी तरह से बंद (Scrapped) कर दिया है. अधिकारियों का आरोप है कि इस योजना में बड़े पैमाने पर फर्जीवाड़ा हो रहा था. एक ही जमीन के टुकड़े पर कई-कई लाभार्थी पैसे उठा रहे थे. पुरानी योजना के तहत 1 एकड़ या उससे अधिक भूमि वाले किसानों को 10,000 और छोटे किसानों को 4,000 रुपए सालाना मिलते थे.

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भाजपा सरकार देगी 3000 रुपए

भाजपा सरकार ने कृषक बंधु की जगह एक संशोधित ढांचा तैयार किया है, जिसके तहत प्रत्येक किसान को सालाना 3,000 रुपए की वित्तीय सहायता दी जायेगी. कृषि विभाग के अधिकारियों का अनुमान है कि सख्त वेरिफिकेशन के बाद मौजूदा किसान लाभार्थियों में से 40 प्रतिशत से अधिक अपात्र लोगों के नाम सूची से हटा दिये जायेंगे.

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मिथिलेश झा PrabhatKhabar.com में पश्चिम बंगाल राज्य प्रमुख (State Head) के रूप में कार्यरत वरिष्ठ पत्रकार हैं. उन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में 30 वर्षों से अधिक का व्यापक अनुभव है. उनकी रिपोर्टिंग राजनीति, सामाजिक मुद्दों, जलवायु परिवर्तन, नवीकरणीय ऊर्जा, कृषि और अन्य समसामयिक विषयों पर केंद्रित रही है, जिससे वे क्षेत्रीय पत्रकारिता में एक विश्वसनीय और प्रामाणिक पत्रकार के रूप में स्थापित हुए हैं. अनुभव : पश्चिम बंगाल, झारखंड और बिहार में 3 दशक से अधिक काम करने का अनुभव है. वर्तमान भूमिका : प्रभात खबर डिजिटल (prabhatkhabar.com) में पश्चिम बंगाल के स्टेट हेड की भूमिका में हैं. वे डिजिटल न्यूज कवर करते हैं. तथ्यात्मक और जनहित से जुड़ी पत्रकारिता को प्राथमिकता देते हैं. वर्तमान में बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 पर पूरी तरह से फोकस्ड हैं. भौगोलिक विशेषज्ञता : उनकी रिपोर्टिंग का मुख्य फोकस पश्चिम बंगाल रहा है, साथ ही उन्होंने झारखंड और छत्तीसगढ़ की भी लंबे समय तक ग्राउंड-लेवल रिपोर्टिंग की है, जो उनकी क्षेत्रीय समझ और अनुभव को दर्शाता है. मुख्य विशेषज्ञता (Core Beats) : उनकी पत्रकारिता निम्नलिखित महत्वपूर्ण और संवेदनशील क्षेत्रों में गहरी विशेषज्ञता को दर्शाती है :- राज्य राजनीति और शासन : झारखंड और पश्चिम बंगाल की राज्य की राजनीति, सरकारी नीतियों, प्रशासनिक निर्णयों और राजनीतिक घटनाक्रमों पर निरंतर और विश्लेषणात्मक कवरेज. सामाजिक मुद्दे : आम जनता से जुड़े सामाजिक मुद्दों, जनकल्याण और जमीनी समस्याओं पर केंद्रित रिपोर्टिंग. जलवायु परिवर्तन और नवीकरणीय ऊर्जा : पर्यावरणीय चुनौतियों, जलवायु परिवर्तन के प्रभाव और रिन्यूएबल एनर्जी पहलों पर डेटा आधारित और फील्ड रिपोर्टिंग. डाटा स्टोरीज और ग्राउंड रिपोर्टिंग : डेटा आधारित खबरें और जमीनी रिपोर्टिंग उनकी पत्रकारिता की पहचान रही है. विश्वसनीयता का आधार (Credibility Signal) : तीन दशकों से अधिक की निरंतर रिपोर्टिंग, विशेष और दीर्घकालिक कवरेज का अनुभव तथा तथ्यपरक पत्रकारिता के प्रति प्रतिबद्धता ने मिथिलेश झा को पश्चिम बंगाल और पूर्वी भारत के लिए एक भरोसेमंद और प्रामाणिक पत्रकार के रूप में स्थापित किया है.
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