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Home पश्चिम-बंगाल कोलकाता ममता बनर्जी गुट ने चुनाव आयोग को सौंपा लिखित दस्तावेज, कहा- हमारी राष्ट्रीय समिति 2027 तक वैध

ममता बनर्जी गुट ने चुनाव आयोग को सौंपा लिखित दस्तावेज, कहा- हमारी राष्ट्रीय समिति 2027 तक वैध

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ममता बनर्जी गुट ने चुनाव आयोग को सौंपा लिखित दस्तावेज, कहा- हमारी राष्ट्रीय समिति 2027 तक वैध

TMC Symbol Dispute: ऑल इंडिया तृणमूल कांग्रेस (AITC) के चुनाव चिह्न ‘जोड़ा फूल’ पर एकाधिकार बनाये रखने के लिए ममता बनर्जी गुट ने चुनाव आयोग के समक्ष अपनी मजबूत दलील पेश की है. बागी नेता रीतब्रत बनर्जी गुट के दो-तिहाई बहुमत की चुनौती के जवाब में ममता बनर्जी खेमे ने आयोग को बताया है कि पार्टी की वर्तमान राष्ट्रीय कार्यसमिति का कार्यकाल वर्ष 2027 तक वैध है.

2027 से पहले बदलाव अवैध : ममता बनर्जी गुट

निर्वाचन आयोग को भेजे गये अपने विस्तृत कानूनी और संगठनात्मक दस्तावेज में ममता बनर्जी गुट ने साफ किया है कि तृणमूल कांग्रेस के आंतरिक संविधान और पिछली संगठनात्मक चुनाव प्रक्रिया के अनुसार, वर्तमान केंद्रीय नेतृत्व और पदाधिकारियों की समिति को वर्ष 2027 तक पार्टी के संचालन का पूर्ण वैधानिक अधिकार प्राप्त है. ममता गुट के रणनीतिकारों ने दलील दी है कि इस अवधि के बीच में किसी भी बागी गुट द्वारा समानांतर समिति का गठन करना या खुद को ‘असली तृणमूल’ घोषित करना पूरी तरह से असंवैधानिक और नियमों के खिलाफ है.

22 जून को रीतब्रत गुट ने बनायी थी नयी समिति

बंगाल चुनाव 2026 में तृणमूल कांग्रेस की पराजय के बाद बगावत करने वाले रीतब्रत बनर्जी गुट ने 22 जून को एक नयी समिति गठित कर खुद को असली तृणमूल कांग्रेस घोषित कर दिया था. ममता गुट ने इसे सीधे तौर पर खारिज कर दिया है.

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डेरेक ओब्रायन और अभिषेक बनर्जी ही अधिकृत प्रतिनिधि

चुनाव आयोग के समक्ष अपनी स्थिति को और पुख्ता करते हुए ममता बनर्जी खेमे ने याद दिलाया कि पार्टी की ओर से किसी भी आधिकारिक संवाद या प्रतिनिधित्व के लिए केवल डेरेक ओब्रायन और राष्ट्रीय महासचिव अभिषेक बनर्जी को ही अधिकृत किया गया है. हाल ही में प्रदेश अध्यक्ष पद से इस्तीफा देने वाली चंद्रिमा भट्टाचार्य या बागी खेमे के किसी अन्य नेता को आयोग के समक्ष पार्टी का पक्ष रखने का कोई कानूनी अधिकार नहीं है.

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TMC Symbol Dispute: अब गेंद चुनाव आयोग के पाले में

वरिष्ठ नेताओं का कहना है कि पार्टी के अधिकांश सांसद, जिला स्तर के संगठन और जमीनी कार्यकर्ता आज भी ममता बनर्जी के नेतृत्व के साथ मजबूती से खड़े हैं. ऐसे में केवल कुछ विधायकों और सांसदों के पाला बदल लेने से मूल संगठन की वैधता समाप्त नहीं हो जाती. अब गेंद पूरी तरह से चुनाव आयोग के पाले में है, जो दोनों गुटों द्वारा जमा किये गये दस्तावेजों की गहन जांच के बाद व्यक्तिगत सुनवाई की तारीख तय करेगा.

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