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Home पश्चिम-बंगाल कोलकाता बंगाल में महाराष्ट्र जैसे विभाजन के दावों पर भड़के शोभनदेव चट्टोपाध्याय, कहा- ममता बनर्जी के पास ही रहेगा ‘जोड़ा फूल’

बंगाल में महाराष्ट्र जैसे विभाजन के दावों पर भड़के शोभनदेव चट्टोपाध्याय, कहा- ममता बनर्जी के पास ही रहेगा ‘जोड़ा फूल’

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बंगाल में महाराष्ट्र जैसे विभाजन के दावों पर भड़के शोभनदेव चट्टोपाध्याय, कहा- ममता बनर्जी के पास ही रहेगा ‘जोड़ा फूल’
शोभनदेव चट्टोपाध्याय और रीतब्रत बनर्जी.

TMC Split Rumors: पश्चिम बंगाल की राजनीति में तृणमूल कांग्रेस (TMC) के टूटने और महाराष्ट्र की तरह पार्टी के सिंबल पर कब्जे की खबरों के बीच ममता बनर्जी के सबसे वफादार शोभनदेव चट्टोपाध्याय ने मोर्चा संभाल लिया है. टीएमसी के पहले निर्वाचित विधायक और विधानसभा में मनोनीत नेता प्रतिपक्ष (LoP) चट्टोपाध्याय ने मंगलवार को दल-बदल और बगावत की सभी अटकलों को खारिज कर दिया. उन्होंने दावा किया कि तृणमूल कांग्रेस का बहुमत आज भी ममता बनर्जी के साथ मजबूती से खड़ा है. संगठन पर पार्टी के पुराने वफादारों का ही नियंत्रण रहेगा.

पैसे और सत्ता के दम पर बगावत कराने की कोशिश : शोभनदेव

शोभनदेव चट्टोपाध्याय का यह बयान ऐसे समय में आया है, जब निष्कासित और बागी नेताओं (ऋतब्रत बनर्जी और संदीपन साहा) के गुट 20 से 50 विधायकों के समर्थन का दावा कर रहे हैं. शोभनदेव ने इन दावों के पीछे की इनसाइड स्टोरी को उजागर करते हुए गंभीर आरोप लगाये.

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1. दबाव में दिलाये जा रहे फर्जी बयान

शोभनदेव ने कहा कि सत्तारूढ़ दल भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के प्रशासनिक दबाव और केंद्रीय एजेंसियों के डर के कारण कुछ विधायकों को जबरन फर्जी हस्ताक्षर (Signature Scandal) जैसे मनगढ़ंत बयान देने के लिए मजबूर किया जा रहा है.

2. धनबल का हो रहा नंगा नाच

बालीगंज के वरिष्ठ विधायक ने आरोप लगाया कि तृणमूल कांग्रेस को अस्थिर करने और विपक्षी दल को तोड़ने के लिए भारी मात्रा में पैसों की पंपिंग (धनबल का इस्तेमाल) की जा रही है. कुछ लोग इस प्रलोभन और दबाव के आगे घुटने टेक सकते हैं, लेकिन इससे कोई बड़ा विद्रोह नहीं होने वाला.

3. सिंबल पर कोई आंच नहीं

उन्होंने कहा कि कोई चाहे जितनी सीक्रेट बैठकें कर ले, लेकिन तृणमूल कांग्रेस का आधिकारिक चुनाव चिह्न ‘जोड़ा घास फूल’ हमेशा ममता बनर्जी के पास ही रहेगा.

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‘सिग्नेचर गेट’ और ‘असली टीएमसी’ की जंग

इस पूरी रिपोर्ट का सबसे पेचीदा कानूनी पहलू यह है कि इस समय टीएमसी के भीतर नेता प्रतिपक्ष (LoP) की कुर्सी को लेकर ही एक समानांतर जंग छिड़ चुकी है. ममता बनर्जी ने विधानसभा सचिवालय को पत्र सौंपकर शोभनदेव चट्टोपाध्याय को नेता प्रतिपक्ष मनोनीत किया था. बागी विधायकों के गुट ने आरोप लगाया है कि इस समर्थन पत्र पर उनके हस्ताक्षर नहीं हैं. इस जाली हस्ताक्षर की जांच राज्य की सीआईडी (CID) कर रही है.

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तृणमूल कांग्रेस के बागी विधायकों का दावा

तृणमूल कांग्रेस के बागी गुट के नेताओं ने मंगलवार को खुलकर दावा किया कि उनके पास 50 विधायकों का दो-तिहाई बहुमत है. उन्होंने साफ कहा कि वे खुद ‘असली टीएमसी’ हैं और विधानसभा में उनके नेता रीतब्रत बनर्जी होंगे, न कि शोभनदेव चट्टोपाध्याय. बागी गुट विधानसभा अध्यक्ष (Speaker) से मुलाकात कर दो-तिहाई बहुमत की सूची सौंपने की तैयारी में है, जिससे शोभनदेव के दावों की जमीनी परीक्षा होने वाली है.

60 ‘गायब’ विधायकों पर ओल्ड गार्ड की पैनी नजर

294 सदस्यीय विधानसभा में टीएमसी ने इस बार 80 सीटें जीती हैं. सोमवार को जब पार्टी ने 2 बागी विधायकों को निष्कासित किया, तब 61 विधायकों ने बैठक से दूरी बना ली थी. शोभनदेव ने स्वीकार किया कि स्थिति संवेदनशील है, लेकिन उन्होंने दावा किया कि वे और कालीघाट का थिंक टैंक लगातार एक-एक विधायक के संपर्क में है.

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TMC Split Rumors: शुभेंदु अधिकारी का दिल्ली दौरा

मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी के अचानक दिल्ली रवाना होने की खबरों ने कोलकाता के सियासी पारे को सातवें आसमान पर पहुंचा दिया है. कयास लगाये जा रहे हैं कि भाजपा इस बगावती गुट को कानूनी रूप से स्थापित कराने के लिए अपनी रणनीति को अंतिम रूप दे रही है.

1998 से साये की तरह ममता बनर्जी के साथ शोभनदेव

शोभनदेव चट्टोपाध्याय वर्ष 1998 में टीएमसी की स्थापना के समय से ममता बनर्जी के साथ साये की तरह रहे हैं. उनका यह बयान साफ करता है कि बिखरते कुनबे को बचाने के लिए पार्टी के पुराने वफादारों ने अब अपनी पूरी ताकत लगा दी है. शोभनदेव ने वर्ष 2021 में ममता बनर्जी के लिए भवानीपुर विधानसभा सीट खाली की थी, ताकि टीएमसी सुप्रीमो उपचुनाव जीतकर मुख्यमंत्री बनी रहें.

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मिथिलेश झा PrabhatKhabar.com में पश्चिम बंगाल राज्य प्रमुख (State Head) के रूप में कार्यरत वरिष्ठ पत्रकार हैं. उन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में 30 वर्षों से अधिक का व्यापक अनुभव है. उनकी रिपोर्टिंग राजनीति, सामाजिक मुद्दों, जलवायु परिवर्तन, नवीकरणीय ऊर्जा, कृषि और अन्य समसामयिक विषयों पर केंद्रित रही है, जिससे वे क्षेत्रीय पत्रकारिता में एक विश्वसनीय और प्रामाणिक पत्रकार के रूप में स्थापित हुए हैं. अनुभव : पश्चिम बंगाल, झारखंड और बिहार में 3 दशक से अधिक काम करने का अनुभव है. वर्तमान भूमिका : प्रभात खबर डिजिटल (prabhatkhabar.com) में पश्चिम बंगाल के स्टेट हेड की भूमिका में हैं. वे डिजिटल न्यूज कवर करते हैं. तथ्यात्मक और जनहित से जुड़ी पत्रकारिता को प्राथमिकता देते हैं. वर्तमान में बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 पर पूरी तरह से फोकस्ड हैं. भौगोलिक विशेषज्ञता : उनकी रिपोर्टिंग का मुख्य फोकस पश्चिम बंगाल रहा है, साथ ही उन्होंने झारखंड और छत्तीसगढ़ की भी लंबे समय तक ग्राउंड-लेवल रिपोर्टिंग की है, जो उनकी क्षेत्रीय समझ और अनुभव को दर्शाता है. मुख्य विशेषज्ञता (Core Beats) : उनकी पत्रकारिता निम्नलिखित महत्वपूर्ण और संवेदनशील क्षेत्रों में गहरी विशेषज्ञता को दर्शाती है :- राज्य राजनीति और शासन : झारखंड और पश्चिम बंगाल की राज्य की राजनीति, सरकारी नीतियों, प्रशासनिक निर्णयों और राजनीतिक घटनाक्रमों पर निरंतर और विश्लेषणात्मक कवरेज. सामाजिक मुद्दे : आम जनता से जुड़े सामाजिक मुद्दों, जनकल्याण और जमीनी समस्याओं पर केंद्रित रिपोर्टिंग. जलवायु परिवर्तन और नवीकरणीय ऊर्जा : पर्यावरणीय चुनौतियों, जलवायु परिवर्तन के प्रभाव और रिन्यूएबल एनर्जी पहलों पर डेटा आधारित और फील्ड रिपोर्टिंग. डाटा स्टोरीज और ग्राउंड रिपोर्टिंग : डेटा आधारित खबरें और जमीनी रिपोर्टिंग उनकी पत्रकारिता की पहचान रही है. विश्वसनीयता का आधार (Credibility Signal) : तीन दशकों से अधिक की निरंतर रिपोर्टिंग, विशेष और दीर्घकालिक कवरेज का अनुभव तथा तथ्यपरक पत्रकारिता के प्रति प्रतिबद्धता ने मिथिलेश झा को पश्चिम बंगाल और पूर्वी भारत के लिए एक भरोसेमंद और प्रामाणिक पत्रकार के रूप में स्थापित किया है.
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