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Home पश्चिम-बंगाल कोलकाता ममता बनर्जी की मानहानि मामले में लगा स्टे, कौस्तव बागची को सुप्रीम कोर्ट से राहत

ममता बनर्जी की मानहानि मामले में लगा स्टे, कौस्तव बागची को सुप्रीम कोर्ट से राहत

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ममता बनर्जी की मानहानि मामले में लगा स्टे, कौस्तव बागची को सुप्रीम कोर्ट से राहत
सुप्रीम कोर्ट

Kaustav Bagchi : कोलकाता. सुप्रीम कोर्ट ने भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) नेता कौस्तव बागची के खिलाफ मानहानि मामले में यथास्थिति बनाये रखने का आदेश दिया. अधिवक्ता कौस्तव बागची पर आरोप है कि उन्होंने एक पुस्तक के अंश सोशल मीडिया पर साझा किये, जिसमें पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के कथित निजी जीवन के बारे में आरोप लगाये गये हैं. सुप्रीम कोर्ट में न्यायमूर्ति बीवी नागरत्ना और न्यायमूर्ति उज्जल भुइयां के पीठ ने बागची द्वारा कलकत्ता उच्च न्यायालय के एक आदेश के खिलाफ दायर याचिका पर पश्चिम बंगाल सरकार को नोटिस जारी किया.

हाईकोर्ट ने खारिज कर दी थी याचिका

उच्च न्यायालय ने उनकी याचिका खारिज कर दी थी, जिसमें बागची ने मानहानि मामले में उन्हें समन जारी करने वाले निचली अदालत के आदेश को चुनौती दी थी. यह विवाद उस पुस्तक को लेकर उत्पन्न हुआ, जो पहली बार 2015 में प्रकाशित हुई थी और जिसमें मुख्यमंत्री पद ग्रहण करने से पहले उनके निजी जीवन के कुछ अन्य कथित विवरण भी प्रकाशित किये गये थे. पेशे से वकील बागची ने उक्त पुस्तक के कुछ पृष्ठ सोशल मीडिया मंचों पर अपलोड किए और मुख्यमंत्री के निजी जीवन के बारे में कई टेलीविजन नेटवर्क पर कथित तौर पर टिप्पणियां भी कीं.

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सत्र न्यायालय में दर्ज हुआ था मुकदमा

इसके बाद, लोक अभियोजक ने वैधानिक मंजूरी लेकर शहर की सत्र अदालत में बीएनएसएस-2023 की धारा 222(2) (मानहानि के लिए अभियोजन) का हवाला देते हुए शिकायत दर्ज की, जिसमें यह आरोप लगाया गया कि बागची ने बीएनएस की धारा 356(2) (भगोड़े अपराधी की अनुपस्थिति में जांच, सुनवाई या निर्णय) के तहत दंडनीय अपराध किया. सत्र अदालत ने आवेदक को बीएनएस-2023 की धारा 223 (आरोपी को सुनवाई का अवसर प्रदान करने) के तहत सुनवाई का अवसर दिया, मामले का संज्ञान लिया और समन जारी किया.

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