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बंगाल विधानसभा में ओबीसी आरक्षण से जुड़े 2 बिल पास, 113 समुदाय सूची से बाहर

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बंगाल विधानसभा में ओबीसी आरक्षण से जुड़े 2 बिल पास, 113 समुदाय सूची से बाहर

OBC Reservation Amendment Bills: पश्चिम बंगाल विधानसभा ने अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) श्रेणी के आरक्षण से जुड़े 2012 के अधिनियम में संशोधन करने वाले 2 विधेयकों को सोमवार को पारित कर दिया. कलकत्ता हाईकोर्ट के निर्देशों के अनुरूप कदम उठाते हुए सरकार ने ओबीसी आरक्षण के ढांचे को 17 फीसदी से घटाकर 7 प्रतिशत कर दिया है. संशोधन के बाद 66 समुदायों को ओबीसी श्रेणी में आरक्षण का लाभ मिलता रहेगा. बिना किसी क्षेत्रीय सर्वेक्षण के शामिल किये गये 113 समुदायों को इस सूची से बाहर कर दिया गया है.

टीएमसी के बागी रीतब्रत गुट का वॉकआउट

विधेयकों को पारित किये जाने के दौरान सदन में राजनीतिक ड्रामा भी देखने को मिला. विपक्ष के नेता रीतब्रत बनर्जी के नेतृत्व में तृणमूल कांग्रेस (TMC) के कुछ बागी विधायकों ने सदन से वॉकआउट किया. हालांकि, ममता बनर्जी के खेमे के विधायकों ने मतदान प्रक्रिया में हिस्सा लिया.

पक्ष में पड़े 186 वोट, विपक्ष में सिर्फ 17

मत विभाजन के दौरान कुल 186 विधायकों ने दोनों विधेयकों के पक्ष में मतदान किया. 17 विधायकों ने इसके खिलाफ वोट डाला. 6 सदस्यों ने मतदान में हिस्सा नहीं लिया. विधानसभा अध्यक्ष रथींद्र बोस ने इंडियन सेक्युलर फ्रंट (ISF) के विधायक नौशाद सिद्दीकी और टीएमसी के बागी विधायक विश्वनाथ दास के विरोध और मत विभाजन के अनुरोध पर यह आदेश दिया.

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संशोधन के पीछे कोई राजनीतिक मकसद नहीं : मंत्री

विधेयक को सदन के पटल पर रखते हुए पश्चिम बंगाल के पिछड़ा वर्ग विकास मंत्री गौरीशंकर घोष ने स्पष्ट किया कि सरकार केवल हाईकोर्ट के निर्देशों के तहत काम कर रही है. इसके पीछे कोई राजनीतिक एजेंडा नहीं है. उन्होंने कहा- पिछली सरकार ने पिछड़ा वर्ग आयोग को दरकिनार कर दिया था. यही वजह थी कि हाईकोर्ट ने उस प्रक्रिया को अवैध घोषित किया. अब पिछड़ा वर्ग आयोग पूरी जांच करेगा और यदि उसे लगता है कि किसी नये समुदाय को शामिल किया जाना चाहिए, तो वह राज्य सरकार को अपनी सिफारिशें भेज सकता है.

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मई 2024 में हाईकोर्ट ने रद्द किये थे 12 लाख प्रमाण पत्र

मई 2024 में कलकत्ता हाईकोर्ट ने वर्ष 2010 से 2012 के बीच शामिल किये गये 77 अतिरिक्त समुदायों का ओबीसी दर्जा और लगभग 12 लाख प्रमाण पत्र रद्द कर दिये थे. अदालत ने इन्हें असंवैधानिक माना था. इसके बाद राज्य सरकार ने धर्म-आधारित वर्गीकरण योजनाओं को समाप्त कर वर्ष 2010 से पहले के 66 समुदायों को नियमित किया.

OBC Reservation Amendment Bills: विधेयकों की मुख्य बातें और कानूनी प्रावधान

1. पश्चिम बंगाल पिछड़ा वर्ग (सेवाओं और पदों में रिक्तियों का आरक्षण) (संशोधन) विधेयक, 2026

  • इस विधेयक के तहत राज्य सरकार को पिछड़ा वर्ग आयोग के परामर्श से विभिन्न ओबीसी श्रेणियों के लिए आरक्षण का प्रतिशत तय करने का कानूनी अधिकार मिल गया है.
  • आरक्षित पदों का प्रतिशत आरक्षण कोटा के अनुपात में समय-समय पर संशोधित किया जा सकता है, लेकिन किसी भी स्थिति में कुल आरक्षण 50 प्रतिशत से अधिक नहीं होगा.
  • आयोग से सलाह के बाद सरकार ओबीसी समुदाय के नागरिकों को उनके सामाजिक और शैक्षणिक पिछड़ेपन के आधार पर अलग-अलग श्रेणियों में वर्गीकृत करेगी और प्रत्येक श्रेणी के लिए अलग से पद आरक्षित किये जायेंगे.

2. पश्चिम बंगाल पिछड़ा वर्ग आयोग (संशोधन) विधेयक, 2026

  • अब नागरिक सीधे ओबीसी सूची में शामिल होने के लिए आवेदन कर सकेंगे, जिसकी पूरी जांच आयोग द्वारा की जायेगी और वह सरकार को अपनी अंतिम सिफारिश सौंपेगा.
  • ओबीसी सूची में किसी समुदाय के अत्यधिक या अपर्याप्त समावेश (Inclusion) से जुड़ी शिकायतों की भी जांच आयोग करेगा और सरकार उसी के अनुरूप कदम उठायेगी.
  • आयोग के सदस्यों का कार्यकाल 3 साल का निर्धारित किया गया है, जबकि इसका सदस्य-सचिव एक सेवारत सरकारी अधिकारी होगा, जिसका कार्यकाल सरकार तय करेगी.

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मिथिलेश झा PrabhatKhabar.com में पश्चिम बंगाल राज्य प्रमुख (State Head) के रूप में कार्यरत वरिष्ठ पत्रकार हैं. उन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में 30 वर्षों से अधिक का व्यापक अनुभव है. उनकी रिपोर्टिंग राजनीति, सामाजिक मुद्दों, जलवायु परिवर्तन, नवीकरणीय ऊर्जा, कृषि और अन्य समसामयिक विषयों पर केंद्रित रही है, जिससे वे क्षेत्रीय पत्रकारिता में एक विश्वसनीय और प्रामाणिक पत्रकार के रूप में स्थापित हुए हैं. अनुभव : पश्चिम बंगाल, झारखंड और बिहार में 3 दशक से अधिक काम करने का अनुभव है. वर्तमान भूमिका : प्रभात खबर डिजिटल (prabhatkhabar.com) में पश्चिम बंगाल के स्टेट हेड की भूमिका में हैं. वे डिजिटल न्यूज कवर करते हैं. तथ्यात्मक और जनहित से जुड़ी पत्रकारिता को प्राथमिकता देते हैं. वर्तमान में बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 पर पूरी तरह से फोकस्ड हैं. भौगोलिक विशेषज्ञता : उनकी रिपोर्टिंग का मुख्य फोकस पश्चिम बंगाल रहा है, साथ ही उन्होंने झारखंड और छत्तीसगढ़ की भी लंबे समय तक ग्राउंड-लेवल रिपोर्टिंग की है, जो उनकी क्षेत्रीय समझ और अनुभव को दर्शाता है. मुख्य विशेषज्ञता (Core Beats) : उनकी पत्रकारिता निम्नलिखित महत्वपूर्ण और संवेदनशील क्षेत्रों में गहरी विशेषज्ञता को दर्शाती है :- राज्य राजनीति और शासन : झारखंड और पश्चिम बंगाल की राज्य की राजनीति, सरकारी नीतियों, प्रशासनिक निर्णयों और राजनीतिक घटनाक्रमों पर निरंतर और विश्लेषणात्मक कवरेज. सामाजिक मुद्दे : आम जनता से जुड़े सामाजिक मुद्दों, जनकल्याण और जमीनी समस्याओं पर केंद्रित रिपोर्टिंग. जलवायु परिवर्तन और नवीकरणीय ऊर्जा : पर्यावरणीय चुनौतियों, जलवायु परिवर्तन के प्रभाव और रिन्यूएबल एनर्जी पहलों पर डेटा आधारित और फील्ड रिपोर्टिंग. डाटा स्टोरीज और ग्राउंड रिपोर्टिंग : डेटा आधारित खबरें और जमीनी रिपोर्टिंग उनकी पत्रकारिता की पहचान रही है. विश्वसनीयता का आधार (Credibility Signal) : तीन दशकों से अधिक की निरंतर रिपोर्टिंग, विशेष और दीर्घकालिक कवरेज का अनुभव तथा तथ्यपरक पत्रकारिता के प्रति प्रतिबद्धता ने मिथिलेश झा को पश्चिम बंगाल और पूर्वी भारत के लिए एक भरोसेमंद और प्रामाणिक पत्रकार के रूप में स्थापित किया है.
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