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Home Rajya पश्चिम-बंगाल एनजीटी की ईस्टर्न जोनल बेंच में 203 मामले हैं पेंडिंग, बालू उठाव व पत्थर खनन के केस ज्यादा

एनजीटी की ईस्टर्न जोनल बेंच में 203 मामले हैं पेंडिंग, बालू उठाव व पत्थर खनन के केस ज्यादा

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एनजीटी की ईस्टर्न जोनल बेंच में 203 मामले हैं पेंडिंग, बालू उठाव व पत्थर खनन के केस ज्यादा

पूरे देश भर के लंबित मामलों की संख्या है 3373

एक मई, 2023 से 30 अप्रैल, 2024 तक पूर्वी जोन में 297 मामलों का हुआ है निपटारा

ईस्टर्न जोनल बेंच में बंगाल के 103, बिहार के 24, झारखंड के 25 व ओडिशा के 31 मामले हैं पेंडिंग

अन्य जोन की बेंचों में लंबित मामले :-

प्रिंसिपल बेंच (दिल्ली) – 1679

साउथ जोनल बेंच (चेन्नई) – 559

सेंट्रल जोनल बेंच (भोपाल) – 192

वेस्टर्न जोनल बेंच (पुणे) – 740

ईस्टर्न जोनल बेंच (कोलकाता) – 203

अमर शक्ति, कोलकाता.

एक समय था, जब राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) में पहुंचने वाले मामलों की सुनवाई पूरी होने में कम से कम चार से पांच साल तक का वक्त लग जाता था. लेकिन पिछले दो-तीन वर्षों में एनजीटी के मामलों के निपटारे की गति काफी तेज हुई है. इसका प्रमुख कारण है सुनवाई के मामले में एनजीटी की जोनल बेंचों की सक्रियता में आयी वृद्धि. देश भर में अभी एनजीटी के सामने अलग-अलग स्तर पर सुनवाई के लिए कुल 3373 मामले लंबित पड़े हुए हैं. इनमें पूर्वी जोन में ऐसे मामलों की संख्या 203 बतायी गयी है. वैसे लंबित पड़े मामलों की संख्या के लिहाज से ईस्टर्न जोनल बेंच की स्थिति अन्य तीन की तुलना में बेहतर है. 192 पेंडिंग केस के साथ सेंट्रल जोन बेंच इस मामले में ईस्टर्न जोन बेंच से थोड़ी अच्छी स्थिति में है.

पूर्वी जाेन की बेंच में पश्चिम बंगाल के अतिरिक्त बिहार, झारखंड व ओडिशा सहित अन्य राज्यों के भी मामले शामिल हैं. एनजीटी से संबंधित मामलों से जुड़ी अधिवक्ता अमृता पांडेय ने बताया कि पूर्वी जोन की बेंच में बिहार से जुड़े 24 मामले चल रहे हैं. झारखंड से जुड़े ऐसे मामलों की संख्या 25 है. यहां पर सबसे अधिक लंबित मामले बंगाल से ही हैं. इनकी संख्या 103 है. ओडिशा के भी 31 मामले सुनवाई के अलग-अलग स्टेज में पेंडिंग पड़े हुए हैं. एनजीटी से मिले आंकड़ों के मुताबिक, एक मई 2023 से 30 अप्रैल 2024 तक यानी पिछले वित्त वर्ष में यहां कुल 297 मामलों का निपटारा किया जा सुका है.

अवैध बालू खनन व पत्थर कटाई है बड़ी समस्या :

ईस्टर्न जोनल बेंच में दायर प्रमुख मामलों की जड़ में बालू खनन और पत्थर (गिट्टी-छर्री आदि) के लिए पहाड़ काटने जैसी समस्याएं ही प्रमुख हैं. झीलों को अवैध रूप से भरने व इनकी देखरेख से जुड़े मामले भी दर्ज हैं. झारखंड के सिदगोड़ा (जमशेदपुर) में नदी से अवैध रूप से बालू ढुलाई का मामला हो या बिहार में तालाब बचाओ अभियान से जुड़े मामले एनजीटी में पहुंचे हैं. इन राज्यों में अवैध बालू खनन को लेकर भी कई मामले दर्ज हैं. कई पेंडिंग मामलों में राज्यों का पक्ष आने को है. एनजीटी ने राज्य प्रशासन से जवाब मांगा है. बिहार के मुजफ्फरपुर स्थित एनटीपीसी प्रोजेक्ट को लेकर भी एनजीटी में मामला दर्ज हुआ है. आरोप है कि एनटीपीसी प्रोजेक्ट से निकलने वाले रासायनिक तरल से जलाशय दूषित हो रहे हैं. इस मामले में एनजीटी ने बिहार राज्य के प्रदूषण नियंत्रण पर्षद को कहा गया है कि वह वहां एक कमेटी गठित कर मामले की एक जांच रिपोर्ट प्रस्तुत करे.

बंगाल में अवैध पटाखा कारखानों से जुड़े मामले भी हैं दर्ज :

पश्चिम बंगाल में नदियों से अवैध रूप से बालू, पहाड़ों से पत्थर कटाई और कोयला खनन के साथ-साथ ही एक और बड़ी समस्या हैं अवैध पटाखा कारखाने. पश्चिम बंगाल में पिछले कुछ वर्षों में अवैध पटाखा कारखानों में हुए विस्फोट में दो दर्जन से अधिक लोगों की जानें जा चुकी हैं. उत्तर 24 परगना जिले के नैहाटी व मध्यमग्राम में ही दो अलग-अलग विस्फोट की घटनाओं में करीब 12 लोगों की जानें गयी हैं. इसके अलावा दक्षिण 24 परगना, पूर्व मेदिनीपुर सहित अन्य क्षेत्रों में भी अवैध पटाखा कारखानों में विस्फोट की घटनाएं हुई हैं, जिन्हें लेकर एनजीटी ने राज्य सरकार से रिपोर्ट मांगी थी. इन मामलों की सुनवाई में राज्य सरकार ने पटाखा उत्पादन के लिए स्पेशल क्लस्टर स्थापित करने का फैसला किया है, पर ठोस कुछ नहीं हुआ है. राज्य के छह क्षेत्रों में ये क्लस्टर बनाये जाने हैं. वैसे, राज्य सरकार ने अवैध पटाखा कारखानों को बंद करने के लिए अपने कई अभियानों की भी जानकारी एनजीटी को दी है. एक ताजा और खास तथ्य यह है कि 10 जून यानी विगत रविवार की रात ही मेदिनीपुर के कोलाघाट में फिर एक पटाखा कारखाने में विस्फोट की एक भयानक घटना हो चुकी है.नदी के किनारे से रेस्तरां हटाने व झीलों को बचाने के मामले :

(फोटो – हावड़ा में नदी किनारे खड़े होटल व रेस्तरां का)कोलकाता शहर में हावड़ा स्टेशन के पास नदी के किनारे अवैध रूप से बने होटल व रेस्तरां को लेकर एनजीटी ने कई महत्वपूर्ण फैसले सुनाए हैं. एनजीटी ने राज्य सरकार को हावड़ा स्टेशन के पास हुगली नदी से सटे इन होटल-रेस्तरां को हटाने का निर्देश दिया है, लेकिन अब तक आदेश का पालन नहीं हो सका है. जमीन पर जो जैसे था, वैसे ही है. इसके अलावा महानगर में स्थित बड़े झीलों को लेकर भी एनजीटी में कुछ मामले दर्ज हुए हैं. झीलों को बचाने के लिए एनजीटी ने राज्य सरकार की कार्य योजनाओं पर भी रिपोर्ट मांगी है. अनुमान है कि इन मामलों में भी जल्द ही सुनवाई होगी.

डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है

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