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West Bengal : एक अगस्त के बाद कोलकाता की सड़कों पर नहीं दिखेंगी बसें

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West Bengal : एक अगस्त के बाद कोलकाता की सड़कों पर नहीं दिखेंगी बसें

 West Bengal : कोलकाता में चलने वाली सैकड़ों की निजी बसें एक अगस्त से रद्द हो सकती हैं. 2009 में कलकत्ता हाई कोर्ट (Calcutta High court) द्वारा दिये गए एक आदेश के हवाला देते हुए निजी बस संगठन यह दावा कर रहे हैं. बस एसोसिएशनों की मांग है कि सेवा देने की अवधी के आधार पर निजी बसों को रद्द करने की प्रक्रिया को कोविड-19 महामारी को देखते हुए दो साल के लिए स्थगित किया जाना चाहिए. बंगाल बस सिंडिकेट, ज्वाइंट काउंसिल ऑफ बस सिंडिकेट और वेस्ट बंगाल बस एंड मिनीबस ओनर्स एसोसिएशन ने निजी बसों का कार्यकाल दो साल और बढ़ाने के लिए याचिका दायर करेगा. उनका तर्क है कि महामारी के दौरान निजी बसें दो वर्ष गैरेज में खड़ी रहीं, ऐसे में उन निजी बसों की सेवा अवधि को दो साल और बढ़ाया जाना चाहिए.

बस मालिकों का कहना है कि वह नयी बसें खरीदने की स्थिति में नहीं

निजी बस एसोसिएशन का कहना है कि लॉकडाउन के कारण परिवहन उद्योग चरमरा गया है. कोरोना के दौरान बसें नहीं चलने के कारण बस मालिकों को आर्थिक नुकसान उठाना पड़ा. अगर बसें सड़क से हटाई जाएंगी तो नई बसें सड़क पर उतारनी होंगी. जबकि बस मालिक नयी बसें खरीदने की स्थिति में नहीं हैं. कोरोना संक्रमण के कारण बस मालिकों को लगे आर्थिक झटके के कारण इतना बड़ा निवेश करना संभव नहीं है.बस मालिकों का दावा है कि डीजल से चलने वाली बस की कीमत करीब 30 लाख रुपये है. वहीं इलेक्ट्रिक बसों की कीमत 60-65 लाख तक है.

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संगठन अगस्त के पहले हफ्ते में हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटा सकता है

ज्वाइंट काउंसिल ऑफ बस सिंडिकेट के महासचिव तपन बनर्जी का कहना है कि 2009 में कलकत्ता हाई कोर्ट द्वारा दिये गए एक आदेश के अनुसार 15 वर्ष से ज्यादा पुरानी बसें कोलकाता में नहीं चलायी जा सकती. ऐसे में एक अगस्त के बाद से कोलकाती की सड़कों से सैकड़ों नहीं हजारों की संख्या में बसें रद्द हो जाएंगी. इस फैसले के खिलाफ हम फिर से अदालत का दरवाजा खटखटाने वाले हैं. हमें उम्मीद है कि अदालत पश्चिम बंगाल में निजी परिवहन उद्योग की मौजूदा वित्तीय स्थिति को समझने के बाद हमारी मांग पर विचार करेगी. संगठन अगस्त के पहले हफ्ते में कलकत्ता हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटा सकता है.

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क्या है मामला

उल्लेखनीय है कि पर्यावरणविद् सुभाष दत्त द्वारा दायर एक मामले के बाद, 2009 में कलकत्ता उच्च न्यायालय ने आदेश दिया था कि कोलकाता के पर्यावरण को बचाने के लिए कोलकाता नगर विकास प्राधिकरण क्षेत्र में 15 वर्ष से ज्यादा पुरानी बसों का चलाया नहीं जा सकता. निजी बस मालिकों का दावा है कि एक अगस्त से हजारों बसें नहीं चल पाएंगी.

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