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Home बिहार पूर्णिया मौसम के आगे झुकने को तैयार नहीं किसान, कम बारिश में भी रोपनी पर फतह

मौसम के आगे झुकने को तैयार नहीं किसान, कम बारिश में भी रोपनी पर फतह

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मौसम के आगे झुकने को तैयार नहीं किसान, कम बारिश में भी रोपनी पर फतह

बोरिंग व पंपसेट का सहारा ले किसानों ने कर डाली 90 फीसदी रोपनी

महंगा पड़ रहा पटवन पर माकूल समय पर पूरा किया रोपनी का काम

अगले दो से तीन दिनों के अंदर लक्ष्य के अनुरुप हो जाएगा आच्छादन

पूर्णिया. पिछले कुछ सालों से ठीक खरीफ के सीजन में मानसून की बेरूखी अब किसानों को बदार्श्त नहीं हो रही है. यही कारण है कि पूर्णिया के किसान मौसम की मार के आगे अब झुकने को तैयार नहीं हैं. अगर देखा जाए तो इस आल मानसून सत्र में यहां सामान्य से काफी कम बारिश हुई है. कहीं-कहीं सुखाड़ की चर्चा भी लोग कर रहे हैं पर किसानों ने समय पर खेती की जिद पर 90 फीसदी से अधिक रोपनी कर ली है. रोपनी के लिए आमतौर पर 31 जुलाई तक का समय होता है और इस बीच शेष रोपनी भी पूरी हो जाने की उम्मीद है.

गौरतलब है कि इस साल फिर मानसून रुठ गया जिससे बारिश भी दगा दे गई. किसानों की मानें तो पिछले करीब पांच सालों से मानसून माकूल मौके पर ही रुठता आ रहा है. पहले तो किसानों के होंठ सूख जाते थे पर इस बार किसानों ने भी मानसून को धता बताने की जिद ठान ली. हालांकि बीच के दिनों में हल्की बारिश हुई जिससे खेतों की नमी बरकरार रह गई और यहीं से किसानों की हिम्मत बढ़ी. कुछ महंगा जरुर पड़ा पर बोरिंग के जरिये पटवन कर किसानों ने रोपनी का लक्ष्य लगभग पूरा कर लिया. बीच-बीच में कृषि विभाग के अधिकारी भी उनकी हिम्मत बढ़ाते रहे. मझैली के मंसूर आलम, तनवीर आलम, पोखरिया के मो. नईम और मो. हासिम, बरसौनी के शंकर साह, विष्णु साह आदि किसानों का कहना है कि वे सब काफी दिनों से अच्छी बारिश के इंतजार में थे, लेकिन मौसम की बेरुखी और धान की फसल लगाने का समय निकलता देख उन्होंने रोपाई का काम तेज कर दिया.

धान के लगाए पौधों को बचाए रखना बड़ी चुनौती

गौरतलब है कि खेती में पिछड़ने के डर से अधिकतर किसानों ने पंपसेट के सहारे खेत तैयार कर पहले बिचड़ा गिराया और फिर अब काफी हद तक रोपनी भी कर ली. बोरिंग और पंपसेट से निकला पानी इतना कुछ के लिए पर्याप्त रहा पर अब आने वाले दिनों में रोपनी के बाद धान के उन पौधों को बचाना बहुत बड़ी चुनौती है जिसे कुछ दिनों के बाद फसल का रुप लेना है. विक्रमपट्टी के किसान मो. निजाम, किसान मो. शकूर, मो. नौशाद आदि ने बताया कि धान के उन खेतों में पंपसेट से नमी बनाए रखना बिन बारिश मुमकिन नहीं क्योंकि धान की फसलों की जरुरत को बारिश का पानी ही पूरा कर सकता है. किसानों ने बताया कि पंपसेट से पटवन में 250 से 300 रूपए प्रति घंटे खर्च होते हैं और लगातार इतना खर्च कर पाना मुश्किल होगा. किसानों का कहना है किअभी भी बारिश नहीं हुई तो खेती काफी पिछड़ जाएगी जिसका बुरा असर पैदावार पर पड़ेगा.——————

आंकड़ों पर एक नजर

01 लाख हेक्टेयर में है धान के आच्छादन का लक्ष्य90 फीसदी तक हो चुका है रोपनी का काम10 फीसदी अगले तीन दिनों के अंदर होगा पूरा

6800 हैक्टेयर में पूर्णिया पूर्व प्रखंड में लगाया जाता है धान4850 हैक्टेयर में कसबा प्रखंड के किसान करते हैं धान की खेती

4675 हैक्टेयर भूखंड जलालगढ़ में धान के लिए है रिजर्व9515 हैक्टेयर में अमौर के किसान लगाते हैं धान

6800 हैक्टेयर में केनगर प्रखंड में होती है धान की खेती

6425 हैक्टेयर भूमि पर बायसी के किसान उगाते हैं धान—————————————

बिचड़ा का समय

बिचड़ा- 01 जून से 15 जून तक

रोपनी-01 जुलाई से 31जुलाई तकहाई ब्रिड-15 जून से मध्य जुलाई तक————————–

फोटो-30 पूर्णिया 1- किसानों के खेत में लगा धान

डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है

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