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Home Rajya ओडिशा Rourkela News: राउरकेला सरकारी अस्पताल की ‘मेरा बच्चा-मेरा पेड़’ पहल से पर्यावरण संरक्षण और पेरेंटिंग को मिला बढ़ावा

Rourkela News: राउरकेला सरकारी अस्पताल की ‘मेरा बच्चा-मेरा पेड़’ पहल से पर्यावरण संरक्षण और पेरेंटिंग को मिला बढ़ावा

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Rourkela News: राउरकेला सरकारी अस्पताल की ‘मेरा बच्चा-मेरा पेड़’ पहल से पर्यावरण संरक्षण और पेरेंटिंग को मिला बढ़ावा

Rourkela News: राउरकेला सरकारी अस्पताल (आरजीएच) की स्पेशल नियोनेटल केयर यूनिट (एसएनसीयू) ने बहुत कम वजन वाले बच्चों के बारे में जागरुकता फैलाने के लिए एक अनोखा तरीका अपनाया है. यूनिट ने इसे पर्यावरण की देखभाल से भी जोड़ दिया है. एसएनसीयू के नोडल अधिकारी एवं बाल रोग विशेष डॉ प्रशांत पात्र बताते हैं कि यह विचार हमें तब आया, जब हम समय से पहले जन्मे उन बच्चों के सही विकास को सुनिश्चित करने की कोशिश कर रहे थे, जिनका जन्म के समय वजन 1.5 किलोग्राम से भी कम था.

पेड़ों के साथ इंसानी रिश्ते को मजबूत करना है उद्देश्य

डॉ पात्र ने कहा कि हमारे लिए यह एक बड़ी चुनौती होती है कि हम बच्चे को सुरक्षित और स्वस्थ रखें और साथ ही उसके विकास को भी बनाये रखें. उन्होंने कहा कि हमें यह विचार आया कि क्यों न इसे प्रकृति की देखभाल से जोड़ दिया जाए? इसमें माता-पिता भी प्रकृति की रक्षा में थोड़ा योगदान दे सकते हैं. खासकर तेजी से हो रहे शहरीकरण के इस दौर में, जब पर्यावरण खतरे में है, वे पर्याप्त संख्या में पेड़ लगाकर अपना योगदान दे सकते हैं. उन्होंने इसके पीछे यह तर्क दिया कि यहां जन्म लेने वाले ज्यादातर बच्चे आदिवासी परिवारों से होते हैं, जहां जन्म से पहले की देखभाल के बारे में जागरुकता का स्तर अभी भी कम है. लेकिन आदिवासियों की प्रकृति के साथ रहने और उससे सबसे ज्यादा प्यार करने की एक लंबी परंपरा रही है. इसे ध्यान में रखते हुए हमें यह विचार आया. इस पूरे प्रयास का उद्देश्य पेड़ों के साथ इंसानी रिश्ते को मजबूत करना है, क्योंकि स्वस्थ मानवता के लिए यह आज की सबसे बड़ी जरूरत है. डॉक्टर पात्र ने कहा कि इसी बात को ध्यान में रखते हुए हमने यह अभियान शुरू किया ‘मेरा बच्चा-मेरा पेड़ : प्रकृति के साथ पालन-पोषण’.

एसएनसीयू से छुट्टी मिलने पर बच्चे के माता-पिता को दिया जाता है फलदार पेड़

जन्म के समय 1.5 किलोग्राम से कम वज़न वाले हर बच्चे के स्वस्थ होकर अस्पताल से छुट्टी मिलने पर, आरजीएच का एसएनसीयू उस बच्चे के माता-पिता को फलदार पेड़ का एक पौधा उपहार में देते हैं. माता-पिता को यह सलाह दी जाती है कि वे अपने बच्चे की देखभाल के साथ-साथ, अपने घर के आंगन में उस पौधे को सही तरीके से लगायें और उसकी उचित देखभाल करें. समय के साथ-साथ यह फलदार पेड़ परिवार की आमदनी बढ़ाने में भी मदद करेगा और इसके साथ-साथ, उचित देखभाल मिलने पर बच्चा भी स्वस्थ होकर बड़ा होगा.

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वन विभाग और रोटरी क्लब देते हैं सहयोग

डॉ पात्र ने कहा कि इस कार्य में राउरकेला वन विभाग (जिसका नेतृत्व उस समय पूर्व डीएफओ यशवंत सेठी कर रहे थे) और राउरकेला सेंट्रल के रोटरी क्लब ने मिलकर हाथ बढ़ाया है. वन विभाग की ओर से पौधे मुफ्त दिये जाते हैं. रोटरी क्लब अन्य गतिविधियों में सहयोग करता है. राउरकेला से विदाई से ठीक पहले तत्कालीन डीएफओ सेठी ने कहा था, निश्चित रूप से यह एक अनोखी पहल है, और मैं अपनी नयी पोस्टिंग वाली जगह पर भी इसे लागू करने की पूरी कोशिश करूंगा. डॉ पात्र ने माता-पिता को सलाह देते हुए कहा कि वे अपने बच्चों की फॉलो-अप देखभाल के लिए नियमित अंतराल पर एसएनसीयू आते रहें और साथ ही उन पेड़ों के बढ़ने का सबूत भी दिखायें, जिन्हें उन्होंने लगाया था.

21 जनवरी 2026 को शुरू की गयी थी पहल, अब तक बांटे गये दर्जनों पौधे

यह पहल 21 जनवरी, 2026 को शुरू की गयी थी ओर अब तक दर्जनों पौधे उपहार में बांटे जा चुके हैं. माता-पिता को इन दोनों ही जिम्मेदारियों में और ज्यादा शामिल करने के लिए, एसएनसीयू ने एक और तरीका सोचा है. डॉ पात्रा ने कहा कि हमारी योजना उन माता-पिता को सम्मानित करने की है, जिन्हें एक साल की फॉलो-अप अवधि के अंत में सबसे ज्यादा जिम्मेदार माना जायेगा, यानी वे जिन्होंने सही देखभाल करके अपने बच्चों और पेड़ों, दोनों के ही उचित विकास की संभावनाओं को साकार किया है. पेड़ों के विकास की निगरानी और जरूरत पड़ने पर जरूरी उपाय करने का काम वन विभाग के कर्मचारी करेंगे. डॉ पात्रा ने कहा कि हम इस गतिविधि को जारी रखने के लिए राउरकेला के नए डीएफओ के साथ चर्चा करने जा रहे हैं.

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