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झारखंड में बच्चा चोरी की अफवाह से खौफ, घाटशिला बच्चों को आंगनबाड़ी नहीं भेज रहे ग्रामीण

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झारखंड में बच्चा चोरी की अफवाह से खौफ, घाटशिला बच्चों को आंगनबाड़ी नहीं भेज रहे ग्रामीण
घाटशिला के बड़ाकुर्शी आंगनबाड़ी केंद्र में एक भी बच्चा नहीं केवल सहायिका केंद्र के बाहर खड़ी मिली.

घाटशिला से मो परवेज और प्रकाश दास की रिपोर्ट

Child Kidnapping Rumor: पश्चिम बंगाल की सीमा से उठी बच्चा चोरी की अफवाह की आग में घाटशिला अनुमंडल के गांवों में भी पैर पसार चुकी है. ग्रामीण अपने बच्चों की सुरक्षा को लेकर चिंतित हैं. बच्चा चोरी की खौफ से वे अपने बच्चों को आंगनबाड़ी केंद्रों में नहीं भेज रहे हैं. केंद्रों में बच्चों की उपस्थिति नहीं के बराबर रह गयी है. ‘प्रभात खबर’ की टीम ने गुरुवार को बड़ाकुर्शी और हेंदलजुड़ी पंचायत के केंद्रों में स्थिति देखी.

बड़ाकुर्शी में एक भी बच्चा नहीं था मौजूद

बड़ाकुर्शी आंगनबाड़ी केंद्र में सुबह 11.18 बजे एक भी बच्चा मौजूद नहीं था. सहायिका बिंदु रानी महतो ने बताया कि यहां 24 बच्चे नामांकित हैं, लेकिन अफवाह फैलने के बाद से कोई नहीं आ रहा है. सुंदरपुर आंगनबाड़ी केंद्र सुबह 11.30 बजे तक बंद पाया गया. केंद्र की सेविका भवानी महतो रास्ते में मिलीं. आसपास के अभिभावकों से बात की गयी. उन्होंने कहा कि जहां देखो, बच्चा चोरी की बातें चल रही हैं. ऐसे में बच्चों को आंगनबाड़ी केंद्र कैसे भेजें. हेंदलजुड़ी के राजाबासा केंद्र की सेविका मालती महतो ने बताया कि बच्चा चोरी की अफवाह के बाद बच्चों की संख्या काफी कम हो गयी है. हम लोग गांव-गांव जाकर अभिभावकों को समझा रहे हैं, लेकिन कोई भी अपने बच्चे को भेजने को तैयार नहीं है.

सबर समाज सहमा, घरों से नहीं निकल रहे बच्चे

हलुदबनी क्षेत्र के केंद्रों की स्थिति और भी खराब है, जहां आदिम जनजाति सबर समाज के लोग खौफ के कारण अपने बच्चों को घर से बाहर नहीं निकलने दे रहे हैं. केंद्रों में बच्चों की संख्या लगातार घट रही है. इसी गांव में दो दिन पूर्व एक संदिग्ध को देखने जाने पर ग्रामीणों ने घेराबंदी की थी. रात में ड्रोन उड़ता देख ग्रामीण और भी सहम गये हैं.

क्या कहते हैं ग्रामीण

बड़ाकुर्शी गांव की सबिता सिंह ने कहा कि ग्रामीण अपने बच्चों को घरों में कैद कर रख रहे हैं. उन्हें न खेलने जाने दे रहे हैं, न ही किसी अन्य काम से अकेले घर से बाहर निकलने दे रहे हैं. ग्रामीण डर के साये में जी रहे हैं. जोगेन सिंह ने कहा कि क्षेत्र में अफवाहों का बाजार गर्म है. इसका सीधा असर बच्चों और उनके परिजनों पर पड़ रहा है. ग्रामीणों के चेहरों पर बच्चा चोर गिरोह का खौफ साफ देखा जा सकता है.

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अफवाह का साइड इफेक्ट

गांवों में कपड़ा, खिलौना और टूटे-फूटे सामान खरीदने-बेचने वाले सहमे हुए हैं. डर के कारण वे गांवों में नहीं जा रहे हैं. कई सर्वे टीमें भी डर के मारे गांवों में नहीं जा रही हैं. अनजान चेहरों को देखकर ग्रामीण घेराबंदी कर रहे हैं. कई गांवों में रात के समय ग्रामीण पहरेदारी कर रहे हैं. रात में किसी के यहां मेहमान आने पर भी परेशानी हो रही है.

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कुमार विश्वत सेन प्रभात खबर डिजिटल में डेप्यूटी चीफ कंटेंट राइटर हैं. इनके पास हिंदी पत्रकारिता का 25 साल से अधिक का अनुभव है. इन्होंने 21वीं सदी की शुरुआत से ही हिंदी पत्रकारिता में कदम रखा. दिल्ली विश्वविद्यालय से हिंदी पत्रकारिता का कोर्स करने के बाद दिल्ली के दैनिक हिंदुस्तान से रिपोर्टिंग की शुरुआत की. इसके बाद वे दिल्ली में लगातार 12 सालों तक रिपोर्टिंग की. इस दौरान उन्होंने दिल्ली से प्रकाशित दैनिक हिंदुस्तान दैनिक जागरण, देशबंधु जैसे प्रतिष्ठित अखबारों के साथ कई साप्ताहिक अखबारों के लिए भी रिपोर्टिंग की. 2013 में वे प्रभात खबर आए. तब से वे प्रिंट मीडिया के साथ फिलहाल पिछले 10 सालों से प्रभात खबर डिजिटल में अपनी सेवाएं दे रहे हैं. इन्होंने अपने करियर के शुरुआती दिनों में ही राजस्थान में होने वाली हिंदी पत्रकारिता के 300 साल के इतिहास पर एक पुस्तक 'नित नए आयाम की खोज: राजस्थानी पत्रकारिता' की रचना की. इनकी कई कहानियां देश के विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशित हुई हैं.
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