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Home Rajya झारखण्ड सोलर पंप योजना से झारखंड के 48,000 किसानों की बढ़ी आमदनी, खेती की लागत घटी

सोलर पंप योजना से झारखंड के 48,000 किसानों की बढ़ी आमदनी, खेती की लागत घटी

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सोलर पंप योजना से झारखंड के 48,000 किसानों की बढ़ी आमदनी, खेती की लागत घटी
झारखंड के 48,000 किसानों के पास सोलर पंप. एआई जेनरेटेड प्रतीकात्मक तस्वीर

रांची से सुनील चौधरी की रिपोर्ट

Solar Pump Scheme: झारखंड अब सौर पंप स्थापना में देश के टॉप पांच राज्यों में शुमार हो चुका है. इस योजना का सबसे बड़ा लाभ छोटे और सीमांत किसानों को मिला है. उन्हें अब सिंचाई के लिए डीजल या अस्थिर बिजली पर निर्भर नहीं रहना पड़ता है. झारखंड में सोलर एग्रीकल्चर पंप स्कीम पीएम-कुसुम योजना के तहत संचालित किया जाता है. अब यह कामयाबी की नई कहानी बन चुका है. इसका खुलासा केंद्र सरकार के निर्देश पर स्विच ऑन फाउंडेशन द्वारा थर्ड पार्टी फील्ड वेरीफिकेशन की रिपोर्ट में किया गया है.

किसानों की आमदनी में 8-12 हजार की बढ़ोतरी

रिपोर्ट के अनुसार, झारखंड के 48,891 किसानों ने सोलर पंप लगाया है. इससे किसानों की मासिक आय 8-12 हजार रुपये बढ़ी है. उनकी डीजल पर निर्भरता घटी. इससे उनकी बचत 1,000 रुपये बढ़ गई है. इससे पहले राज्य के कृषि क्षेत्र में वर्षा पर अत्यधिक निर्भरता, ग्रामीण इलाकों में ग्रिड बिजली की कमी और डीजल आधारित सिंचाई की महंगाई के कारण कई समस्याओं का सामना करना पड़ता था.

किसानों को कौन देता है सोलर पंप

सोलर एग्रीकल्चर पंप स्कीम का संचालन झारखंड रिन्यूएबल एनर्जी डेवलपमेंट एजेंसी (जेरेडा) द्वारा किया जाता है. यह स्कीम 2019 से लागू है. जानकारी के अनुसार, 48,891 किसानों द्वारा लगाए गए सोलर पंप की क्षमता करीब 100 मेगावाट सौर ऊर्जा की हो चुकी है. सर्वे में बताया गया है कि सौर पंप लगाने से किसानों का डीजल खर्च लगभग समाप्त हो गया है. पहले जहां सिंचाई पर सालाना करीब 70,000 रुपये तक खर्च होते थे, अब यह खर्च लगभग शून्य हो गया है. इससे एक किसान को सालाना करीब 80 हजार रुपये तक की बचत हो रही है. सर्वे में शामिल किसानों ने बताया कि सौर पंप लगने के बाद उनकी मासिक आय आठ से 12 हजार रुपये तक की बढ़ी है. फसल विविधीकरण के कारण सब्जी, दलहन और तिलहन जैसी उच्च मूल्य वाली फसलें उगाने का अवसर मिला है.

किसानों को मिलती है 97% तक सब्सिडी

झारखंड सरकार ने इस योजना को सफल बनाने के लिए विशेष सब्सिडी मॉडल अपनाया है. केंद्र और राज्य मिलकर 96-97% तक अनुदान दे रहे हैं, जिससे किसानों का योगदान सिर्फ पांच हजार से 10 हजार रुपये तक रह गया है. इस कम लागत के कारण योजना की मांग तेजी से बढ़ी और राज्य में 48891 सोलर पंप स्थापित हो चुके हैं. जबकि कुल स्वीकृत संख्या 86985 है. रिपोर्ट बताती है कि पहले 88% किसान सिर्फ खरीफ मौसम में खेती करते थे, लेकिन सौर पंप के बाद 50% किसान गर्मी की फसल भी उगाने लगे हैं. सर्वे में पाया गया कि लगभग 20% सोलर पंप महिला किसानों के नाम पर हैं. इससे महिलाओं की खेती में भागीदारी बढ़ी और उन्हें आर्थिक निर्णय लेने का मौका मिला.

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योजना की मुख्य उपलब्धियां

  • किसानों का डीजल खर्च लगभग समाप्त
  • सालाना 80 हजार रुपये तक बचत संभव
  • मासिक आय में 8-12 हजार रुपये तक बढ़ोतरी
  • 50% किसान अब सालभर खेती कर रहे हैं
  • 20% पंप महिलाओं के नाम पर स्थापित
  • 2350 से अधिक रोजगार सृजित

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कुमार विश्वत सेन प्रभात खबर डिजिटल में डेप्यूटी चीफ कंटेंट राइटर हैं. इनके पास हिंदी पत्रकारिता का 25 साल से अधिक का अनुभव है. इन्होंने 21वीं सदी की शुरुआत से ही हिंदी पत्रकारिता में कदम रखा. दिल्ली विश्वविद्यालय से हिंदी पत्रकारिता का कोर्स करने के बाद दिल्ली के दैनिक हिंदुस्तान से रिपोर्टिंग की शुरुआत की. इसके बाद वे दिल्ली में लगातार 12 सालों तक रिपोर्टिंग की. इस दौरान उन्होंने दिल्ली से प्रकाशित दैनिक हिंदुस्तान दैनिक जागरण, देशबंधु जैसे प्रतिष्ठित अखबारों के साथ कई साप्ताहिक अखबारों के लिए भी रिपोर्टिंग की. 2013 में वे प्रभात खबर आए. तब से वे प्रिंट मीडिया के साथ फिलहाल पिछले 10 सालों से प्रभात खबर डिजिटल में अपनी सेवाएं दे रहे हैं. इन्होंने अपने करियर के शुरुआती दिनों में ही राजस्थान में होने वाली हिंदी पत्रकारिता के 300 साल के इतिहास पर एक पुस्तक 'नित नए आयाम की खोज: राजस्थानी पत्रकारिता' की रचना की. इनकी कई कहानियां देश के विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशित हुई हैं.
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