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घासी वाद्ययंत्र की विरासत सहेज रहा कला दीक्षा केंद्र कोलेबिरा

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घासी वाद्ययंत्र की विरासत सहेज रहा कला दीक्षा केंद्र कोलेबिरा

कोलेबिरा. संगीत नाटक एकेडमी भारत सरकार द्वारा गुरु-शिष्य परंपरा के तहत पूरे देश में चल रहे प्रशिक्षण केंद्रों में से एक कला दीक्षा केंद्र कोलेबिरा प्रखंड में पिछले एक वर्ष से सक्रिय है. यहां पारंपरिक घासी बाजा के वाद्य यंत्रों के निर्माण और वादन का प्रशिक्षण दिया जा रहा है. एकेडमी से आये पदाधिकारियों ने एक वर्ष के दौरान किये गये कार्यों व सीखी गयी वादन कला की समीक्षा की. इसमें जोशी जी, पाठक जी और झारखंड से संगीत नाटक अकादमी नयी दिल्ली के सदस्य नंदलाल नायक समेत अन्य पदाधिकारियों ने प्रशिक्षण ले रहे बच्चों से घासी पारंपरिक वाद्य यंत्र के विभिन्न ताल और वाद्ययंत्र निर्माण की बारीकियों की जानकारी ली. प्रशिक्षणार्थियों ने वाद्ययंत्र निर्माण और वादन कला से पदाधिकारियों को प्रभावित किया. ज्ञात हो कि केंद्र में केवल 10 प्रशिक्षणार्थियों की सीट है. इसके अतिरिक्त लगभग 20 लड़के-लड़कियां भी प्रशिक्षण ले रहे हैं. इसको देखते हुए केंद्र को आगे बढ़ाने के लिए सहमति देने के लिए पदाधिकारियों ने आवश्यक दस्तावेज साथ ले गये. प्रशिक्षण के लिए सकरती नायक मुख्य गुरु और सामू नायक, फागू नायक व बिदे नायक सहायक गुरु के रूप में योगदान दे रहे हैं. सुरेश नायक व वीरेंद्र नायक जैसे वाद्ययंत्र निर्माण वादन विशेषज्ञ भी सहयोग कर रहे हैं. अगले समय के लिए शिक्षक लालधन नायक को सहायक गुरु सह समन्वयक बनाया गया है. अंतरराष्ट्रीय ख्याति प्राप्त लोक कलाकार पद्मश्री मुकुंद नायक के गृह प्रखंड में उनके मार्गदर्शन में चल रहा यह केंद्र घासी वाद्ययंत्र रूपी धरोहर के संरक्षण में अहम भूमिका निभायेगा.

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