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Home झारखण्ड सरायकेला-खरसावाँ सरायकेला में 13 साल से अधूरा संजय नदी पुल मामले में भड़का झारखंड हाईकोर्ट, 18 अगस्त तक अल्टीमेटम

सरायकेला में 13 साल से अधूरा संजय नदी पुल मामले में भड़का झारखंड हाईकोर्ट, 18 अगस्त तक अल्टीमेटम

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सरायकेला में 13 साल से अधूरा संजय नदी पुल मामले में भड़का झारखंड हाईकोर्ट, 18 अगस्त तक अल्टीमेटम
झारखंड हाईकोर्ट की तस्वीर

सरायकेला से प्रताप मिश्रा की रिपोर्ट

Jharkhand High Court, सरायकेला: सरायकेला-खरसावां मुख्य मार्ग पर स्थित संजय नदी पर बने एक महत्वपूर्ण पुल को लेकर झारखंड उच्च न्यायालय (High Court) ने बेहद सख्त और कड़ा रुख अख्तियार किया है. कोर्ट ने एप्रोच रोड पूरा न होने की वजह से पथ निर्माण विभाग के प्रधान सचिव को सीधे तौर जिम्मेदार ठहराते हुए कड़ी फटकार लगाई है. साथ ही निर्माण कार्य पूरा करने के लिए एक निश्चित डेड लाइन भी दे दिया है. दरअसल पूरा मामला ये है कि वर्ष 2013 में ही संजय नदी पर लगभग 120 मीटर लंबा आरसीसी (RCC) पुल बनकर पूरी तरह तैयार हो गया था. लेकिन प्रशासनिक उदासीनता और ठेकेदारों की लापरवाही का आलम यह है कि इतने साल बीत जाने के बाद भी इस पुल के एप्रोच रोड (सड़क को पुल से जोड़ने वाला रास्ता) का निर्माण पूरा नहीं किया जा सका. एप्रोच रोड के न होने की वजह से करोड़ों रुपये की भारी-भरकम सरकारी लागत से बना यह पुल पिछले 13 वर्षों से सफेद हाथी साबित हो रहा है. फिलहाल यह आम जनता के किसी काम नहीं आ सका है.

अधिवक्ता ओम प्रकाश की याचिका पर हाईकोर्ट में सुनवाई

इस गंभीर जनसमस्या और सरकारी धन की बर्बादी को लेकर सामाजिक संगठन ‘झारखंड लीगल एडवाइजरी एंड डेवलपमेंट ऑर्गेनाइजेशन’ के अध्यक्ष सह वरिष्ठ अधिवक्ता ओम प्रकाश ने झारखंड हाईकोर्ट में एक जनहित याचिका (WP-PIL No. 4292/2024) दायर की थी. इस याचिका के माध्यम से अदालत को बताया गया कि कैसे अफसरशाही की सुस्ती के कारण जनता को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है. वर्तमान में उच्च न्यायालय में याचिकाकर्ता की ओर से अधिवक्ता मनोज कुमार चौबे मजबूती से पैरवी कर रहे हैं.

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अदालत को दिए गए बार-बार झूठे आश्वासन

झारखंड हाईकोर्ट में सुनवाई के दौरान यह बात सामने आई कि अदालत ने पहले भी इस मामले को लेकर कड़े निर्देश दिए थे. बीते 7 अक्टूबर 2025 को कोर्ट ने पथ निर्माण विभाग (Road Construction Department), रोड डिवीजन सरायकेला-खरसावां के कार्यपालक अभियंता (Executive Engineer) को साफ आदेश दिया था कि 15 दिसंबर 2025 तक एप्रोच रोड का काम हर हाल में पूरा करें और इसकी प्रगति रिपोर्ट अदालत में दाखिल करें. जब विभाग इस तय समय सीमा के भीतर काम पूरा करने में नाकाम रहा, तो अधिकारियों ने कोर्ट से और समय (टाइम एक्सटेंशन) की गुहार लगाई. विभाग की ओर से लिखित आश्वासन दिया गया कि 28 फरवरी 2026 तक हर हाल में निर्माण कार्य पूरा कर लिया जाएगा. लेकिन अफ़सोस, अफसरों का यह दूसरा वादा भी पूरी तरह खोखला साबित हुआ और तय तारीख बीतने के बाद भी जमीन पर काम अधूरा ही रहा.

चीफ जस्टिस की खंडपीठ का कड़ा रुख

अधिकारियों द्वारा बार-बार डेडलाइन फेल किए जाने और आदेश की अवहेलना पर विगत 18 जून को मुख्य न्यायाधीश (Chief Justice) एम.एस. सोनक और न्यायमूर्ति राजेश शंकर की खंडपीठ ने गहरी नाराजगी और तीखा आक्रोश व्यक्त किया. अदालत ने इस लेट-लतीफी के लिए सीधे तौर पर पथ निर्माण विभाग के प्रधान सचिव को कड़े आदेश में कहा है कि प्रधान सचिव खुद एक सप्ताह के भीतर सरायकेला जाकर विवादित स्थल का भौतिक निरीक्षण (Site Inspection) करें. साथ ही आगामी 18 अगस्त 2026 तक एप्रोच रोड का निर्माण कार्य हर हाल में और किसी भी कीमत पर पूरा कराया जाए. इस पूरे मामले की उच्च स्तरीय और गंभीर जांच की जाए कि 13 साल तक काम क्यों लटका रहा और इसके लिए जिम्मेदार दोषी अधिकारियों को चिन्हित कर उनके खिलाफ सख्त अनुशासनात्मक कानूनी कार्रवाई की जाए. हाईकोर्ट ने इस मामले की मॉनिटरिंग जारी रखते हुए अगली सुनवाई के लिए 3 सितंबर 2026 की तिथि मुकर्रर की है, जहां विभाग को अपनी फाइनल एक्शन टेकन रिपोर्ट (ATR) सौंपनी होगी.

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