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सरायकेला के छऊ कलाकार रंजीत कुमार आचार्य को मिला सीनियर फेलोशिप

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सरायकेला के छऊ कलाकार रंजीत कुमार आचार्य को मिला सीनियर फेलोशिप
सरायकेला के छऊ के अंतरराष्ट्रीय कलाकार रंजीत कुमार आचार्य. फोटो: प्रभात खबर

सरायकेला से शचींद्र कुमार दाश और प्रताप मिश्रा की रिपोर्ट

Seraikela News: सरायकेला छऊ के अंतरराष्ट्रीय कलाकार एवं छऊ नृत्य विचित्रा संस्था के सह निदेशक रंजीत कुमार आचार्य का संस्कृति मंत्रालय, भारत सरकार की प्रतिष्ठित सीनियर फेलोशिप के लिए चयन किया गया है. वर्ष 2025-26 के लिए प्रदान की गयी इस फेलोशिप के तहत उन्हें दो साल तक हर महीने 20 हजार रुपये के हिसाब से लगभग पांच लाख रुपये की राशि प्रदान की जाएगी.

छऊ के शास्त्रीय पक्ष, संरक्षण और संवर्धन पर करेंगे शोध

आचार्य छऊ नृत्य विचित्रा संस्था ने बताया कि रणजीत आचार्य को उनके शोध विषय “सरायकेला छऊ की वर्तमान वास्तविक स्थिति का आकलन, शास्त्रीय तत्व और संवर्धन के लिए भविष्य की कार्यपथ का निरूपण” के लिए उनका चयन हुआ है. इस शोध के माध्यम से वह सरायकेला छऊ की मौजूदा स्थिति, उसके शास्त्रीय पक्ष और भविष्य में इसके संरक्षण एवं संवर्धन के उपायों पर विस्तृत अध्ययन करेंगे.

2008 में मिल चुकी है राष्ट्रीय जूनियर फेलोशिप

रंजीत कुमार आचार्य को इससे पहले वर्ष 2008 में संस्कृति मंत्रालय द्वारा राष्ट्रीय जूनियर फेलोशिप भी मिल चुका है. वह सरायकेला छऊ के एक प्रख्यात नर्तक, वाद्यकार, मुखौटा निर्माता और विशेषज्ञ के रूप में देश-विदेश में अपनी पहचान रखते हैं.

पिता गुरु लिंगराज आचार्य को किया समर्पित

रंजीत आचार्य ने इस उपलब्धि को अपने पिता स्वर्गीय गुरु लिंगराज आचार्य को समर्पित किया है. उन्होंने कहा कि अपने शोध कार्य को पद्मश्री गुरु शशधर आचार्य तथा छऊ के प्रबुद्ध कलाकारों और विद्वानों के मार्गदर्शन में आगे बढ़ाएंगे.

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राष्ट्रीय प्रशिक्षक के रूप में भी निभा रहे हैं दायित्व

रंजीत कुमार आचार्य वर्तमान में झारखंड सरकार के पंचायती राज विभाग में राष्ट्रीय प्रशिक्षक के रूप में कार्यरत हैं. इसके अलावा वे छऊ नृत्य विचित्रा संस्था के सह निदेशक सह कोषाध्यक्ष भी हैं. समय-समय पर वे छऊ नृत्य की विविध परंपराओं और उसके विभिन्न आयामों को राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय मंचों पर प्रस्तुत करते रहे हैं. रंजीत आचार्य को मिली इस उपलब्धि से सरायकेला छऊ जगत में खुशी की लहर है. कलाकारों और संस्कृति प्रेमियों ने इसे सरायकेला छऊ की समृद्ध परंपरा के लिए गौरवपूर्ण उपलब्धि बताया है.

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कुमार विश्वत सेन प्रभात खबर डिजिटल में डेप्यूटी चीफ कंटेंट राइटर हैं. इनके पास हिंदी पत्रकारिता का 25 साल से अधिक का अनुभव है. इन्होंने 21वीं सदी की शुरुआत से ही हिंदी पत्रकारिता में कदम रखा. दिल्ली विश्वविद्यालय से हिंदी पत्रकारिता का कोर्स करने के बाद दिल्ली के दैनिक हिंदुस्तान से रिपोर्टिंग की शुरुआत की. इसके बाद वे दिल्ली में लगातार 12 सालों तक रिपोर्टिंग की. इस दौरान उन्होंने दिल्ली से प्रकाशित दैनिक हिंदुस्तान दैनिक जागरण, देशबंधु जैसे प्रतिष्ठित अखबारों के साथ कई साप्ताहिक अखबारों के लिए भी रिपोर्टिंग की. 2013 में वे प्रभात खबर आए. तब से वे प्रिंट मीडिया के साथ फिलहाल पिछले 10 सालों से प्रभात खबर डिजिटल में अपनी सेवाएं दे रहे हैं. इन्होंने अपने करियर के शुरुआती दिनों में ही राजस्थान में होने वाली हिंदी पत्रकारिता के 300 साल के इतिहास पर एक पुस्तक 'नित नए आयाम की खोज: राजस्थानी पत्रकारिता' की रचना की. इनकी कई कहानियां देश के विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशित हुई हैं.
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