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Home झारखण्ड रांची रिम्स में महिलाओं की प्राइवेसी खतरे में, पुरुषों के साथ कॉमन टॉयलेट का करना पड़ रहा इस्तेमाल

रिम्स में महिलाओं की प्राइवेसी खतरे में, पुरुषों के साथ कॉमन टॉयलेट का करना पड़ रहा इस्तेमाल

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रिम्स में महिलाओं की प्राइवेसी खतरे में, पुरुषों के साथ कॉमन टॉयलेट का करना पड़ रहा इस्तेमाल
रांची स्थित रिम्स में इमरजेंसी के कॉमन टॉयलेट में पुरुष और दो महिलाएं.

रांची से प्रियंका सिंह की रिपोर्ट

Ranchi News: झारखंड के सबसे बड़े सरकारी अस्पताल राजेंद्र आयुर्विज्ञान संस्थान एवं मेडिकल कॉलेज (रिम्स) में मरीजों और उनके परिजनों को बुनियादी सुविधाओं के अभाव का सामना करना पड़ रहा है. अस्पताल की पुरानी बिल्डिंग में इमरजेंसी वार्ड के पास महिलाओं के लिए अलग शौचालय की व्यवस्था नहीं होने से उन्हें पुरुषों के साथ कॉमन टॉयलेट का इस्तेमाल करना पड़ रहा है. वहीं पीने के पानी के लिए लगाई गई मशीनों की हालत भी बदहाल है, जिसके कारण मरीजों और उनके परिजनों को काफी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है. करोड़ों रुपये के बजट वाले संस्थान में ऐसी व्यवस्था यह सवाल खड़ा करती है कि कागजों पर मौजूद सुविधाएं आखिर जमीन पर कब उतरेंगी.

महिलाओं की प्राइवेसी पर उठ रहे सवाल

रिम्स की पुरानी बिल्डिंग में इमरजेंसी के समीप महिला मरीजों और उनके परिजनों के लिए अलग से शौचालय की व्यवस्था नहीं की गई है. यहां महिला और पुरुष दोनों के लिए एक ही कॉमन टॉयलेट उपलब्ध है. ऐसे में दिन हो या रात, महिलाओं को उसी शौचालय का इस्तेमाल करना पड़ता है, जिसका उपयोग पुरुष भी करते हैं. अस्पताल में सुरक्षा और सुविधाओं को लेकर बड़े-बड़े दावे किए जाते हैं, लेकिन जमीनी हकीकत कुछ और ही तस्वीर पेश कर रही है. महिलाओं की निजता और सुरक्षा से जुड़े इस मुद्दे को लेकर मरीजों और उनके परिजनों में नाराजगी देखी जा रही है.

पीने के पानी की व्यवस्था भी बदहाल

रिम्स परिसर में मरीजों, उनके परिजनों और आने-जाने वाले लोगों की सुविधा के लिए कई स्थानों पर पेयजल मशीनें लगाई गई हैं. हालांकि, इन मशीनों के आसपास गंदगी का अंबार लगा हुआ है. कई मशीनों से निकलने वाले पानी की गुणवत्ता को लेकर भी लोग सवाल उठा रहे हैं. इलाज के लिए दूर-दराज से आने वाले गरीब परिवारों को मजबूरन बाहर से पैसे देकर बोतलबंद पानी खरीदना पड़ रहा है. जो लोग पानी की बोतल खरीदने में सक्षम नहीं हैं, उन्हें पीने के पानी के लिए इधर-उधर भटकना पड़ता है. अस्पताल में आने वाले लोगों का कहना है कि कागजों पर सब कुछ व्यवस्थित दिखता है, लेकिन धरातल पर सुविधाओं की स्थिति बेहद चिंताजनक है.

मरीजों और परिजनों को हो रही परेशानी

रिम्स राज्य का सबसे बड़ा सरकारी अस्पताल है, जहां प्रतिदिन हजारों मरीज इलाज के लिए पहुंचते हैं. ऐसे में स्वच्छ पेयजल और अलग शौचालय जैसी मूलभूत सुविधाओं का अभाव लोगों की परेशानी को और बढ़ा रहा है. अस्पताल में भर्ती मरीजों के परिजन घंटों तक परिसर में रहते हैं. ऐसे में स्वच्छ पानी और सुरक्षित शौचालय की उपलब्धता उनके लिए बेहद जरूरी है. लेकिन वर्तमान स्थिति में उन्हें कई तरह की असुविधाओं का सामना करना पड़ रहा है.

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रिम्स प्रशासन ने समस्या के समाधान का दिया आश्वासन

इस संबंध में रिम्स के प्रवक्ता एवं फिजियोलॉजी विभाग के सहायक प्रोफेसर डॉ शिशिर कुमार महतो ने कहा कि पेयजल व्यवस्था से जुड़ी समस्या की जानकारी उन्हें मिली है और इसके समाधान के लिए आवश्यक कदम उठाए जा रहे हैं. उन्होंने बताया कि इमरजेंसी के पास महिलाओं के लिए अलग शौचालय नहीं होने की जानकारी भी प्रशासन को मिली है. महिलाओं की सुविधा और प्राइवेसी को ध्यान में रखते हुए विशेष टॉयलेट की व्यवस्था की जा रही है. उन्होंने भरोसा दिलाया कि दोनों समस्याओं का जल्द समाधान किया जाएगा, ताकि मरीजों और उनके परिजनों को बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराई जा सकें.

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कुमार विश्वत सेन प्रभात खबर डिजिटल में डेप्यूटी चीफ कंटेंट राइटर हैं. इनके पास हिंदी पत्रकारिता का 25 साल से अधिक का अनुभव है. इन्होंने 21वीं सदी की शुरुआत से ही हिंदी पत्रकारिता में कदम रखा. दिल्ली विश्वविद्यालय से हिंदी पत्रकारिता का कोर्स करने के बाद दिल्ली के दैनिक हिंदुस्तान से रिपोर्टिंग की शुरुआत की. इसके बाद वे दिल्ली में लगातार 12 सालों तक रिपोर्टिंग की. इस दौरान उन्होंने दिल्ली से प्रकाशित दैनिक हिंदुस्तान दैनिक जागरण, देशबंधु जैसे प्रतिष्ठित अखबारों के साथ कई साप्ताहिक अखबारों के लिए भी रिपोर्टिंग की. 2013 में वे प्रभात खबर आए. तब से वे प्रिंट मीडिया के साथ फिलहाल पिछले 10 सालों से प्रभात खबर डिजिटल में अपनी सेवाएं दे रहे हैं. इन्होंने अपने करियर के शुरुआती दिनों में ही राजस्थान में होने वाली हिंदी पत्रकारिता के 300 साल के इतिहास पर एक पुस्तक 'नित नए आयाम की खोज: राजस्थानी पत्रकारिता' की रचना की. इनकी कई कहानियां देश के विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशित हुई हैं.
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