रांची से राणा प्रताप की रिपोर्ट
Jharkhand High Court, रांची : झारखंड हाईकोर्ट ने राज्य सरकार को बड़ा झटका देते हुए झारखंड प्रशासनिक सेवा (JAS) के अधिकारी राधेश्याम प्रसाद के पक्ष में एक बड़ा फैसला सुनाया है. जस्टिस दीपक रोशन की अदालत ने राधेश्याम प्रसाद की सीनियरिटी (वरीयता) घटाने के राज्य सरकार के आदेश को पूरी तरह खारिज (निरस्त) कर दिया है. हाईकोर्ट ने कानूनी स्थिति स्पष्ट करते हुए कहा कि यदि दो राज्यों के बीच आपसी सहमति से हुए कैडर ट्रांसफर के मूल आदेश में सीनियरिटी खोने की कोई शर्त नहीं थी, तो सरकार बाद में कोई नया नियम बनाकर उसे ‘बैक डेट’ (पिछली तिथि) से लागू नहीं कर सकती है.
2008 का नीतिगत फैसला 2006 के ट्रांसफर पर थोप रही थी सरकार
अदालत ने फैसला सुनाते हुए कहा कि जब वर्ष 2006 में प्रार्थी राधेश्याम प्रसाद का कैडर ट्रांसफर हुआ था, तब बिहार और झारखंड राज्यों के बीच ऐसी कोई शर्त या नीति नहीं थी कि ट्रांसफर लेने पर अफसर अपनी सीनियरिटी खो देंगे. झारखंड सरकार ने साल 2008 में यह नीतिगत निर्णय लिया था कि आपसी तबादले (Mutual Transfer) पर आने वाले कर्मचारियों को उनके बैच में सबसे नीचे रखा जाएगा. कोर्ट ने फटकार लगाते हुए कहा कि सरकार अपने 2008 के इस फैसले को 2006 के पुराने मामलों पर जबरन लागू नहीं कर सकती.
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केंद्र की अनुमति के बिना सेवा शर्तों में बदलाव गैर-कानूनी
जस्टिस दीपक रोशन की अदालत ने ‘बिहार पुनर्गठन अधिनियम-2000’ का हवाला देते हुए एक बेहद महत्वपूर्ण टिप्पणी की. कोर्ट ने कहा कि “बिहार पुनर्गठन अधिनियम-2000 की धारा 73 के तहत, केंद्र सरकार की पूर्व अनुमति के बिना किसी भी सरकारी कर्मचारी की सेवा शर्तों में ऐसा कोई भी बदलाव नहीं किया जा सकता, जो उसके लिए नुकसानदेह या दंडात्मक हो.” इसी आधार पर हाईकोर्ट ने झारखंड सरकार द्वारा जारी 23 सितंबर 2024 के आदेश और 16 दिसंबर 2024 को जारी अंतिम वरीयता सूची (जिसमें प्रार्थी को नीचे धकेला गया था) को तत्काल प्रभाव से निरस्त कर दिया. इसके साथ ही कोर्ट ने सरकार को निर्देश दिया कि राधेश्याम प्रसाद की मूल वरीयता (क्रमांक 835-बी) को उनके सभी परिणामी लाभों (Back dues and benefits) के साथ बहाल किया जाए.
क्या है पूरा मामला?
- कैडर का बंटवारा: बिहार पुनर्गठन अधिनियम-2000 के बाद प्रार्थी राधेश्याम प्रसाद और एक अन्य कर्मचारी मंजू प्रसाद ने आपसी सहमति (Mutual Consents) से बिहार से झारखंड और झारखंड से बिहार कैडर के लिए संयुक्त आवेदन दिया था.
- 2006 में ट्रांसफर: दोनों राज्यों की सहमति के बाद 21 जून 2006 को राधेश्याम प्रसाद को झारखंड कैडर मिला. मूल आदेश में सीनियरिटी गवाने की कोई शर्त नहीं थी.
- मिली थीं कई प्रोन्नति: झारखंड सरकार ने उन्हें सीनियरिटी लिस्ट में क्रमांक 835-बी पर रखा और इसी आधार पर उन्हें वर्ष 2011, 2016 और 2023 में संयुक्त सचिव (Joint Secretary) के पद पर प्रोन्नति (Promotion) भी दी.
- 2024 में घटाया रैंक: अचानक 23 सितंबर 2024 को झारखंड सरकार ने 2008 के एक नियम का हवाला देकर नया पत्र जारी किया और राधेश्याम प्रसाद का रैंक 835-बी से घटाकर 877-डी कर दिया था. इस तानाशाही आदेश के खिलाफ उन्होंने हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया था, जहां अब उन्हें पूर्ण न्याय मिला है.
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