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Home झारखण्ड रांची हजारीबाग ओपन जेल की सुविधाओं पर हाईकोर्ट सख्त, सरकार से 20 जुलाई तक मांगी स्टेटस रिपोर्ट

हजारीबाग ओपन जेल की सुविधाओं पर हाईकोर्ट सख्त, सरकार से 20 जुलाई तक मांगी स्टेटस रिपोर्ट

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हजारीबाग ओपन जेल की सुविधाओं पर हाईकोर्ट सख्त, सरकार से 20 जुलाई तक मांगी स्टेटस रिपोर्ट
कोर्ट हैमर. प्रतीकात्ममक फोटो

रांची से राणा प्रताप की रिपोर्ट

Jharkhand High Court: झारखंड हाईकोर्ट ने हजारीबाग स्थित ओपन जेल में उपलब्ध सुविधाओं, उसके प्रबंधन और मॉनिटरिंग व्यवस्था को लेकर दर्ज स्वत: संज्ञान (सुओ मोटू) जनहित याचिका पर गुरुवार को सुनवाई की. चीफ जस्टिस एमएस सौनक और न्यायमूर्ति राजेश शंकर की खंडपीठ ने राज्य सरकार को अब तक की गई कार्रवाई से संबंधित विस्तृत स्टेटस रिपोर्ट दाखिल करने का निर्देश दिया. अदालत ने सरकार को यह रिपोर्ट 20 जुलाई तक हर हाल में प्रस्तुत करने की हिदायत दी है. सुनवाई के दौरान अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि ओपन जेलों के संचालन और वहां उपलब्ध कराई जा रही सुविधाओं को लेकर सरकार की ओर से उठाए गए कदमों की जानकारी रिपोर्ट में विस्तार से दी जाए, ताकि न्यायालय आगे आवश्यक निर्देश जारी कर सके.

मुख्य सचिव को कमेटी गठन का दिया जा चुका है निर्देश

इस मामले की पिछली सुनवाई में हाईकोर्ट ने राज्य के मुख्य सचिव को 10 दिनों के भीतर तीन सदस्यीय उच्च स्तरीय समिति गठित करने का निर्देश दिया था. अदालत ने कहा था कि यह समिति राज्य में संचालित सभी ओपन जेलों की वर्तमान स्थिति, वहां की आधारभूत सुविधाओं, प्रशासनिक व्यवस्था और प्रबंधन प्रणाली की समीक्षा करेगी.

अदालत ने सरकार से मांगी विस्तृत रिपोर्ट

इसके साथ ही सरकार को निर्देश दिया गया था कि राज्य की सभी ओपन जेलों से संबंधित विस्तृत रिपोर्ट न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत की जाए. अदालत का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि इन जेलों का संचालन निर्धारित मानकों के अनुरूप हो और वहां रहने वाले बंदियों को आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध कराई जा रही हों.

सुप्रीम कोर्ट ने पहले ही राज्यों का दिया है निर्देश

दरअसल, देशभर की ओपन जेलों की व्यवस्था को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने सभी राज्यों को महत्वपूर्ण निर्देश जारी किए थे. शीर्ष अदालत ने प्रत्येक राज्य के गृह विभाग को ओपन जेलों की निगरानी के लिए एक उच्च स्तरीय समिति गठित करने का आदेश दिया था. इस समिति का दायित्व ओपन जेलों के संचालन की नियमित मॉनिटरिंग करना, वहां उपलब्ध सुविधाओं का आकलन करना और आवश्यक सुधार सुनिश्चित करना है.

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सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर स्वत: संज्ञान

सुप्रीम कोर्ट ने यह भी कहा था कि ओपन जेलों का उद्देश्य केवल सजा काट रहे कैदियों को रखने तक सीमित नहीं होना चाहिए, बल्कि उन्हें समाज की मुख्यधारा से जोड़ने, पुनर्वास के अवसर उपलब्ध कराने और जिम्मेदार नागरिक के रूप में विकसित करने की दिशा में भी प्रभावी प्रयास किए जाने चाहिए. इन्हीं निर्देशों के आलोक में झारखंड हाईकोर्ट ने इस विषय पर स्वत: संज्ञान लेते हुए जनहित याचिका दर्ज की है. अब राज्य सरकार को 20 जुलाई तक स्टेटस रिपोर्ट दाखिल करनी होगी, जिसके आधार पर अदालत यह तय करेगी कि ओपन जेलों की व्यवस्था को और प्रभावी एवं मानवीय बनाने के लिए आगे किन कदमों की आवश्यकता है.

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कुमार विश्वत सेन प्रभात खबर डिजिटल में डेप्यूटी चीफ कंटेंट राइटर हैं. इनके पास हिंदी पत्रकारिता का 25 साल से अधिक का अनुभव है. इन्होंने 21वीं सदी की शुरुआत से ही हिंदी पत्रकारिता में कदम रखा. दिल्ली विश्वविद्यालय से हिंदी पत्रकारिता का कोर्स करने के बाद दिल्ली के दैनिक हिंदुस्तान से रिपोर्टिंग की शुरुआत की. इसके बाद वे दिल्ली में लगातार 12 सालों तक रिपोर्टिंग की. इस दौरान उन्होंने दिल्ली से प्रकाशित दैनिक हिंदुस्तान दैनिक जागरण, देशबंधु जैसे प्रतिष्ठित अखबारों के साथ कई साप्ताहिक अखबारों के लिए भी रिपोर्टिंग की. 2013 में वे प्रभात खबर आए. तब से वे प्रिंट मीडिया के साथ फिलहाल पिछले 10 सालों से प्रभात खबर डिजिटल में अपनी सेवाएं दे रहे हैं. इन्होंने अपने करियर के शुरुआती दिनों में ही राजस्थान में होने वाली हिंदी पत्रकारिता के 300 साल के इतिहास पर एक पुस्तक 'नित नए आयाम की खोज: राजस्थानी पत्रकारिता' की रचना की. इनकी कई कहानियां देश के विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशित हुई हैं.
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