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विश्वास के लिए डर का होना जरूरी

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विश्वास के लिए डर का होना जरूरी
Birsa Munda

प्रतिनिधि, खलारी खलारी कैथोलिक चर्च में रविवार को पवित्र दृढ़ीकरण संस्कार का आयोजन किया गया. इसमें 17 बच्चों को पहला परम प्रसाद दिया गया, वहीं 55 लोगों का दृढ़ीकरण संस्कार कराया गया. संस्कार पानेवालों में अधिकतर बच्चे व किशोर थे. मुख्य अधिष्ठाता आर्च डायसिस रांची के आर्च बिशप विंसेंट आइंद की अगुवाई में सम्पूर्ण धर्मविधि पूरी की गयी. संस्कार के दौरान खलारी चर्च के फादर हिलारियुस तिग्गा, फादर आस्कर टोप्पो के अलावा फादर हुबूरतुस वेक व फादर जोन टोप्पो मौजूद थे. संस्कार के दौरान आर्च बिशप विंसेंट आइंद ने अभिलाषियों के लिए बाइबल से आशीष वचन पढ़कर सुनाया. उन्होंने कहा प्रत्येक इंसान में किसी न किसी चीज का डर होता है. बाइबिल की कथा सुनाई, जिसमें झील के तूफान से चेले डर गये थे. तब यीशु ने तूफान को शांत रहने को कहा और हवाएं रूक गयी. तब चेलों को विश्वास हुआ कि यीशु भगवान के पुत्र हैं, जिनकी आज्ञा आंधी व पानी भी मानते हैं. कहा कि विश्वास के लिए डर का होना जरूरी है. कहा कि कैथोलिक कलीसिया को अनेकों बार परेशानियों का सामना करना पड़ा है. परंतु चुनौतियों से डरना नहीं है. कहा कि हमें पवित्र आत्मा के सात वरदान विवेक, समझदारी, परामर्श, ज्ञान, धैर्यता, धार्मिकता व प्रभु का भय हमेशा याद रखना चाहिए. संस्कार के लिए आए बच्चे बारी-बारी से आर्च बिशप विंसेंट आइंद के सामने आये. जहां आर्च बिशप ने दृढ़ीकरण संस्कार के विधान को पूरा किया. संस्कार करनेवाले बच्चों ने ईश्वर का निवेदन किया व पाठ पढ़ा. उन्होंने ईश्वर का धन्यवाद देते हुए परम प्रसाद ग्रहण किया. आर्च बिशप ने कहा कि दृढ़ीकरण संस्कार से पवित्र आत्मा की प्राप्ति होती है. हम प्रभु के नजदीक पहुंच जाते हैं. दृढ़ीकरण संस्कार ग्रहण करने के बाद कलीसिया के प्रति हमारी जवाबदेही बढ़ जाती है. इससे पूर्व आराधना गीत सहित कई धार्मिक विधान किये गये. कार्यक्रम में सिस्टर नेली, सिस्टर जयंती, सिस्टर ओलिमा, सिस्टर हेलेन, प्रकाश कुजूर, रोबिन एक्का, ज्ञान कुजूर, इनोसेंट कुजूर, नरेश करमाली, प्रदीप कुजूर, पारस अमित खलखो, चार्ल्स पेंटोनी, गाजा रूंडा, बबलू किस्कू, ललित टोप्पो, पीटर तिग्गा, माइकल मेर्थस, तेरेसा तिग्गा, पूनम किस्कू, सुनीता तिग्गा, ज्योति कुजूर, नीरा खलखो, सुनीता तिग्गा, ग्रेस खलखो, अनुप मुंडा, अन्ना खलखो, अनुग्रह, रश्मि, रोजविजय रूंडा, अंकित सहित काफी संख्या में मसीही विश्वासी उपस्थित थे.

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