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किसान आंदोलन के प्रणेता थे स्वामी सहजानंद : डॉ मिथिलेश

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किसान आंदोलन के प्रणेता थे स्वामी सहजानंद : डॉ मिथिलेश

रामगढ़. बिजुलिया स्थित अशेश्वर सिंह ब्रह्मर्षि धर्मशाला में रविवार को स्वामी सहजानंद की जयंती मनायी गयी. कार्यक्रम की अध्यक्षता अध्यक्ष रवींद्र शर्मा ने की. कार्यक्रम के मुख्य अतिथि कांग्रेस पूर्व प्रदेश अध्यक्ष राजेश ठाकुर, विशिष्ट अतिथि राधा गोविंद विश्वविद्यालय के कुलाधिपति बीएन साह, मुख्य वक्ता डॉ मिथिलेश सिंह थे. मुख्य वक्ता डॉ मिथिलेश सिंह ने कहा कि यदि युवा पीढ़ी उनके विचारों को पढ़े और उन्हें जीवन में उतारे, तो सामाजिक चेतना के साथ लोकतंत्र की जड़ें और गहरी होंगी. वक्ताओं ने कहा कि स्वामी सहजानंद सरस्वती केवल धार्मिक चिंतक या विद्वान नहीं थे, बल्कि वह भारत में संगठित किसान आंदोलन के प्रणेता थे. उन्होंने किसानों को संगठित कर उनकी आवाज को राष्ट्रीय स्तर तक पहुंचाया. जमींदारी प्रथा के खिलाफ उन्होंने आंदोलन चलाया. इसके परिणामस्वरूप किसानों में अधिकार चेतना जागृत हुई. सामाजिक-राजनीतिक विमर्श में किसानों की भूमिका मजबूत हुई. मुख्य अतिथि राजेश ठाकुर ने कहा कि स्वामी सहजानंद ने किसानों के हित को राजनीति से ऊपर रखा. जीवन भर संघर्ष करते रहे. विशिष्ट अतिथि बीएन साह ने कहा कि स्वामी सहजानंद सरस्वती का विचार केवल आंदोलन तक सीमित नहीं था, बल्कि वह व्यवस्था परिवर्तन के समर्थक थे. स्वागत भाषण विकास सिंह व मंच संचालन सीपी संतन ने किया. धन्यवाद ज्ञापन कोषाध्यक्ष विभन सिंह ने किया. मौके पर दिवाकर सिंह, शशिभूषण सिंह, अनमोल सिंह, ओमप्रकाश सिंह, बीएन सिंह, मनोहर सिंह, जीएस राय, मनोज वृंदा सिंह, प्रदीप सिंह, राम सेवन शर्मा, गणेश तिवारी मौजूद थे.

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