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Home झारखण्ड पलामू भारत के संविधान पर हैं पलामू के यदु बाबू और गोपा बाबू के हस्ताक्षर, गांधी-नेताजी के थे करीबी

भारत के संविधान पर हैं पलामू के यदु बाबू और गोपा बाबू के हस्ताक्षर, गांधी-नेताजी के थे करीबी

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भारत के संविधान पर हैं पलामू के यदु बाबू और गोपा बाबू के हस्ताक्षर, गांधी-नेताजी के थे करीबी
यदुवंश सहाय और अमिय कुमार घोष.

Yadu Babu and Gopa Babu: गणतंत्र दिवस भारत के संविधान को अंगीकार किए जाने का दिन है. इस दिन हम उन महान नेताओं को भी याद करते हैं, जिन्होंने हमारे महान संविधान का निर्माण किया. संविधान लेखन में पलामू का विशेष योगदान रहा. पलामू के यदुवंश सहाय उर्फ यदु बाबू और अमियो कुमार घोष उर्फ गोपा बाबू संविधान सभा के सदस्य थे. दोनों ने अपनी जिम्मेदारियों का बखूबी निर्वहन किया और संविधान में कई प्रावधान जोड़ने में अपनी भूमिका निभाई. भारत के संविधान पर पलामू के इन दोनों के हस्ताक्षर हैं. यदु बाबू महात्मा गांधी के करीबी थे, तो गोपा बाबू नेताजी सुभाष चंद्र बोस के करीबी थे.

औरंगाबाद के सिरडीहा गांव में हुआ था यदुवंश सहाय का जन्म

यदुवंश सहाय का जन्म वर्ष 1901 में बिहार के मगध प्रमंडल के औरंगाबाद जिले के कुटुंबा प्रखंड के सिरडीहा गांव में हुआ था. उनकी प्रारंभिक पढ़ाई गांव में ही हुई थी. वह नजीर किशोर लाल के दूसरे पुत्र थे. उन्होंने पटना विश्वविद्यालय से अर्थशास्त्र में ऑनर्स की परीक्षा पास की थी. बाद में कानून की डिग्री भी ली. उन्होंने वर्ष 1926 तक गया जिले के तत्कालीन औरंगाबाद उपखंड में लोअर कोर्ट में प्रैक्टिस भी की.

महात्मा गांधी के करीब थे यदु बाबू

यदुवंश सहाय अपने घर-परिवार और मित्र मंडली में यदु बाबू के नाम से मशहूर थे. वे राष्ट्रपिता महात्मा गांधी के बहुत करीब थे. उनके संघर्ष की विशेषता यह थी कि वह अहिंसा को सबसे आगे रखते थे. असहयोग आंदोलन के दौरान यदुवंश सहाय स्वतंत्रता आंदोलन में कूदे थे. असहयोग आंदोलन के कुछ कार्यक्रमों में विदेशी वस्तुओं, मादक द्रव्यों, मदिरा आदि के बहिष्कार का जमकर प्रचार किया था.

स्वतंत्रता सेनानी यदुवंश सहाय ने कई बार की जेल की यात्रा

यदु बाबू ने हरिजन उत्थान के लिए हुए आंदोलन में बढ़-चढ़कर भाग लिया. वर्ष 1922 से ही कांग्रेस में यदुवंश सहाय सक्रिय रहे. वर्ष 1930, 1932, 1940 और 1942 में स्वतंत्रता आंदोलन में भाग लेने की वजह से जेल गए. अंतिम बार इस शर्त के साथ रिहा किये गये थे कि जब भी उन्हें डाल्टेनगंज शहर से बाहर जाना होगा, वह इसकी पूर्व सूचना पुलिस को देंगे.

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अंतरिम सरकार के लिए हुए चुनाव में डाल्टेनगंज से जीते

यदु बाबू ने संघर्ष को ही अपना साथी बना लिया था. वर्ष 1946 में अंतरिम सरकार के गठन के लिए जब चुनाव हुए, तो यदु बाबू डाल्टेनगंज से विधायक चुने गये. वर्ष 1946 में बनी संविधान सभा में उन्हें सदस्य बनाया गया. संविधान सभा के सभी सदस्यों के हस्ताक्षर आज भी सुरक्षित हैं, जिस पर लिखा है, यदुवंश सहाय, डाल्टेनगंज, पलामू, बिहार.

24 जनवरी 1950 को भारत के संविधान पर किये हस्ताक्षर

उन्होंने संविधान सभा के 284 सदस्यों के साथ पूर्ण रूप से तैयार भारत के संविधान पर 24 जनवरी 1950 को हस्ताक्षर किया था. यदु बाबू का आवास डाल्टेनगंज शहर में वर्तमान में एसबीआई के जेलहाता स्थित एडीबी शाखा के सामने स्थित है. इसी मकान में उनके 93 वर्षीय पुत्र मोहन बाबू परिजनों के साथ रहते हैं.

अमिय कुमार घोष उर्फ गोपा बाबू भी थे संविधान सभा के सदस्य

पलामू से संविधान सभा के दूसरे सदस्य अमिय कुमार घोष उर्फ गोपा बाबू थे. उनके परिजन अब पलामू में नहीं रहते, लेकिन उनकी यादें यहां की मिट्टी में रची-बसी हैं. पलामू और भारत के निर्माण के उनके योगदान को भुलाया नहीं जा सकेगा. गोपा बाबू नेताजी सुभाष चंद्र बोस के करीबी थे. नेताजी सुभाष चंद्र बोस जब पलामू आये थे, तो गोपा बाबू के मकान में ही विश्राम किया था.

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गोपा बाबू के आवास पर नेताजी सुभाष चंद्र बोस ने किया था विश्राम

मेदिनीनगर शहर के नावाहाता स्थित वर्तमान प्रकाश चंद्र जैन सेवा सदन ही गोपा बाबू का आवास हुआ करता था. वहीं नेताजी सुभाषचंद्र बोस ने विश्राम किया था. भारत की आजादी की लड़ाई को तेज करने के लिए पलामू के निवासियों को भी नेताजी ने प्रेरित किया था. आजादी के बाद वर्ष 1952 में हुए बिहार विधानसभा के पहले चुनाव में गोपा बाबू डाल्टेनगंज विधानसभा क्षेत्र से विधायक चुने गये थे. वे पलामू बार एसोसिएशन से जुड़े थे. वह बड़े वकील थे.

बहुत कम लोग यदु बाबू और गोपा बाबू को जानते हैं

देश के प्रथम राष्ट्रपति डॉ राजेंद्र प्रसाद के नेतृत्व वाली संविधान सभा की प्रारूप कमेटी के अध्यक्ष डॉ भीमराव आंबेडकर को पूरा देश संविधान निर्माण के लिए नमन करता है. दूसरी ओर डॉ राजेंद्र प्रसाद और डॉ भीमराव आंबेडकर के समकालीन और उनके साथ संविधान बनाने में अहम भूमिका निभाने वाले पलामू के महापुरुषों यदु बाबू और गोपा बाबू के बारे में देश के लोग बहुत कम जानते हैं.

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