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Home झारखण्ड पाकुड़ फूलो-झानो आशीर्वाद अभियान से महेशपुर की दुलाली मुर्मू को मिली नयी राह, सुअर पालन कर बनी आत्मनिर्भर

फूलो-झानो आशीर्वाद अभियान से महेशपुर की दुलाली मुर्मू को मिली नयी राह, सुअर पालन कर बनी आत्मनिर्भर

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फूलो-झानो आशीर्वाद अभियान से महेशपुर की दुलाली मुर्मू को मिली नयी राह, सुअर पालन कर बनी आत्मनिर्भर

चौराहे के किनारे बैठकर हंडिया बेचकर अपने परिवार का करती थी भरण-पोषण हौसले की उड़ान : दुलाली मुर्मू ने बदली अपनी जिंदगी की दिशा 13 मार्च फोटो कैप्शन – सूअर पालन करती दुलाली मुर्मू संवाददाता, पाकुड़. जिले के महेशपुर प्रखंड की रहने वाली दुलाली मुर्मू की कहानी संघर्ष, हौसले और आत्मनिर्भरता की एक प्रेरणादायक मिसाल है. मजबूरीवश कभी चौराहे के किनारे बैठकर हंडिया बेचकर अपने परिवार का भरण-पोषण करने वाली दुलाली मुर्मू की जिंदगी में आज उल्लेखनीय परिवर्तन आया है. परिवार बड़ा होने के कारण उनकी आर्थिक स्थिति कमजोर थी और घर चलाना काफी कठिन हो रहा था. ऐसे समय में झारखंड सरकार की महत्वाकांक्षी योजना फूलो-झानो आशीर्वाद अभियान उनके लिए एक नयी उम्मीद बनकर सामने आई. वर्ष 2025 में इस अभियान के तहत उन्हें 25,000 रुपये की आर्थिक सहायता प्राप्त हुई. दुलाली मुर्मू ने इस राशि का सही उपयोग करते हुए सुअर पालन की शुरुआत की. अपनी मेहनत और लगन के बल पर उन्होंने इस कार्य को सफल बनाया और अब तक लगभग 60,000 रुपये का मुनाफा अर्जित कर चुकीं हैं, जिससे उनके परिवार की आर्थिक स्थिति में काफी सुधार आया है. दुलाली ने अपनी आय और मजबूत करने के लिए शुरू की मशरूम उत्पादन दुलाली मुर्मू ने अपनी आय के स्रोतों को और मजबूत करने की दिशा में कदम बढ़ाया. झारखंड स्टेट लाइवलीहुड प्रमोशन सोसाइटी के आर्थिक सहयोग एवं द नज इंस्टीट्यूट के तकनीकी मार्गदर्शन से उन्होंने अपने घर में मशरूम उत्पादन की शुरुआत की. अब तक वे लगभग 14 किलोग्राम मशरूम का उत्पादन कर बाजार में बिक्री कर चुकी हैं, जिससे उनकी आय में और बढ़ोतरी हुई है. इसके अलावा उन्होंने अपनी अगली आजीविका के रूप में सब्जी की खेती को भी अपनाया है. इसके लिए जीएसएलपीएस के सहयोग एवं द नज इंस्टीट्यूट के तकनीकी मार्गदर्शन से उन्होंने नर्सरी तैयार की है, जिसमें लगभग 5000 पौधे लगाए हैं. दूसरी महिलाओं को सम्मानजनक आजीविका अपनाने के लिए कर रहीं हैं प्रेरित आज दुलाली मुर्मू केवल अपने परिवार की आर्थिक स्थिति को मजबूत करने तक ही सीमित नहीं हैं, बल्कि वे फूलो-झानो आशीर्वाद अभियान के तहत “नव जीवन सखी” के रूप में भी कार्य कर रही हैं. इस भूमिका में वे अन्य महिलाओं को सम्मानजनक आजीविका अपनाने और आत्मनिर्भर बनने के लिए प्रेरित कर रही हैं. दुलाली मुर्मू की यह कहानी इस बात का प्रमाण है कि यदि महिलाओं को सही अवसर, सहयोग और मार्गदर्शन मिले तो वे अपने जीवन में सकारात्मक बदलाव ला सकती हैं. आज पहले की तुलना में उनका परिवार बेहतर तरीके से चल रहा है और वे अपने बच्चों को अच्छी शिक्षा दिलाने के लिए निरंतर प्रयास कर रही हैं. दुलाली ने अपनी सफलता का श्रेय झारखंड सरकार की योजनाओं को दिया है दुलाली मुर्मू ने अपनी सफलता का श्रेय झारखंड सरकार की योजनाओं, जिला प्रशासन, जेएसएलपीएस व द नज इंस्टीट्यूट बैंगलुरु के सहयोग को देते हुए उनके प्रति आभार व्यक्त किया. उन्होंने कहा कि सरकार की इस पहल से उन्हें सम्मानजनक आजीविका का अवसर मिला, जिससे आज वे आत्मनिर्भर बन सकी हैं और अपने परिवार का बेहतर ढंग से पालन-पोषण कर पा रही हैं. उन्होंने अन्य महिलाओं से भी सरकारी योजनाओं से जुड़कर आत्मनिर्भर बनने और अपने जीवन में सकारात्मक परिवर्तन लाने की अपील की है.

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