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Home झारखण्ड लातेहार बेटों के साथ भी माहवारी पर करें चर्चा, झिझक मिटाना जरूरी : अल्का

बेटों के साथ भी माहवारी पर करें चर्चा, झिझक मिटाना जरूरी : अल्का

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बेटों के साथ भी माहवारी पर करें चर्चा, झिझक मिटाना जरूरी : अल्का

लातेहार ़ झारखंड महिला विकास समिति एवं यूनिसेफ की सहयोगी संस्था लीड्स के संयुक्त तत्वावधान में जिला स्तरीय माहवारी स्वच्छता प्रबंधन पर एक दिवसीय प्रशिक्षण कार्यशाला का आयोजन किया गया. इसका उद्घाटन जिला समाज कल्याण पदाधिकारी (डीएसडब्ल्यूओ) अल्का हेम्ब्रेम ने दीप प्रज्ज्वलित कर किया. मौके पर उन्होंने माहवारी से जुड़ी सामाजिक भ्रांतियों और चुप्पी को तोड़ने पर बल दिया. पुरुषों की भागीदारी और खान-पान पर जोर : डीएसडब्ल्यूओ ने कहा कि समाज में अक्सर माहवारी स्वच्छता पर चर्चा करने से परहेज किया जाता है, जिसे बदलने की जरूरत है. उन्होंने विशेष रूप से कहा कि इस विषय पर केवल महिलाओं को ही नहीं, बल्कि पुरुष वर्ग और बेटों के साथ भी खुलकर चर्चा होनी चाहिए. उन्होंने प्रतिभागियों को निर्देशित किया कि वे आंगनबाड़ी सेविकाओं को इस प्रकार प्रशिक्षित करें कि समाज के हर वर्ग तक सही जानकारी पहुंचे. उन्होंने एनीमिया से बचाव के लिए किशोरियों और महिलाओं के खान-पान पर विशेष ध्यान देने व सैनिटरी नैपकिन के उपयोग के लिए जागरूक करने का सुझाव दिया. बदल रहा है शारीरिक चक्र, जागरूकता अनिवार्य : कार्यशाला में चिकित्सा पदाधिकारी डॉ मारसा टोपनो ने तकनीकी पहलुओं पर जानकारी साझा की. उन्होंने बताया कि वर्तमान समय में बच्चियों में ””””मेनार्की”””” (माहवारी की शुरुआत) की उम्र कम हो रही है, जबकि ””””मेनोपॉज”””” की उम्र बढ़ रही है. ऐसे में बच्चियों को शुरुआती दौर से ही शारीरिक बदलावों के प्रति जागरूक करना अनिवार्य है. प्रशिक्षण के दौरान स्वच्छता, सुविधाओं की उपलब्धता और सैनिटरी पैड के सुरक्षित निपटान जैसे महत्वपूर्ण बिंदुओं पर विस्तार से चर्चा की गयी़. शंकाओं का हुआ समाधान : प्रशिक्षण में शामिल प्रतिभागियों ने माहवारी के दौरान होने वाली समस्याओं और उससे जुड़े मिथकों पर कई प्रश्न किये, जिनका विशेषज्ञों ने संतोषजनक समाधान किया. मौके पर जिले की सभी महिला पर्यवेक्षिकाएं, सीडीपीओ, लीड्स संस्था के प्रतिनिधि समेत कई विभाग के कर्मी मौजूद थे.

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