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जंगल केवल प्राकृतिक संपदा नहीं अमूल्य धरोहर हैं : डीसी

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जंगल केवल प्राकृतिक संपदा नहीं अमूल्य धरोहर हैं : डीसी

डोमचांच प्रखंड के सुदूरवर्ती वनपोक जंगल में वन रक्षाबंधन कार्यक्रम का आयोजन

प्रतिनिधि

कोडरमा. डोमचांच प्रखंड के सुदूरवर्ती वनपोक जंगल में वन विभाग के सौजन्य से वन रक्षाबंधन कार्यक्रम का आयोजन किया गया. कार्यक्रम में बतौर मुख्य अतिथि डीसी ऋतुराज, विशिष्ट अतिथि डीएफओ सौमित्र शुक्ला व डीडसी रवि जैन मौजूद थे. कार्यक्रम के दौरान जंगल के बीच निर्मित वेदी पर ग्रामीणों द्वारा विधि-विधान से पूजा-अर्चना की गयी तथा वनों की रक्षा का सामूहिक संकल्प लिया गया. डीसी, डीएफओ, डीडीसी के अलावा बीडीओ भोला पांडेय सहित अन्य पदाधिकारियों एवं ग्रामीणों ने पेड़ों पर रक्षा सूत्र बांधकर वन एवं पर्यावरण संरक्षण का संदेश दिया. ग्रामीणों को संबोधित करते हुए डीसी ऋतुराज ने कहा कि जंगल केवल प्राकृतिक संपदा ही नहीं, बल्कि आने वाली पीढ़ियों की अमूल्य धरोहर है, आप सभी के इस संकल्प से निश्चित रूप से वन सुरक्षित एवं संरक्षित रहेंगे. उन्होंने आह्वान किया कि प्रत्येक वर्ष रक्षाबंधन पर्व को प्रकृति संरक्षण के संकल्प दिवस के रूप में मनाते हुए पेड़-पौधों में रक्षा सूत्र बांधने की परंपरा विकसित की जाये तथा अधिक से अधिक पौधारोपण कर पर्यावरण संतुलन बनाये रखने में सक्रिय भागीदारी निभायी जाये. डीएफओ सौमित्र शुक्ला ने कहा कि वनों की कटाई रोकने और हरित आवरण बढ़ाने के लिए समाज में जंगलों के प्रति अपनत्व की भावना विकसित करना अत्यंत आवश्यक है. रक्षाबंधन जैसे जन-सहभागिता आधारित कार्यक्रम वनों की सुरक्षा को जनआंदोलन का रूप देने में सहायक सिद्ध होंगे. डीडीसी रवि जैन ने कहा कि पर्यावरण संरक्षण केवल सरकारी दायित्व नहीं, बल्कि प्रत्येक नागरिक की नैतिक जिम्मेदारी है. यदि समाज और प्रशासन मिलकर कार्य करें तो हरित कोडरमा का लक्ष्य अवश्य प्राप्त किया जा सकता है. कार्यक्रम में वन विभाग के पदाधिकारी एवं कर्मी तथा भारी संख्या में ग्रामीण मौजूद थे.

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