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ऑनलाइन परचेजिंग में झारखंड ने पकड़ी रफ्तार, जीईएम पोर्टल पर देश में 10वां स्थान

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ऑनलाइन परचेजिंग में झारखंड ने पकड़ी रफ्तार, जीईएम पोर्टल पर देश में 10वां स्थान
झारखंड में सरकारी ई-मार्केटप्लेस के जरिए परचेजिंग बढ़ी. एआई जेनरेटेड फोटो

Jharkhand GEM Portal: सरकारी ऑनलाइन परचेजिंग पोर्टल गवर्नमेंट ई-मार्केटप्लेस (जीईएम) के माध्यम से बिजनेस ट्रांजेक्शन के मामले में झारखंड ने देशभर में 10वां स्थान हासिल किया है. यह जानकारी जीईएम के चीफ एक्जिक्यूटिव ऑफिसर (सीईओ) मिहिर कुमार ने दी. उन्होंने बताया कि जीईएम की शुरुआत के बाद पिछले नौ सालों में झारखंड के बिजनेसमैन, एंटरपेन्योर और सरकारी विभागों ने इस पोर्टल के माध्यम से 45,000 करोड़ रुपये से अधिक का ट्रेड किया है.

झारखंड के सेलर्स को पूरे देश में मिली पहुंच

मिहिर कुमार ने कहा कि जीईएम के जरिये झारखंड के सेलर्स को अब देशभर के बड़े बाजारों तक सीधी पहुंच मिली है. इससे न केवल स्टेट के बिजनेस को एक्पेंशन मिला है, बल्कि ट्रांसपैरेंसी और कंपीटिशन भी बढ़ी है. उन्होंने उम्मीद जताई कि आने वाले सालों में यह डेटा और तेजी से बढ़ेगा. उन्होंने कहा, “झारखंड जीईएम पर ट्रांजेक्शन के मामले में देश में 10वें स्थान पर है, लेकिन इस रैंकिंग में और सुधार की काफी संभावनाएं हैं.”

‘जीईएम एक्सीलेंस’ सेशन में डिस्कशन

झारखंड में ट्रांसपैरेंसी, स्किल और टेक्नोलॉजी बेस्ड पब्लिक परचेजिंग को बढ़ावा देने के उद्देश्य से आयोजित ‘जीईएम एक्सीलेंस’ सेशन में यह जानकारी शेयर की गई. इस सेशन में स्टेट के बिजनेसमैन, एंटरपेन्योर और सरकारी विभागों के प्रतिनिधियों ने भाग लिया. प्रोग्राम के दौरान जीईएम पोर्टल से जुड़े सेलर्स और खरीदारों ने अपने एक्सपीरियंस, चैलेंज और सजेशन शेयर किए. मिहिर कुमार ने कहा कि इस तरह के सेशन्स का मकसद फीडबैक लेकर जीईएम प्लेटफॉर्म को और अधिक मजबूत, निष्पक्ष और यूजर फ्रेंडली बनाना है.

झारखंड से 40 हजार से अधिक सेलर्स रजिस्टर्ड

एक सीनियर अफसर ने बताया कि झारखंड से अब तक 40,000 से अधिक सेलर्स और करीब 4,600 खरीदार जीईएम पोर्टल पर रजिस्ट्रेशन करा चुके हैं. यह डेटा दर्शाता है कि स्टेट में सरकारी ई-शॉपिंग को लेकर जागरूकता तेजी से बढ़ी है. साल 2016 में जीईएम की शुरुआत के बाद से झारखंड सरकार ने पोर्टल के माध्यम से 1.5 लाख से अधिक ऑर्डर देकर करीब 7,900 करोड़ रुपये का परचेज किया है.

एमएसएमई को मिला बड़ा बेनिफिट

इन ऑर्डरों में से झारखंड के सेलर्स को 3,172 करोड़ रुपये के ऑर्डर मिले हैं, जिनमें 2,346 करोड़ रुपये का हिस्सा माइक्रो, स्मॉल और मिडियम एंटरप्राइजेज (एमएसएमई) को हासिल हुआ. मिहिर कुमार ने कहा कि जीईएम का सबसे बड़ा उद्देश्य एमएसएमई को मेनस्ट्रीम से जोड़ना है, ताकि छोटे कारोबारी भी सरकारी परचेज सिस्टम का बेनिफिट उठा सकें. उन्होंने कहा कि एमएसएमई के पार्टिसिपेशन बढ़ाने से न केवल जॉब के मौके पैदा होंगे, बल्कि स्टेट की इकोनॉमी को भी मजबूती मिलेगी.

2024 की शॉपिंग गाइडलाइन्स में जीईएम पर जोर

झारखंड के डिपार्टमेंट ऑफ कॉमर्स के कमिश्नर अमित कुमार ने कहा कि सरकारी आइटम्स और सर्विसेज की परचेजिंग के लिए जीईएम आज सबसे बेहतर और भरोसेमंद प्लेटफॉर्म बन चुका है. उन्होंने बताया कि 2024 में लागू झारखंड शॉपिंग गाइडलाइन्स में भी जीईएम से परचेज का स्पष्ट प्रोविजन किया गया है. इससे सभी विभागों को ट्रांसपैरेंसी और कंपीटिटिव प्रोसेस के तहत परचेज करने में फैसिलिटी मिल रही है.

17 लाख करोड़ से अधिक की परचेजिंग

मिहिर कुमार ने कहा कि मिनिस्ट्री ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्रीज के अधीन ऑपरेट होने वाला जीईएम पोर्टल ने अब तक सभी स्टेट्स और यूनियन टेरिटरी के साथ मेमोरेंडम ऑफ अंडरस्टैंडिंग (एमओयू) पर सिग्नेचर कर लिए हैं. उन्होंने बताया कि अब तक जीईएम के जरिये 17 लाख करोड़ रुपये से अधिक की शॉपिंग की जा चुकी है. आने वाले समय में इसे और अधिक स्किल्ड, ट्रांसपैरेंट और इनक्लूसिव बनाने के प्रयास लगातार जारी रहेंगे.

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झारखंड के लिए नए मौके

एक्सपर्ट्स का मानना है कि जीईएम के बढ़ते यूज से झारखंड के लोकल प्रोडक्ट्स, हैंडिक्रॉफ्ट, इंडस्ट्रियल आइटम्स और सर्विसेज को पैन इंडिया में पहचान मिलेगी. इससे स्टेट के यूथ और एंटरपेन्योर्स के लिए नए मार्केट खुलेंगे और डिजिटल गवर्नेंस की दिशा में झारखंड की स्थिति और मजबूत होगी.

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कुमार विश्वत सेन प्रभात खबर डिजिटल में डेप्यूटी चीफ कंटेंट राइटर हैं. इनके पास हिंदी पत्रकारिता का 25 साल से अधिक का अनुभव है. इन्होंने 21वीं सदी की शुरुआत से ही हिंदी पत्रकारिता में कदम रखा. दिल्ली विश्वविद्यालय से हिंदी पत्रकारिता का कोर्स करने के बाद दिल्ली के दैनिक हिंदुस्तान से रिपोर्टिंग की शुरुआत की. इसके बाद वे दिल्ली में लगातार 12 सालों तक रिपोर्टिंग की. इस दौरान उन्होंने दिल्ली से प्रकाशित दैनिक हिंदुस्तान दैनिक जागरण, देशबंधु जैसे प्रतिष्ठित अखबारों के साथ कई साप्ताहिक अखबारों के लिए भी रिपोर्टिंग की. 2013 में वे प्रभात खबर आए. तब से वे प्रिंट मीडिया के साथ फिलहाल पिछले 10 सालों से प्रभात खबर डिजिटल में अपनी सेवाएं दे रहे हैं. इन्होंने अपने करियर के शुरुआती दिनों में ही राजस्थान में होने वाली हिंदी पत्रकारिता के 300 साल के इतिहास पर एक पुस्तक 'नित नए आयाम की खोज: राजस्थानी पत्रकारिता' की रचना की. इनकी कई कहानियां देश के विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशित हुई हैं.
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