[tdb_header_weather inline="yes" temp_color="#000000" loc_color="#000000" api="653566bd56b7ecfee45d74c0fc937fc1" float_right="yes" align_horiz="content-horiz-center" icon_size="24" icon_space="10" f_temp_font_family="420" f_temp_font_size="14" f_temp_font_weight="500" f_unit_font_size="14" f_loc_font_size="14" f_unit_font_family="882" location="Ranchi" icon_color="#000000"]
[tdb_header_categories align_horiz="content-horiz-left" el_align_horiz="content-horiz-left" tdc_css="eyJhbGwiOnsibWFyZ2luLXJpZ2h0IjoiNSIsImhlaWdodCI6IjQwIiwiZGlzcGxheSI6IiJ9fQ==" icon_size="18" limit="18" elem_text_color="#2d2800" f_elem_font_family="420" f_elem_font_size="16px" f_elem_font_weight="500" tdicon="tdc-font-fa tdc-font-fa-navicon-reorder-bars" inline="yes" shadow_shadow_size="0" shadow_shadow_offset_vertical="0" shadow_shadow_spread="0" bg_color="#f9f9f9" include="1028, 1081, 1446, 1228, 3706, 2624,1071"][tdb_mobile_horiz_menu inline="yes" menu_id="372" tdc_css="eyJwaG9uZSI6eyJkaXNwbGF5IjoiIn0sInBob25lX21heF93aWR0aCI6NzY3LCJhbGwiOnsiYm9yZGVyLXN0eWxlIjoibm9uZSIsImRpc3BsYXkiOiIifX0=" f_elem_font_size="18px" f_elem_font_weight="eyJhbGwiOiI3MDAiLCJwaG9uZSI6IiJ9" f_elem_font_family="420" text_color_h="#f58220" main_sub_icon_size="13"]
Home झारखण्ड जमशेदपुर 72 घंटे की बंदी और आर्थिक नाकेबंदी करके आजसू ने किया था शक्ति प्रदर्शन, सरकार की नाक में कर दिया था दम

72 घंटे की बंदी और आर्थिक नाकेबंदी करके आजसू ने किया था शक्ति प्रदर्शन, सरकार की नाक में कर दिया था दम

0
72 घंटे की बंदी और आर्थिक नाकेबंदी करके आजसू ने किया था शक्ति प्रदर्शन, सरकार की नाक में कर दिया था दम
आजसू के स्थापना दिवस पर विशेष.

AJSU Foundation Day| जमशेदपुर, संजीव भारद्वाज : ऑल झारखंड स्टूडेंट्स यूनियन (आजसू) की स्थापना 1986 में जमशेदपुर में हुआ था. इसने अलग झारखंड राज्य के आंदोलन को एक नयी दिशा दी. 1989 में आजसू के 72 घंटे का झारखंड बंद और आर्थिक नाकेबंदी आज भी लोगों के जेहन में है. इस ऐतिहासिक आंदोलन को अलग झारखंड राज्य की लड़ाई में एक निर्णायक मोड़ माना जाता है. आजसू का उद्गम स्थल जमशेदपुर था, इसलिए स्वाभाविक रूप से आजसू के अलग झारखंड आंदोलन का केंद्र यहीं था.

जमशेदपुर में फूंका था अलग झारखंड के संघर्ष का बिगुल

जमशेदपुर में ही आजसू के अगुवा नेताओं ने आंदोलन की रणनीतियां बनायीं और यहीं से संघर्ष का बिगुल फूंका. इसकी गूंज पूरे झारखंड में सुनी गयी. हर तरफ आंदोलन की आग फैल गयी. जमशेदपुर ने झारखंड राज्य के सपने को साकार करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभायी. इस संगठन का उद्देश्य झारखंड को अलग राज्य का दर्जा दिलाना था, जो बिहार से अलग होकर एक स्वतंत्र रूप से अपनी पहचान बना सके.

आजसू के गठन ने झारखंड आंदोलन को दी नयी ऊर्जा

आजसू के गठन के साथ ही झारखंड आंदोलन को एक नयी ऊर्जा और दिशा मिली. छात्रों और युवाओं ने इस आंदोलन में बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया, जिससे इसे व्यापक जनाधार मिला. आजसू ने अपने शुरुआती दिनों से ही आक्रामक और रणनीतिक तरीके से आंदोलन को आगे बढ़ाया. इसके नेताओं ने न केवल सभाएं और रैलियां आयोजित कीं, बल्कि आम जनता को भी इस आंदोलन से जोड़ा.

झारखंड की ताजा खबरें पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें

आजसू के आह्वान पर होने लगे बंद-प्रदर्शन

उनकी दूरदर्शिता और नेतृत्व क्षमता ने आंदोलन को एक जन-आंदोलन में तब्दील कर दिया. आजसू के आह्वान पर होने वाले बंद और प्रदर्शन झारखंड की सड़कों पर आम बात हो थी. इसने तत्कालीन सरकारों पर दबाव बनाने का काम किया.

Ajsu Foundation Day Special News
72 घंटे की बंदी और आर्थिक नाकेबंदी करके आजसू ने किया था शक्ति प्रदर्शन, सरकार की नाक में कर दिया था दम 3

आर्थिक नाकेबंदी ने देश का ध्यान अपनी ओर खींचा

आजसू के इतिहास में वर्ष 1989 का 72 घंटे का झारखंड बंद और आर्थिक नाकेबंदी मील का पत्थर साबित हुए. इस अभूतपूर्व आंदोलन ने पूरे देश का ध्यान झारखंड की तरफ खींचा. 72 घंटे के बंद के दौरान, झारखंड के सभी प्रमुख शहरों और कस्बों में जनजीवन पूरी तरह ठप हो गया था. सड़कों पर वाहनों की आवाजाही बंद थी, दुकानें बंद थीं और सरकारी कार्यालयों में सन्नाटा पसरा था.

आर्थिक नाकेबंदी ने सरकार को हिलाकर रख दिया

आंदोलन का उद्देश्य झारखंड से बाहर जाने वाले खनिज संसाधनों और अन्य उत्पादों के प्रवाह को रोकना था. इस नाकेबंदी ने सरकार को हिलाकर रख दिया, क्योंकि इससे राज्य और केंद्र दोनों को भारी आर्थिक नुकसान हो रहा था. यह आंदोलन इतना प्रभावी था कि इसे अलग झारखंड राज्य की लड़ाई में एक निर्णायक लड़ाई के रूप में याद किया जाता है. इसने सरकार को झारखंड राज्य के गठन की दिशा में सोचने पर मजबूर कर दिया.

एक नजर : आजसू संगठन पर

  • शहीद निर्मल कुमार महतो, आजसू के संरक्षक थे.
  • सूर्यसिंह बेसरा, आजसू के संस्थापक
  • प्रभाकर तिर्की, आजसू के संस्थापक अध्यक्ष थे
  • हरिशंकर महतो, संस्थापक सदस्य, आजसू
  • स्व बबलू मुर्मू, पूर्व महासचिव, संस्थापक सदस्य, आजसू
  • कुंती बेसरा, संस्थापक सदस्य, आजसू
  • स्व. सुसेन महतो, संस्थापक अध्यक्ष, सिंहभूम जिला
  • गोपाल बनर्जी, संस्थापक महासचिव, आजसू सिंहभूम जिला
  • सुरेश चंद्र मुर्मू, संस्थापक सदस्य, आजसू घाटशिला
  • आस्तिक महतो, आजसू के संस्थापक सदस्य जमशेदपुर

आजसू के सलाहकार (थिंक टैंक )

  • स्व पद्मश्री डॉ राम दयाल मुंडा, पूर्व कुलपति, रांची विश्वविद्यालय
  • स्व बीपी केशरी, पूर्व चेयरमैन, जनजातीय एवं क्षेत्रीय भाषा
  • स्व पशुपति प्रसाद महतो, पूर्व डायरेक्टर , एंथ्रोपोलोजी सर्वे ऑफ इंडिया
  • स्व निर्मल मिंज, पूर्व प्राचार्य, गोसनर कॉलेज रांची
  • डॉ संजय बसु मलिक
  • अधिवक्ता रश्मि कात्यान समेत अन्य

कोल्हान प्रमंडल (पूर्वी सिंहभूम, पश्चिमी सिंहभूम और सरायकेला) के लीडर

  • प्रो श्याम चरण मुर्मू
  • कान्हू सामंत
  • फारुख आजम
  • प्रो नजम अंसारी
  • मंगल सिंह बोबोंगा, पूर्व विधायक
  • दीपक बिरूआ, मंत्री झारखंड सरकार
  • नरेश कुमार मुर्मू
  • सागेन हांसदा
  • बुधराम सोय
  • रवींद्रनाथ मुर्मू
  • बीरसिंह सुरेन
  • दामु बानरा
  • ज्योत्सना तिर्की
  • शकुंतला कंडुलना
  • पंकज मंडल
  • शहीद सुनील कुमार महतो, पूर्व सांसद समेत अन्य

ओडिशा के मयूरभंज से

  • खेलाराम माहली, पूर्व विधायक, आजसू
  • सुदाम मरांडी, पूर्व विधायक
  • सायबा सुशील कुमार हांसदा, पूर्व विधायक
  • रामचंद्र हांसदा, पूर्व सांसद
  • श्याम चरण हांसदा, पूर्व विधायक
  • नवचरण माझी, वर्तमान सांसद
  • बिडार माझी, आजसू नेतृत्वकर्ता
  • शिवाजी मलिक, आजसू नेतृत्वकर्ता
  • हरे कृष्णा मंडल, आजसू फाइटर

पश्चिम बंगाल से

  • बादल महतो
  • प्रीति महतो
  • लुसा मुर्मू
  • रीना राणा
  • मानस सरकार समेत अन्य

इसे भी पढ़ें

Previous article डॉक्टर क्लब ने सलेमगढ़ में लगाया मेडिकल कैंप, 398 मरीजों का हुआ नि:शुल्क इलाज
Next article बिहार के इस जिले में सड़कों की हालत होगी टनाटन… अरबों रुपये होंगे खर्च, जानिए कब तक पूरा होगा काम
Avatar Of Mithilesh Jha
मिथिलेश झा PrabhatKhabar.com में पश्चिम बंगाल राज्य प्रमुख (State Head) के रूप में कार्यरत वरिष्ठ पत्रकार हैं. उन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में 30 वर्षों से अधिक का व्यापक अनुभव है. उनकी रिपोर्टिंग राजनीति, सामाजिक मुद्दों, जलवायु परिवर्तन, नवीकरणीय ऊर्जा, कृषि और अन्य समसामयिक विषयों पर केंद्रित रही है, जिससे वे क्षेत्रीय पत्रकारिता में एक विश्वसनीय और प्रामाणिक पत्रकार के रूप में स्थापित हुए हैं. अनुभव : पश्चिम बंगाल, झारखंड और बिहार में 3 दशक से अधिक काम करने का अनुभव है. वर्तमान भूमिका : प्रभात खबर डिजिटल (prabhatkhabar.com) में पश्चिम बंगाल के स्टेट हेड की भूमिका में हैं. वे डिजिटल न्यूज कवर करते हैं. तथ्यात्मक और जनहित से जुड़ी पत्रकारिता को प्राथमिकता देते हैं. वर्तमान में बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 पर पूरी तरह से फोकस्ड हैं. भौगोलिक विशेषज्ञता : उनकी रिपोर्टिंग का मुख्य फोकस पश्चिम बंगाल रहा है, साथ ही उन्होंने झारखंड और छत्तीसगढ़ की भी लंबे समय तक ग्राउंड-लेवल रिपोर्टिंग की है, जो उनकी क्षेत्रीय समझ और अनुभव को दर्शाता है. मुख्य विशेषज्ञता (Core Beats) : उनकी पत्रकारिता निम्नलिखित महत्वपूर्ण और संवेदनशील क्षेत्रों में गहरी विशेषज्ञता को दर्शाती है :- राज्य राजनीति और शासन : झारखंड और पश्चिम बंगाल की राज्य की राजनीति, सरकारी नीतियों, प्रशासनिक निर्णयों और राजनीतिक घटनाक्रमों पर निरंतर और विश्लेषणात्मक कवरेज. सामाजिक मुद्दे : आम जनता से जुड़े सामाजिक मुद्दों, जनकल्याण और जमीनी समस्याओं पर केंद्रित रिपोर्टिंग. जलवायु परिवर्तन और नवीकरणीय ऊर्जा : पर्यावरणीय चुनौतियों, जलवायु परिवर्तन के प्रभाव और रिन्यूएबल एनर्जी पहलों पर डेटा आधारित और फील्ड रिपोर्टिंग. डाटा स्टोरीज और ग्राउंड रिपोर्टिंग : डेटा आधारित खबरें और जमीनी रिपोर्टिंग उनकी पत्रकारिता की पहचान रही है. विश्वसनीयता का आधार (Credibility Signal) : तीन दशकों से अधिक की निरंतर रिपोर्टिंग, विशेष और दीर्घकालिक कवरेज का अनुभव तथा तथ्यपरक पत्रकारिता के प्रति प्रतिबद्धता ने मिथिलेश झा को पश्चिम बंगाल और पूर्वी भारत के लिए एक भरोसेमंद और प्रामाणिक पत्रकार के रूप में स्थापित किया है.
ऐप पर पढें
होम आप का शहर
News Snap News Reel