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Home झारखण्ड गुमला एमडीएम में बच्चों को न अंडा मिलता है और न साग-सब्जी

एमडीएम में बच्चों को न अंडा मिलता है और न साग-सब्जी

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एमडीएम में बच्चों को न अंडा मिलता है और न साग-सब्जी

रायडीह. रायडीह प्रखंड अंतर्गत राजकीयकृत उत्क्रमित मवि लुंगा कसाईटोली की स्थिति इन दिनों अत्यंत चिंताजनक बनी हुई है. विद्यालय में कक्षा एक से सात तक कुल 59 छात्र-छात्राएं नामांकित हैं, लेकिन उन्हें मिलने वाली बुनियादी सुविधाओं का घोर अभाव है. विद्यालय में बच्चों, विशेषकर बालिकाओं के लिए शौचालय की कोई समुचित व्यवस्था नहीं है. एक पुराना शौचालय मौजूद है, लेकिन उस पर शिक्षकों का कब्जा बताया जा रहा है. मजबूरन विद्यालय की छात्राओं को खुले खेतों में शौच जाना पड़ता है. छात्राओं ने बताया कि यदि शीघ्र इस समस्या का समाधान नहीं हुआ, तो वे विद्यालय छोड़ने को विवश हो जायेंगी. विद्यालय के प्रधानाध्यापक गणपत कुमार पर घोर लापरवाही के आरोप लग रहे हैं, जिसका सीधा खामियाजा मासूम बच्चों को भुगतना पड़ रहा है. शिक्षा विभाग के दिशा-निर्देशों की खुलेआम अनदेखी किये जाने का आरोप भी लगाया जा रहा है. विद्यालय में संचालित मध्याह्न भोजन योजना भी सवालों के घेरे में है. बच्चों ने बताया कि पिछले दो महीनों से भोजन में न तो अंडा दिया जा रहा है और न ही हरी साग-सब्जी. इससे बच्चों के पोषण पर गंभीर असर पड़ रहा है. उल्लेखनीय है कि यह योजना बच्चों को विद्यालय से जोड़ने और पोषण उपलब्ध कराने के उद्देश्य से संचालित की जाती है. इस संबंध में बीआरसी रायडीह से संपर्क करने पर बताया गया कि संबंधित विद्यालय को मध्याह्न भोजन हेतु सभी राशि पूर्व में ही उपलब्ध करा दी गयी है, जिसमें अंडा मद भी शामिल है. इसके बावजूद शिक्षक की लापरवाही के कारण योजना में अनियमितता बरती जा रही है. इसके अतिरिक्त विद्यालय में बच्चों के बैठने के लिए बेंच-डेस्क की कोई व्यवस्था नहीं है, जिससे छोटे-छोटे बच्चे जमीन पर बैठ कर पढ़ने को मजबूर हैं. इससे उनके स्वास्थ्य पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ने की आशंका जतायी जा रही है. विद्यालय की इस दयनीय स्थिति को लेकर ग्रामीणों व अभिभावकों में आक्रोश है. उन्होंने शिक्षा विभाग व जिला प्रशासन से अविलंब जांच कर दोषियों पर कार्रवाई करने की मांग की है. ग्रामीणों का कहना है कि यदि शीघ्र सुधार नहीं किया गया, तो बच्चों का भविष्य अंधकारमय हो जायेगा, विशेषकर बालिकाओं की शिक्षा पर सीधा खतरा मंडराने लगा है.

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