[tdb_header_weather inline="yes" temp_color="#000000" loc_color="#000000" api="653566bd56b7ecfee45d74c0fc937fc1" float_right="yes" align_horiz="content-horiz-center" icon_size="24" icon_space="10" f_temp_font_family="420" f_temp_font_size="14" f_temp_font_weight="500" f_unit_font_size="14" f_loc_font_size="14" f_unit_font_family="882" location="Ranchi" icon_color="#000000"]
[tdb_header_categories align_horiz="content-horiz-left" el_align_horiz="content-horiz-left" tdc_css="eyJhbGwiOnsibWFyZ2luLXJpZ2h0IjoiNSIsImhlaWdodCI6IjQwIiwiZGlzcGxheSI6IiJ9fQ==" icon_size="18" limit="18" elem_text_color="#2d2800" f_elem_font_family="420" f_elem_font_size="16px" f_elem_font_weight="500" tdicon="tdc-font-fa tdc-font-fa-navicon-reorder-bars" inline="yes" shadow_shadow_size="0" shadow_shadow_offset_vertical="0" shadow_shadow_spread="0" bg_color="#f9f9f9" include="1028, 1081, 1446, 1228, 3706, 2624,1071"][tdb_mobile_horiz_menu inline="yes" menu_id="372" tdc_css="eyJwaG9uZSI6eyJkaXNwbGF5IjoiIn0sInBob25lX21heF93aWR0aCI6NzY3LCJhbGwiOnsiYm9yZGVyLXN0eWxlIjoibm9uZSIsImRpc3BsYXkiOiIifX0=" f_elem_font_size="18px" f_elem_font_weight="eyJhbGwiOiI3MDAiLCJwaG9uZSI6IiJ9" f_elem_font_family="420" text_color_h="#f58220" main_sub_icon_size="13"]
Home झारखण्ड गोड्डा महाराष्ट्र के वर्धा से आये प्रशिक्षकों ने मधुमक्खी पालन व छत्तों को उतारने की दी ट्रेनिंग

महाराष्ट्र के वर्धा से आये प्रशिक्षकों ने मधुमक्खी पालन व छत्तों को उतारने की दी ट्रेनिंग

0
महाराष्ट्र के वर्धा से आये प्रशिक्षकों ने मधुमक्खी पालन व छत्तों को उतारने की दी ट्रेनिंग

गोड्डा वन प्रमंडल में गुरुवार को महाराष्ट्र के वर्धा जिले से आये प्रशिक्षकों ने मधुमक्खी पालन व छत्तों को उतारने की ट्रेनिंग दी. प्रशिक्षकों ने वन कर्मियों को प्रशिक्षित भी किया. ट्रेनिंग प्रोग्राम तीन दिनों तक किया जाना है. कार्यक्रम वन प्रमंडल कार्यालय के सभागार में आयोजित हुआ. इस दौरान गोड्डा महागामा सुंदरपहाड़ी वन प्रक्षेत्र के ग्रामीणों ने भाग लिया. ट्रेनर के रूप में महाराष्ट्र के वर्धा संस्था के कार्यकर्ता पहुंचे थे. बताया गया कि मधुमक्खी पालन कर जीविकोपार्जन किया जा सकता है. इस दौरान मधुमक्खी के अलग-अलग प्रजातियों के बारे में बताया गया. साथ ही इसकी पहचान की जाये, यह ग्रामीणों को समझाया गया. बताया कि मधुमक्खियों की प्रमुख चार प्रजातियां हैं. पहाड़ी या सारंग मधुमक्खी से औसतन 30-35 किलोग्राम शहद मिल सकता है. छोटी या मूंगा मधुमक्खी के एक वंश से वर्ष भर में शहद पैदा करने की क्षमता एक या डेढ़ किलोग्राम ही है. भारतीय मधुमक्खी से लगभग 7-10 किलोग्राम शहद प्रति वर्ष प्राप्त किया जा सकता है. इसके साथ ही मधुमक्खी से बचाव के तरीके भी बताये गये. वहीं जब मधुमक्खी से शहद निकालने के लिए जाये, तो कैसे मधुमक्खी को रेस्क्यू कर सही जगह ले जाये, इसकी भी जानकारी प्रशिक्षुओं को दी गयी. मधुमक्खी फिर से अपना आशियाना बना सके और उन्हें कोई नुकसान न हो. इस दौरान कर्मियों ने सिकटिया पॉलिटेकनिक में लगे मधुमक्खी के छत्ते को ड्रेस आदि से लैस होकर उतारा. इस प्रशिक्षण में गोड्डा वन प्रमंडल अधिकारी मौन प्रकाश, वर्धा संस्था से आये प्रशिक्षक, फॉरेस्टर सुमन गुप्ता, राजीव मोदी, अमित कुमार, मनीष कुमार के साथ कई वन कर्मी शामिल हुए.

डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है

ऐप पर पढें
होम आप का शहर
News Snap News Reel