Giridh nesws :जूट, हैंडलूम व प्लास्टिक अपसाइक्लिंग यूनिट के स्थापना की कवायद तेज

Giridh nesws :जिला योजना शाखा के माध्यम से जल्द ही गांडेय में जूट, हैंडलूम यूनिट व प्लास्टिक अपसाइक्लिंग यूनिट की स्थापना की जायेगी. विभागीय स्तर पर इसकी तैयारियां शुरू कर दी गयी है.

By PRADEEP KUMAR | June 12, 2026 11:25 PM

यूनिट की स्थापना गेस्ट हाउस में करने की तैयारी चल रही है. इसे लेकर भवन के आसपास साफ-सफाई की जा रही है. शुक्रवार को उक्त यूनिट की मैनेजर पूजा कुमारी, जेएसएलपीएस के बीपीएम संदीप मिंज, बीपीओ सुनील वैराग्य, नाजिर अनिल बेसरा, कंप्यूटर ऑपरेटर अभिषेक सिन्हा समेत ने भवन की स्थिति का जायजा लिया. संभावना है कि आगामी 15 जून को गांडेय की विधायक कल्पना सोरेन यूनिट का शुभारंभ करेंगी. बताया गया कि यूनिट में जेएसएलपीएस की महिला समूह की महिलाएं कार्य करेंगी. पहले यूनिट में पांच महिलाओं को कार्य में लगाया जायेगा. भविष्य में उक्त यूनिट में अधिक से अधिक महिलाओं को जोड़ने की तैयारी की जायेगी.

बैग व अन्य हस्तशिल्प सामग्री बनायी जायेगी

यूनिट में महिलाएं जूट से निर्मित बैग, घरेलू उपयोग की विभिन्न सामग्री व अन्य हस्तशिल्प उत्पादों का बनायेंगी. इन उत्पादों को गांडेय दस्तकार ब्रांड नाम से बाजार में पहचान दिलायी जायेगी. जिला प्रशासन द्वारा महिलाओं को उत्पादन के साथ-साथ विपणन व बाजार उपलब्ध कराने में भी सहयोग दिया जायेगा, ताकि जुट उत्पादों की अधिकतम बिक्री सुनिश्चित हो सके और महिलाओं की आय में वृद्धि हो सके. जूट उत्पादों के निर्माण के उपरांत इस इकाई का विस्तार वस्त्र व परिधान क्षेत्र में भी किया जायेगा. इसके अंतर्गत विभिन्न प्रकार के कपड़ा आधारित उत्पादों के निर्माण के साथ-साथ फॉल-पिको, रफ्फू, सिलाई एवं अन्य परिधान संबंधी सेवाएं भी उपलब्ध करायी जायेगी.

उत्पादों पर पारसनाथ की छवि प्रदर्शित रहेगा

उत्पादों की विशिष्ट पहचान व बेहतर विपणन को ध्यान में रखते हुए जूट बैगों व अन्य उत्पादों पर मारंग बुरु पारसनाथ पर्वत की आकर्षक छवि व स्थानीय सांस्कृतिक पहचान को प्रदर्शित किया जायेगा. इससे पारसनाथ आनेवाले श्रद्धालु एवं पर्यटक इन उत्पादों को स्मृति-चिह्न के रूप में अपने साथ ले जा सकेंगे तथा स्थानीय हस्तशिल्प को व्यापक पहचान मिलेगी. यूनिट मैनेजर पूजा कुमारी और बीपीएम संदीप मिंज ने कहा कि इस पहल का मुख्य उद्देश्य ग्रामीण महिलाओं को स्व-रोजगार के अवसर उपलब्ध कराना, उनकी आर्थिक सशक्तता को बढ़ावा देना तथा स्थानीय स्तर पर सतत आजीविका सृजन करना है.