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Home झारखण्ड पूर्वी सिंहभूम लंबे समय बाद चाकुलिया लौटा रामलाल हाथी, तालाब में स्नान करते देख उमड़ी भीड़

लंबे समय बाद चाकुलिया लौटा रामलाल हाथी, तालाब में स्नान करते देख उमड़ी भीड़

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लंबे समय बाद चाकुलिया लौटा रामलाल हाथी, तालाब में स्नान करते देख उमड़ी भीड़
चाकुलिया के सालदोहा तालाब में स्नान करता रामलाल हाथी. फोटो: प्रभात खबर

चाकुलिया से राकेश सिंह की रिपोर्ट

Ramlal Elephant Returned Home: झारखंड के पूर्वी सिंहभूम जिले के घाटशिला अनुमंडल अंतर्गत चाकुलिया क्षेत्र का सबसे चर्चित हाथी रामलाल एक बार फिर लंबे समय बाद अपने पुराने इलाके में लौट आया है. रामलाल की वापसी से स्थानीय लोगों, खासकर युवाओं में उत्साह का माहौल है. क्षेत्र में उसकी मौजूदगी को लेकर लोगों के बीच चर्चा का विषय बना हुआ है.

गांव और शहर के आसपास रहना पसंद करता है रामलाल

रामलाल हाथी की पहचान अन्य जंगली हाथियों से कुछ अलग है. वह घने जंगलों में रहने के बजाय गांव और कस्बों के आसपास रहना अधिक पसंद करता है. वर्षों से वह लोगों के बीच रहकर ही अपने भोजन और पानी की व्यवस्था करता रहा है. ग्रामीण उसे फल, सब्जियां और अन्य खाद्य सामग्री देते हैं, जिसे वह शांतिपूर्वक खाकर दिन का अधिकांश समय गांव के बाहरी हिस्सों में आराम करते हुए बिताता है.

मानुषमुड़िया के सालदोहा तालाब में घंटों करता रहा स्नान

बुधवार को बहरागोड़ा प्रखंड के मानुषमुड़िया गांव के समीप स्थित सालदोहा तालाब में रामलाल हाथी को घंटों स्नान करते देखा गया. भीषण गर्मी से राहत पाने के लिए वह लंबे समय तक तालाब के पानी में डूबकर आनंद लेता रहा. हाथी का यह नजारा लोगों के लिए आकर्षण का केंद्र बन गया.

रामलाल को देखने के लिए जुटी लोगों की भीड़

रामलाल के तालाब में स्नान करने की सूचना फैलते ही आसपास के गांवों से बड़ी संख्या में लोग उसे देखने पहुंच गए. बच्चों से लेकर बुजुर्गों तक में हाथी को देखने का उत्साह देखा गया. हालांकि, भीड़ बढ़ने के बावजूद रामलाल शांत बना रहा और किसी प्रकार की आक्रामकता नहीं दिखाई.

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क्षेत्र में आकर्षण का केंद्र बना हुआ है रामलाल

अपने शांत स्वभाव और लोगों के साथ सहज व्यवहार के कारण रामलाल हाथी वर्षों से चाकुलिया और आसपास के इलाकों में विशेष पहचान रखता है. उसकी वापसी से एक बार फिर क्षेत्र में उत्साह का माहौल है और लोग उसे देखने के लिए उत्सुक नजर आ रहे हैं. आखिर इंसानों की दुनिया में जहां पड़ोसी तक पहचानना बंद कर देते हैं, वहां एक हाथी का लौटना भी इलाके की बड़ी खबर बन जाता है.

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कुमार विश्वत सेन प्रभात खबर डिजिटल में डेप्यूटी चीफ कंटेंट राइटर हैं. इनके पास हिंदी पत्रकारिता का 25 साल से अधिक का अनुभव है. इन्होंने 21वीं सदी की शुरुआत से ही हिंदी पत्रकारिता में कदम रखा. दिल्ली विश्वविद्यालय से हिंदी पत्रकारिता का कोर्स करने के बाद दिल्ली के दैनिक हिंदुस्तान से रिपोर्टिंग की शुरुआत की. इसके बाद वे दिल्ली में लगातार 12 सालों तक रिपोर्टिंग की. इस दौरान उन्होंने दिल्ली से प्रकाशित दैनिक हिंदुस्तान दैनिक जागरण, देशबंधु जैसे प्रतिष्ठित अखबारों के साथ कई साप्ताहिक अखबारों के लिए भी रिपोर्टिंग की. 2013 में वे प्रभात खबर आए. तब से वे प्रिंट मीडिया के साथ फिलहाल पिछले 10 सालों से प्रभात खबर डिजिटल में अपनी सेवाएं दे रहे हैं. इन्होंने अपने करियर के शुरुआती दिनों में ही राजस्थान में होने वाली हिंदी पत्रकारिता के 300 साल के इतिहास पर एक पुस्तक 'नित नए आयाम की खोज: राजस्थानी पत्रकारिता' की रचना की. इनकी कई कहानियां देश के विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशित हुई हैं.
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