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Home झारखण्ड पूर्वी सिंहभूम पूर्वी सिंहभूम: 800 बीघा में खीरे की बंपर खेती, फिर भी किसानों को नहीं मिल रहा सही दाम

पूर्वी सिंहभूम: 800 बीघा में खीरे की बंपर खेती, फिर भी किसानों को नहीं मिल रहा सही दाम

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पूर्वी सिंहभूम: 800 बीघा में खीरे की बंपर खेती, फिर भी किसानों को नहीं मिल रहा सही दाम
खीरा की खेती

बहरागोड़ा से प्रकाश मित्रा की रिपोर्ट 

Cucumber Farming: पूर्वी सिंहभूम जिले के बहरागोड़ा के बामडोल गांव में किसान अपनी मेहनत पर सब्जी की खेती बड़े पैमाने पर करते हैं. इस बार लगभग 800 बीघा में झींगा और खीरा की खेती की है. खीरा का उत्पादन होना शुरू हो गया है. खेत के किनारे व्यापारी मंडी लगाकर बैठ गए हैं. यहां के लगभग 70 परिवार का मुख्य आय का स्रोत खेती है. इस बार अभी तक बारिश नहीं होने के कारण किसानों में मायूसी है. 

18 से 20 रुपया प्रति किलो बिक रहा है खीरा 

खेतों के किनारे स्थानीय व्यापारियों द्वारा मंडी लगाकर किसानों से 18 से 20 रुपया प्रति किलो की दर से खीरा खरीद रहे हैं. यहां से प्रतिदिन दो पिकअप खीरा जमशेदपुर भेजा जा रहा है.

Cucumber Farming
मंडी पर खीरा बेचते किसान

खर्च के अनुरूप इस बार नहीं है खीरा का दाम : किसान

अजीत पाल, भव रंजन घोष, परितोष नायक, रिंकू साहू आदि किसानों का कहना है कि जिस तेजी के साथ बीज, खाद, कीटनाशक दवा का लगातार मूल्य वृद्धि हो रहा है. इसके साथ ही खेतों में लगभग 3 महीना तक मजदूर का मजदूरी दर भी है. खर्च के अनुरूप खीरा का मूल्य नहीं मिल पा रहा है. एक सप्ताह बाद खीरा का उत्पादन काफी तेजी के साथ होगी. उत्पादन में वृद्धि होते ही मूल्य में कमी आ जाएगी. अंतिम समय में खर्च उठाना भी मुश्किल हो जाएगा. 

कोल्ड स्टोर होने से किसानों को होता फायदा 

किसानों का कहना है कि यहां पर सब्जी खेती का उत्पादन बड़े पैमाने पर होता है मगर आजादी से लेकर आज तक यहां पर एक भी कोल्ड स्टोर नहीं है. जिसके कारण सब्जी उत्पादन होते ही बहरागोड़ा बाजार और पश्चिम बंगाल उड़ीसा एवं झारखंड के विभिन्न जगहों पर भेजा जाता है. व्यापारी जो मूल्य देता है उसी मूल्य पर किसान अपने सब्जी को बेचने के लिए मजबूर हो जाते हैं. अगर यहां पर कोल्ड स्टोर का निर्माण होता तो मार्केट के अनुसार अपने सब्जी को समय पर भेज सकते थे. मगर कोई भी जनप्रतिनिधि ने इस ओर ध्यान नहीं दिया है.

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