देवघर से संजीव मिश्रा की रिपोर्ट
Shravani Mela 2026, देवघर : आगामी राजकीय श्रावणी मेला को और अधिक भव्य, सुव्यवस्थित और श्रद्धालुओं के लिए आध्यात्मिक रूप से यादगार बनाने की दिशा में बाबा बैद्यनाथ मंदिर प्रशासन ने एक ऐतिहासिक पहल की है. शुक्रवार की शाम देवघर के ऐतिहासिक शिवगंगा तट पर भव्य ‘शिवगंगा महाआरती’ की आधिकारिक शुरुआत की गई. पहले ही दिन महाआरती की भव्यता, गूंजते वैदिक मंत्रोच्चार, सैकड़ों दीपों की आभा और संगीतमय वातावरण ने स्थानीय लोगों सहित दूर-दराज से आए श्रद्धालुओं को पूरी तरह मंत्रमुग्ध कर दिया. बड़ी संख्या में जुटे श्रद्धालु पूरे श्रद्धाभाव और अनुशासन के साथ इस अलौकिक और दिव्य दृश्य के साक्षी बने और इस पल को अपने मोबाइल कैमरों में कैद करते नजर आए.

श्रावणी मेले के बाद सातों दिन होगी महाआरती
बाबा मंदिर प्रशासन से मिली जानकारी के अनुसार, वर्तमान में यह शिवगंगा महाआरती प्रत्येक सप्ताह के मंगलवार और शुक्रवार को आयोजित की जाएगी. हालांकि, प्रशासन ने श्रावणी मेला संपन्न होने के बाद इसे सप्ताह के सातों दिन और पूरे वर्ष नियमित (सालों भर) रूप से आयोजित करने का पूरा प्रस्ताव तैयार कर लिया है. इसका मुख्य उद्देश्य देवघर आने वाले सनातन धर्मावलंबियों को उत्तर प्रदेश की धार्मिक नगरी काशी (वाराणसी) के गंगा घाट की तर्ज पर शिवगंगा तट पर भी आध्यात्मिक अनुभूति कराना है.

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शंखध्वनि और घंट-घड़ियाल से 1 घंटे तक गूंजा पूरा इलाका
शुक्रवार की शाम ठीक 7 बजे पहली महाआरती का शुभारंभ हुआ, जो रात 8 बजे तक अनवरत चली. पूरे एक घंटे तक चले इस भव्य धार्मिक अनुष्ठान में भारी शंखध्वनि, घंट-घड़ियाल की थाप, डमरू की आवाज, वैदिक विद्वानों के सस्वर मंत्रोच्चार और महादीपों की जगमगाहट से पूरा शिवगंगा क्षेत्र बाबा की भक्ति के रंग में सराबोर हो उठा. इस पहली महाआरती को बाबा मंदिर के प्रमुख विद्वान पंडित कार्तिक परिहस्त, कुंदन बलियासे, आनंद खवाड़े, कौशिक नरौने और दीपक पांडे ने संयुक्त रूप से पूरे विधि-विधान के साथ संपन्न कराया.

श्रावणी मेले में आने वाले कांवरियों के लिए बनेगा आकर्षण
इस भव्य आयोजन को धरातल पर उतारने और सफल बनाने में बाबा मंदिर के दारोगा आदित्य फलहारी, रमेश मिश्रा, सोना सिन्हा, शशि मिश्रा, गोविंद जी सहित मंदिर प्रशासन और पुलिस-प्रशासन के अन्य कर्मियों ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई. मंदिर प्रशासन का दृढ़ विश्वास है कि यह नई पहल इस साल श्रावणी मेले में सुल्तानगंज से पैदल गंगाजल लेकर बाबाधाम पहुंचने वाले लाखों कांवरियों और देश-विदेश के श्रद्धालुओं के लिए एक विशेष आकर्षण और मानसिक शांति का केंद्र बनेगी.

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