Bokaro News : वरीय संवाददाता, बोकारो. आनंद पूर्णिमा पर आयोजित तीन दिवसीय धर्म महासम्मेलन के दूसरे दिन शनिवार कोप्रातःकालीन सत्र में आनंद मार्ग प्रचारक संघ के पुरोधा प्रमुख आचार्य विश्वदेवानंद अवधूत ने उपस्थित साधकों व भक्तों को संबोधित किया. कहा कि साधना का लक्ष्य केवल दुःखों से मुक्ति नहीं, बल्कि क्लेश, कर्म, विपाक और आशय की सीमाओं का अतिक्रमण कर परमपुरुष के साथ अखंड एकत्व की अनुभूति प्राप्त करना है. उन्होंने ‘ईश्वर और जीव’ विषय की विस्तृत व्याख्या करते हुए कहा : परमपुरुष क्लेश, कर्म, विपाक और आशय से सर्वथा परे हैं. योगदर्शन के सूत्र का उल्लेख करते हुए कहा : ईश्वर या परमपुरुष वह पुरुषविशेष सत्ता है, जो क्लेश (मानसिक विकार), कर्म (क्रिया), विपाक (कर्मफल) व आशय (संस्कारों के बीज) से कभी प्रभावित नहीं होती. इसके विपरीत संसार का प्रत्येक जीव इन बंधनों के प्रभाव में रहता है. उन्होंने स्पष्ट किया कि क्लेश वह तत्व है जो मन की स्वाभाविक शांति और संतुलन को भंग कर देता है. जीव-जगत में विभिन्न प्रकार की वृत्तियां कार्य करती हैं, जिनके कारण मनुष्य सुख-दुःख, लाभ-हानि व कर्मफल का अनुभव करता है. उन्होंने चार प्रमुख वृत्तियों का वर्णन किया.