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Bokaro News : कार्यशाला पर टिकी हैं वन सुरक्षा समितियों की उम्मीदें

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Bokaro News : कार्यशाला पर टिकी हैं वन सुरक्षा समितियों की उम्मीदें

10 जून को पेटरवार स्थित वन विभाग के सभागार में वन विभाग एवं संयुक्त वन प्रबंधन समितियों (जेएफएमसी) की संयुक्त कार्यशाला होगी. इसको लेकर उत्तरी छोटानागपुर के वनांचल क्षेत्रों में विशेष उत्साह है. केंद्रीय वन पर्यावरण सुरक्षा सह प्रबंधन समिति के तत्वावधान में आयोजित इस कार्यशाला में राज्य के प्रधान मुख्य वन संरक्षक (पीसीसीएफ) संजीव कुमार भी शामिल होंगे. लंबे समय बाद इतने बड़े स्तर पर वन विभाग और समितियों का साझा मंच तैयार हो रहा है. वन सुरक्षा समितियों के पदाधिकारियों का कहना है कि कार्यशाला में उत्तरी छोटानागपुर प्रमंडल के विभिन्न जिलों की वन सुरक्षा समितियों के प्रतिनिधियों के शामिल होने की संभावना है. इससे वन संरक्षण, समिति संचालन और ग्रामीण सहभागिता से जुड़े कई मुद्दों पर व्यापक चर्चा हो सकेगी. साथ ही यह कार्यशाला वन संरक्षण आंदोलन की दिशा और रणनीति तय करने वाला महत्वपूर्ण मंच साबित हो सकती है.

वनोपज में 90 प्रतिशत हिस्सेदारी का मुद्दा रहेगा केंद्र में

कार्यशाला का सबसे महत्वपूर्ण मुद्दा वन सुरक्षा समितियों को वनोपज एवं लकड़ी बिक्री से प्राप्त राशि में 90 प्रतिशत हिस्सेदारी दिलाने का होगा. समिति ने इसे अपने एजेंडे में प्रमुखता से शामिल किया है. उल्लेखनीय है कि 27 सितंबर 2001 को झारखंड सरकार ने इस संबंध में संकल्प जारी किया था, जिसमें वन सुरक्षा समितियों को वनोपज से प्राप्त आय का 90 प्रतिशत हिस्सा देने का प्रावधान किया गया था. समिति का दावा है कि आज तक किसी भी समिति को इस प्रावधान का वास्तविक लाभ नहीं मिल सका है. पीसीसीएफ की मौजूदगी में इस मुद्दे पर गंभीर चर्चा होने की संभावना को लेकर समितियां आशान्वित हैं.

जंगल, हाथी और ग्रामीणों की सुरक्षा पर भी होगा मंथन

जंगलों में बढ़ती आग की घटनाएं, हाथी-मानव संघर्ष, वन सुरक्षा समितियों को संसाधन उपलब्ध कराने, वन अपराध नियंत्रण तथा पर्यावरण संरक्षण में ग्रामीणों की भूमिका जैसे विषयों पर भी चर्चा प्रस्तावित है. इसके अलावा वन सुरक्षा समितियों को अधिक अधिकार और सम्मानजनक पहचान दिलाने की मांग भी उठ सकती है.

नये केंद्रीय अध्यक्ष के चयन की भी चर्चा

कार्यशाला का एक महत्वपूर्ण पहलू केंद्रीय वन पर्यावरण सुरक्षा सह प्रबंधन समिति के नये केंद्रीय अध्यक्ष का चयन भी हो सकता है. चर्चित वन आंदोलनकारी एवं समिति के पूर्व केंद्रीय अध्यक्ष जगदीश महतो के निधन के बाद से यह पद एक वर्ष से अधिक समय से रिक्त है.

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