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Home झारखण्ड बोकारो Bokaro News : एकेके परियोजना से हो रहा बीएंडके एरिया का 70 फीसदी कोयला उत्पादन

Bokaro News : एकेके परियोजना से हो रहा बीएंडके एरिया का 70 फीसदी कोयला उत्पादन

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Bokaro News : एकेके परियोजना से हो रहा बीएंडके एरिया का 70 फीसदी कोयला उत्पादन

कोल इंडिया के मेगा प्रोजेक्ट में शामिल एकेके (अमलगमेटेड कोनार-खासमहल) परियोजना सीसीएल बीएंडके एरिया के 70 फीसदी कोयला का उत्पादन कर रही है. चालू वित्तीय वर्ष में अभी तक परियोजना का उत्पादन 40 लाख टन से ज्यादा हो चुका है, जबकि पूरे एरिया का उत्पादन अभी 65 लाख टन के करीब है. एकेके परियोजना से अभी प्रतिदिन लगभग 20-25 हजार टन उत्पादन हो रहा है, जिसे 30-35 हजार टन तक ले जाने की योजना है. चालू वित्तीय वर्ष में इस परियोजना का उत्पादन लक्ष्य सात मिलियन टन है. क्षेत्र के जीएम एसके झा ने कहा बीएंडके एरिया चालू वित्तीय वर्ष में हर हाल में 85 लाख टन कोयला उत्पादन करेगा. मालूम हो कि बीएंडके एरिया से सटे ढोरी एरिया का उत्पादन लक्ष्य 54 लाख टन तथा कथारा एरिया का 44 लाख टन है. ढोरी और कथारा एरिया का उत्पादन अभी तक जितना हुआ है, उससे थोडा कम एकेके परियोजना ने कर लिया है.

परियोजना विस्तार की राह में हैं कई अड़चनें

मालूम हो कि एकेके परियोजना के विस्तार में कई अड़चनें हैं. बरवाबेड़ा गांव को शिफ्ट करने की प्रक्रिया पांच-छह वर्षों से चल रही है, लेकिन अभी तक सफलता नहीं मिली है. वर्तमान में अगर दरगाह मोहल्ला को जल्द शिफ्ट नहीं कराया गया तो नये वित्तीय वर्ष में उत्पादन की गति धीमी पड़ने की आशंका है. बरवाबेड़ा गांव के लोगों को तीन किमी दूर केएसपी फेज में शिफ्ट करना है. कंपनी के नियमानुसार प्रबंधन विस्थापितों को मुआवजा सहित अन्य सुविधाएं उपलब्ध करायेगी. सीसीएल प्रबंधन इसमें करीब 20 करोड़ रुपये खर्च करेगा. पिछले पांच साल से कई बार प्रबंधन ने प्रशासन (मजिस्ट्रेट) के सहयोग से नये पुनर्वास स्थल पर लोगों को शिफ्ट कराने का प्रयास किया, लेकिन प्रबंधन को विस्थापितों का आक्रोश झेलना पड़ा.

देश की टॉप 25 कोयला खदानों में शामिल है एकेके

एकेके परियोजना देश की टॉप 25 कोयला खदानों में शामिल है. बरवाबेड़ा गांव की शिफ्टिंग के बाद सीसीएल को इस गांव के भू-गर्भ से करीब 40 मिलियन टन कोयला मिलेगा. इस परियोजना में 70 फीसदी उत्पादन आउटसोर्स और 30 फीसदी उत्पादन विभागीय हो जाता है.

क्या कहते हैं पीओ

पीओ सत्येंद्र कुमार सिंह का कहना है कि परियोजना विस्तार को लेकर प्रबंधकीय पहल तीव्र गति से की जा रही है. डीवीसी के हाइटेंशन पोल को 10 दिनों के अंदर हटा लिया जायेगा. दरगाह मोहल्ला को शिफ्ट होना अति आवश्यक है. ग्रामीणों तथा श्रमिक संगठनों को माइंस विस्तार में सहयोग करना चाहिए़

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