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अब हाइटेक होगा सीवान का नाला सिस्टम

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अब हाइटेक होगा सीवान का नाला सिस्टम
सांकेतिक तस्वीर

प्रतिनिधि,सीवान. शहर में हर बरसात में जलजमाव और गंदे पानी की निकासी को लेकर लोगों की परेशानी बढ़ जाती है. कई मुहल्लों में पानी का बहाव रुक जाता है, तो कहीं नालों की ढाल सही नहीं होने से गंदगी जमा हो जाती है. इन समस्याओं का स्थायी समाधान निकालने के लिए सीवान नगर परिषद ने अब पूरे शहर के ड्रेनेज नेटवर्क को वैज्ञानिक तरीके से व्यवस्थित करने की पहल शुरू की है. शहर के सभी नालों का विस्तृत सर्वे कर उनका डिजिटल जीआइएस मैप तैयार किया जाएगा ताकि भविष्य की योजना और मरम्मत कार्य सटीक जानकारी के आधार पर हो सके. बताया जाता है कि अगले कुछ माह में नगर परिषद क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले सभी पक्के, कच्चे, ढके हुए और खुले नालों का भौतिक सर्वेक्षण किया जाएगा. हर नाले की सही पहचान की जाएगी और उसे एक अलग नाम या कोड दिया जाएगा.इससे यह स्पष्ट रहेगा कि कौन सा नाला कहां से शुरू होता है, कहां जाकर मिलता है और उसकी लंबाई कितनी है.आधुनिक सर्वे उपकरणों की मदद से नालों की पूरी लाइन को जमीन पर चिह्नित किया जाएगा. इसके साथ ही नाले का प्रारंभ बिंदु, अंतिम बिंदु, जंक्शन, पुलिया, आउटफॉल और आपसी कनेक्टिविटी को भी रिकॉर्ड किया जाएगा.इससे यह पता चल सकेगा कि किस इलाके का पानी किस रास्ते से निकलकर मुख्य नाले तक पहुंचता है. हर 50 मीटर पर इनवर्ट लेवल मापन अनिवार्य रूप से किया जाएगा सबसे महत्वपूर्ण पहलू यह है कि हर नाले का ढाल और गहराई वैज्ञानिक तरीके से मापा जाएगा. हर 50 मीटर पर इनवर्ट लेवल मापन अनिवार्य रूप से किया जाएगा ताकि यह स्पष्ट हो सके कि पानी का बहाव सही दिशा में और सही ढाल के साथ हो रहा है या नहीं. अगर कहीं ढाल में गड़बड़ी पाई जाती है तो उसे भविष्य की योजना में सुधारा जा सकेगा.विशेषज्ञों का कहना है कि सही इनवर्ट लेवल डेटा मिलने से जलजमाव की समस्या का स्थायी समाधान निकालना आसान होगा. सर्वे के आधार पर पूरे शहर का जीआइएस आधारित डिजिटल मानचित्र तैयार किया जाएगा.वार्ड-वार नक्शे बनाए जाएंगे, जिनमें नालों की स्थिति, लंबाई, चौड़ाई और कनेक्शन की जानकारी दर्ज रहेगी. साथ ही ड्रेन इन्वेंट्री रजिस्टर और इनवर्ट लेवल रजिस्टर भी तैयार किया जाएगा ताकि हर जानकारी रिकॉर्ड में सुरक्षित रहे. पानी की निकासी से जुड़ी योजनाओं को वैज्ञानिक आधार मिलेगा नगर परिषद के माने तो अभी तक कई जगहों पर नालों का वास्तविक मानचित्र उपलब्ध नहीं है.जिससे मरम्मत और निर्माण कार्य में दिक्कत आती है.कई बार एक लाइन को साफ करने के बाद भी समस्या बनी रहती है, क्योंकि असली रुकावट किसी और हिस्से में होती है. डिजिटल मैपिंग के बाद यह स्थिति बदलेगी और काम ज्यादा सटीक तरीके से हो सकेगा.इस पहल से भविष्य में नाला चौड़ीकरण, गहराईकरण, नए ड्रेनेज लाइन निर्माण और बरसाती पानी की निकासी से जुड़ी योजनाओं को वैज्ञानिक आधार मिलेगा. आम लोगों को भी राहत मिलेगी, क्योंकि जलजमाव की समस्या को जड़ से समझकर समाधान की दिशा में काम किया जाएगा. बताया जा रहा है कि शहर को स्वच्छ, सुरक्षित और जलभराव मुक्त बनाने की दिशा में यह कदम काफी अहम माना जा रहा है.अगर योजना तय समय पर पूरी हो जाती है, तो सीवान का ड्रेनेज सिस्टम पहले से कहीं ज्यादा व्यवस्थित और तकनीकी रूप से मजबूत नजर आएगा. क्या कहते हैं इओ शहर में जलजमाव की समस्या का स्थायी समाधान केवल वैज्ञानिक सर्वेक्षण से ही संभव है. अब पूरे ड्रेनेज नेटवर्क का डिजिटल मैप तैयार किया जा रहा है, ताकि हर नाले की वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सके. डॉ विपिन कुमार, कार्यपालक पदाधिकारी नप सीवान

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