Waterlogging Crisis Sitamarhi: वार्ड-17 की बदहाली, दो-दो जलमीनारें फेल, नाव और चचरी के सहारे कट रही लोगों की जिंदगी

Waterlogging Crisis Sitamarhi: नगर निगम के वार्ड-17 में दो-दो जलमीनारें बेकार पड़ी हैं और लोग बूंद-बूंद पानी को तरस रहे हैं. जलजमाव के कारण लोग नाव और चचरी के सहारे नारकीय जीवन जीने को मजबूर हैं.

By सुनील कुमार सिंह | July 5, 2026 9:46 AM

सीतामढ़ी से रतिकांत झा की रिपोर्ट

Waterlogging Crisis Sitamarhi: नगर निगम क्षेत्र के वार्ड संख्या-17 के हजारों लोग दशकों से जलजमाव, गंदगी, पेयजल संकट व सड़क जैसी बुनियादी सुविधाओं के अभाव में नारकीय जीवन जीने को विवश हैं. स्थानीय लोगों का आरोप है कि वर्षों से आवेदन, धरना-प्रदर्शन व जनप्रतिनिधियों से गुहार लगाने के बावजूद समस्याओं का स्थायी समाधान नहीं हो सका है. पूर्व वार्ड पार्षद सुनील कुमार, वर्तमान वार्ड पार्षद मंजु देवी व स्थानीय नागरिकों ने प्रशासन से शीघ्र ठोस पहल की मांग की है.

दो-दो जलमीनार, फिर भी एक बूंद पानी नहीं

वार्ड में एक ही भूखंड पर दो जलमीनार स्थापित हैं, लेकिन विडंबना यह है कि आज तक किसी भी घर तक नियमित पेयजल आपूर्ति शुरू नहीं हो सकी है. अधिकांश परिवारों को नल-जल योजना का कनेक्शन तक नहीं मिला है. स्थानीय लोगों का कहना है कि करोड़ों रुपये खर्च होने के बावजूद जलमीनार शोपीस बनकर रह गए हैं. पिछले वर्ष डीएम ने निरीक्षण कर समिति भी बनाई थी, लेकिन मामला आगे नहीं बढ़ सका. अब नगर निगम की 12 नई जलमीनारों की योजना से लोगों को उम्मीद जगी है.

चचरी व नाव के सहारे जिंदगी, स्कूल भी पानी में डूबा

वार्ड निचले इलाके में होने के कारण अन्य वार्डों के नालों का गंदा पानी यहां आकर जमा हो जाता है. इससे कई मोहल्लों में पूरे वर्ष जलजमाव बना रहता है. कई हिस्सों में व्यवस्थित सड़क नहीं होने से लोग बांस की चचरी व अस्थायी रास्तों के सहारे आवागमन करते हैं. आधा दर्जन से अधिक परिवार ऐसे हैं, जिन्हें सालभर नाव जैसी जुगाड़ व्यवस्था से आना-जाना पड़ता है. वार्ड स्थित सरकारी विद्यालय भी साल में करीब छह महीने तक पानी से घिरा रहता है, जिससे बच्चों की पढ़ाई प्रभावित होती है.

चार करोड़ का आरसीसी नाला नहीं बन सका

स्थानीय नागरिकों के अनुसार, नगर परिषद के समय जलजमाव की समस्या के समाधान के लिये करीब चार करोड़ रुपये की लागत से आरसीसी नाला निर्माण की योजना स्वीकृत हुई थी. हालांकि, समय पर काम शुरू नहीं होने के कारण राशि वापस चली गयी और नाला निर्माण का सपना अधूरा रह गया. बरसात के दिनों में दर्जनों परिवारों को घर छोड़कर किराये के मकानों में शरण लेनी पड़ती है.

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