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Home बिहार सासाराम पराली जलाने पर 34 किसानों का पंजीकरण रद्द, सरकारी योजनाओं के लाभ से हुए वंचित

पराली जलाने पर 34 किसानों का पंजीकरण रद्द, सरकारी योजनाओं के लाभ से हुए वंचित

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पराली जलाने पर 34 किसानों का पंजीकरण रद्द, सरकारी योजनाओं के लाभ से हुए वंचित
सांकेतिक तस्वीर

फसल अवशेष जलाने वालों पर अब बीएनएस की धाराओं में होगी एफआईआर

काराकाट में नौ और दिनारा में छह किसानों पर गिरी गाज, डीबीटी पोर्टल पर ब्लॉक की गयी आइडी

मिट्टी की उर्वरा शक्ति और पर्यावरण को बचाने के लिए विभाग ने कसी कमर

प्रतिनिधि, सासाराम ग्रामीण

खेतों में फसल अवशेष जलाने वाले किसानों के विरुद्ध कृषि विभाग ने कार्रवाई प्रारंभ कर दी है. खेतों में फसल अवशेष जलाने वाले किसानों को विभाग ने सरकारी योजनाओं से वंचित किया है. इसकी जानकारी डीएओ प्रभाकर कुमार ने दी. उन्होंने बताया कि कृषि विभाग द्वारा रबी वर्ष 2025-26 में फसल अवशेष नहीं जलाने के लिए सभी प्रखंडों की पंचायतों में पदस्थापित कृषि समन्वयक, प्रखंड तकनीकी प्रबंधक, सहायक तकनीकी प्रबंधक व किसान सलाहकार को लगातार अपने कार्य क्षेत्र में भ्रमणशील रहकर किसानों के बीच व्यापक प्रचार-प्रसार करने का निर्देश दिया गया है.

मिट्टी और स्वास्थ्य पर पड़ रहा बुरा असर:

जन-जन तक फसल अवशेष जलाने के दुष्प्रभाव से अवगत कराने के लिए लगातार प्रयास किये जा रहे हैं. फसल अवशेष जलाने से मिट्टी का तापमान बढ़ने के कारण सूक्ष्म जीवाणु और केंचुओं आदि का ह्रास हो जाता है, फलस्वरूप मिट्टी की उर्वरा शक्ति क्षीण हो जाती है. साथ ही पर्यावरण दूषित होने के कारण सभी जीवों पर दुष्परिणाम के साथ-साथ श्वास की बीमारी भी हो जाती है. फसल अवशेष प्रबंधन के लिए जीविका दीदी के माध्यम से भी स्कूलों में जाकर जागरूक किया जा रहा है. प्रखंड से लेकर जिलास्तर के पदाधिकारी लगातार क्षेत्रों का भ्रमण कर रहे हैं.

इन प्रखंडों के किसानों पर हुई कार्रवाई

जागरूकता के बावजूद जिन किसानों द्वारा फसल अवशेष जलाया गया है, उनका स्थल जांच के उपरांत विभाग द्वारा पंजीकरण रद्द कर दिया गया है. पिछले 05 दिनों में कुल 34 किसानों का डीबीटी पंजीकरण रद्द कर उन्हें सरकारी लाभ से वंचित किया गया है. इसमें दिनारा प्रखंड के 06, संझौली के 04, बिक्रमगंज के 04, काराकाट के 09, दावथ के 04 व नासरीगंज के 07 किसान शामिल हैं. अन्य प्रखंडों की पंचायतों में भी सघन जांच की जा रही है.

होगी जेल और कानूनी कार्रवाई

इसके बावजूद यदि किसानों द्वारा खेतों में पराली जलाने की घटना घटित की जाती है, तो इससे सख्ती से निपटने के लिए भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (बीएनएस) की सुसंगत धारा 152 तथा एयर एक्ट-1981 के तहत कानूनी कार्रवाई की जायेगी. विभाग ने स्पष्ट किया है कि पर्यावरण और मिट्टी के स्वास्थ्य से खिलवाड़ करने वालों को किसी भी हाल में बख्शा नहीं जायेगा. संबंधित आरोपित किसानों के खिलाफ प्राथमिकी भी दर्ज करायी जा सकती है.

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