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Home बिहार सारण saran news : गंभीर मरीजों का पांच मिनट में जांच कर शुरू किया जायेगा इलाज

saran news : गंभीर मरीजों का पांच मिनट में जांच कर शुरू किया जायेगा इलाज

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saran news : गंभीर मरीजों का पांच मिनट में जांच कर शुरू किया जायेगा इलाज
सांकेतिक तस्वीर

saran news : छपरा. सदर अस्पताल के इमरजेंसी विभाग में मरीजों के इलाज में अनियमितता को लेकर लगातार मिल रही शिकायतों को गंभीरता से लेते हुए एक मानक संचालन प्रक्रिया (एसओपी) लागू की गयी है.

अस्पताल अधीक्षक कार्यालय से जारी आदेश के अनुसार अब इमरजेंसी में आने वाले प्रत्येक मरीज का समयबद्ध और पारदर्शी तरीके से इलाज सुनिश्चित किया जायेगा. इस संदर्भ में उपाधीक्षक डॉ केएम दुबे ने बताया कि मरीज को समय पर नहीं देखने या दवा नहीं देने जैसी शिकायतों को समाप्त करने के उद्देश्य से यह एसओपी तैयार किया गया है. इसके तहत सभी इमरजेंसी ड्यूटी डॉक्टर एवं कैजुअल्टी मेडिकल ऑफिसर को अनिवार्य रूप से निर्देशों का पालन करना होगा. नयी व्यवस्था के अनुसार मरीज के इमरजेंसी में पहुंचने के पांच मिनट के भीतर प्राथमिक जांच (प्राइमरी असेसमेंट) करना अनिवार्य होगा.

वहीं 10 मिनट के भीतर मरीज की सभी आवश्यक जानकारियां, जीवन रक्षक संकेत (वाइटल्स) और मुख्य शिकायतें दर्ज करनी होंगी. इसके साथ ही प्रत्येक मरीज के लिए विस्तृत दस्तावेजीकरण भी अनिवार्य किया गया है. इसमें मरीज का नाम, उम्र, लिंग, आगमन की तारीख व समय, रजिस्ट्रेशन नंबर दर्ज करना होगा. वहीं वाइटल साइन के तहत पल्स, ब्लड प्रेशर, श्वसन दर, तापमान और ऑक्सीजन लेवल दर्ज करना जरूरी होगा. अस्पताल प्रशासन का कहना है कि इस एसओपी के लागू होने से इमरजेंसी सेवाओं में सुधार आयेगा, मरीजों को समय पर इलाज मिलेगा तथा चिकित्सकों की कार्यप्रणाली भी मेडिको-लीगल रूप से सुरक्षित रहेगी.

रेफर करने से पहले स्थिति को नियंत्रित करने का होगा प्रयास

सदर अस्पताल के इमरजेंसी विभाग में इस समय जो भी मरीज गंभीर अवस्था में आते हैं, उनमें से 90 फीसदी मरीज आते के साथ ही रेफर कर दिये जाते हैं. कई बार मरीजों के परिजनों की शिकायत रहती है कि बिना उचित जांच व इलाज किये ही पेशेंट को रेफर किया जाता है. इससे पटना या अन्य अस्पतालों में ले जाने के क्रम में मरीजों की जान भी चली जाती है. ऐसे में अब सड़क दुर्घटना या अन्य मामलों में गंभीर स्थिति में आये मरीजों का सदर अस्पताल में हर संभव इलाज किया जायेगा. उनकी स्थिति नियंत्रित होने के बाद ही पटना या अन्य अस्पतालों में आवश्यतानुसार रेफर किया जायेगा.

इमरजेंसी विभाग की लगातार होगी मॉनीटरिंग

इमरजेंसी विभाग में चिकित्सकों की रोस्टर के अनुसार ड्यूटी लगायी गयी है. सुबह, दोपहर, शाम व रात के शिफ्ट में अलग-अलग डॉक्टर तैनात रहेंगे. इस व्यवस्था की मॉनीटरिंग लगातार की जायेगी. इसके लिए सभी चिकित्सकों को गाइडलाइन भी जारी की जा चुकी है. वहीं दलालों पर भी अस्पताल प्रशासन की कड़ी नजर रहेगी. अक्सर दलाल इमरजेंसी में आये मरीजों के परिजनों को बहला-फुसलाकर दूसरे निजी अस्पताल लेकर चले जाते हैं, जहां उनसे मोटी उगाही की जाती है. अस्पताल में दलालों की आवाजाही पर रोक लगाने के लिए पुलिस चेकपोस्ट भी बनाया गया है.

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