जर्जर झोपड़ियों में चल रहे 140 आंगनबाड़ी केंद्र, 80 लाख खर्च के बावजूद नहीं सुधरी व्यवस्था

Samastipur News: समस्तीपुर के मोरवा प्रखंड में 219 में से करीब 140 आंगनबाड़ी केंद्र जर्जर झोपड़ियों और किराए के भवनों में संचालित हो रहे हैं. बच्चों की सुरक्षा और बुनियादी सुविधाओं को लेकर ग्रामीणों ने विभागीय लापरवाही पर सवाल उठाते हुए स्थायी समाधान की मांग की है.

By Purushottam Kumar | July 6, 2026 6:55 PM

समस्तीपुर के मोरवा से मनोज कुमार वर्मा की रिपोर्ट

Samastipur News: मोरवा प्रखंड में आंगनबाड़ी केंद्रों की बदहाल व्यवस्था बच्चों की सुरक्षा और भविष्य पर गंभीर सवाल खड़े कर रही है. प्रखंड के अधिकांश आंगनबाड़ी केंद्र आज भी जर्जर झोपड़ियों और किराए के असुरक्षित भवनों में संचालित हो रहे हैं, जहां छोटे-छोटे बच्चे जान जोखिम में डालकर पढ़ने और पोषण आहार लेने पहुंचते हैं. ग्रामीणों का आरोप है कि हर महीने लाखों रुपये खर्च होने के बावजूद जमीनी स्तर पर स्थिति जस की तस बनी हुई है.

219 में से 140 केंद्र किराए के जर्जर भवनों में संचालित

झोपड़ीनुमा आंगनबाड़ी केंद्र

स्थानीय लोगों के अनुसार मोरवा प्रखंड में कुल 219 आंगनबाड़ी केंद्र हैं, जिनमें लगभग 140 केंद्र आज भी किराए के जर्जर भवनों और झोपड़ियों में चल रहे हैं. कई केंद्रों में न बिजली की व्यवस्था है, न पेयजल और न ही शौचालय. बरसात, भीषण गर्मी और ठंड के मौसम में भी बच्चों को इन्हीं भवनों में बैठाया जाता है.

हादसे की आशंका के बीच पढ़ने को मजबूर बच्चे

ग्रामीणों का कहना है कि कई केंद्र ऐसे हैं जहां भवन पूरी तरह जर्जर हो चुके हैं. कभी भी कोई बड़ा हादसा हो सकता है. इसके बावजूद विभाग की ओर से बच्चों को सुरक्षित भवनों में स्थानांतरित करने की दिशा में कोई ठोस पहल नहीं की जा रही है. लोगों का सुझाव है कि ऐसे केंद्रों को अस्थायी रूप से नजदीकी सरकारी विद्यालयों या पहले से निर्मित आंगनबाड़ी भवनों में स्थानांतरित किया जाना चाहिए.

हर महीने करीब 80 लाख रुपये खर्च, फिर भी बदहाल

सांकेतिक तस्वीर , ai generated image

व्यवस्था

स्थानीय लोगों का आरोप है कि परियोजना पर विभिन्न मदों में हर महीने करीब 80 लाख रुपये खर्च किए जाते हैं. इसके बावजूद बच्चों को बुनियादी सुविधाएं नहीं मिल पा रही हैं. उनका कहना है कि पोषण और स्कूल पूर्व शिक्षा के नाम पर केवल औपचारिकताएं पूरी की जा रही हैं, जबकि बच्चों के समग्र विकास की मूल भावना प्रभावित हो रही है.

विभागीय उदासीनता पर उठे सवाल

ग्रामीणों ने कहा कि आंगनबाड़ी केंद्र बच्चों की पहली पाठशाला होते हैं, लेकिन यहीं से उनकी शिक्षा की शुरुआत बदहाल माहौल में होती है. उनका आरोप है कि विभागीय लापरवाही के कारण वर्षों से स्थिति में कोई सुधार नहीं हुआ है. लोगों ने सरकार और जिला प्रशासन से जर्जर भवनों में चल रहे केंद्रों को सुरक्षित स्थानों पर स्थानांतरित करने और स्थायी भवन उपलब्ध कराने की मांग की है.

सीडीपीओ ने क्या कहा

इस संबंध में सीडीपीओ कुमारी श्वेता ने बताया कि यह व्यवस्था पूर्व से चली आ रही है. विभाग स्तर पर उपलब्ध संसाधनों के अनुसार कार्य किया जा रहा है.