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Home बिहार सहरसा अचानक हुए एनाउसमेंट से पटरी के बीच मच गयी अफरा-तफरी

अचानक हुए एनाउसमेंट से पटरी के बीच मच गयी अफरा-तफरी

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अचानक हुए एनाउसमेंट से पटरी के बीच मच गयी अफरा-तफरी

सहरसा-मानसी रेलखंड के धमारा घाट रेलवे स्टेशन पर टल गया हादसा, ट्रेन आने पर जाेर-जोर से चिल्लाने लगे यात्री सिमरी बख्तियारपुर (सहरसा). पूर्व मध्य रेलवे अंतर्गत सहरसा-मानसी रेलखंड के धमारा घाट रेलवे स्टेशन पर सोमवार को एक रेल हादसा टल गया. मिली जानकारी के मुताबिक समस्तीपुर से सहरसा आ रही 05550 समस्तीपुर-सहरसा पैसेंजर ट्रेन के इंतजार में दर्जनों महिलाएं सैकड़ो ठठेरा (मकई का सूखा हुआ ऊपरी भाग) लेकर प्लेटफॉर्म संख्या एक पर और लाइन संख्या एक के बगल में बैठ ट्रेन का इंतजार कर रही थी. इसके अलावे बड़ी संख्या में यात्री भी ट्रेन के इंतजार में खड़े थे. वहीं लाइन संख्या दो पर मालगाड़ी लगी थी. इसी दौरान पैसेंजर ट्रेन मां कात्यायनी मंदिर के निकट जब दिखने लगी तभी एनाउंसमेंट किया गया कि समस्तीपुर-सहरसा पैसेंजर ट्रेन प्लेटफॉर्म संख्या दो पर आ रही है. जिसके बाद अफरा-तफरी की स्थिति हो गयी. ट्रेन की खिड़कियों में ठठेरा लटका कर ले जाने वाली दर्जनों महिलाएं जैसे तैसे सैकड़ों ठठेरा को मालगाड़ी के चक्कों के बीच से प्लेटफॉर्म संख्या दो पर ले जाने लगी लगी. सैकड़ों ठठेरे होने की वजह से प्लेटफॉर्म संख्या एक और दो के बीच भागमभाग की स्थिति बन गयी. वहीं यात्री भी ट्रेन आते देख परेशान थे. कुछ मालगाड़ी के डिब्बे के नीचे से तों कईयों ने फूट ओवरब्रिज का सहारा लिया और प्लेटफॉर्म संख्या दो पर पहुंचें. भीषण गर्मी मे इस दौरान दर्जनों महिलाएं ठठेरा के साथ लाइन संख्या दो और तीन के बीच ही खड़ी हो गयी. इस दौरान ट्रेन भी स्टेशन पहुंचने लगी. जिस पर यात्रियों ने जोर-जोर से चिल्ला कर सभी को सतर्क किया. हालांकि ट्रेन की सीटी से भी लोग चौकस हुए. लेकिन विलंब से किये गये एनाउंसमेंट की वजह से यात्रियों का रेलवे के प्रति काफ़ी रोष दिखा. यात्रियों ने बताया कि ट्रेन जब बदला घाट से खुली तभी ही एनाउंसमेंट किया जाना चाहिए था. यदि वक्त रहते यात्री सजग नहीं होते तो आज एक बड़ी रेल दुर्घटना हो सकती थी. खूब ढोया जा रहा है ठठेरा सहरसा-मानसी रेलखंड के धमारा घाट स्टेशन से इन दिनों खूब महिलाएं सुबह सवेरे 05509 सहरसा – जमालपुर पैसेंजर ट्रेन से धमारा घाट जाती है और वहां से विभिन्न ट्रेनों के माध्यम से ठठेरा ले कर घर लौटती है. यह स्थिति हर वर्ष इस महीने देखने को मिलती है. यह ठठेरा या ठठेरा गरीब परिवारों के जलावन से लेकर पशुओं के चारा तक के काम आता है. इसलिए इन दिनों ग्रामीण महिलाएं बड़ी संख्या में ठठेरा या ठठेरा धमारा से ट्रेन की खिड़कियों मे लटका लाती है. लेकिन सोमवार को विलंब से एनाउंसमेंट किए जाने की वजह से एक बड़ा हादसा होते-होते रह गया. यात्रियों के मुताबिक जब स्थानीय रेलकर्मी को यह दिख रहा था कि स्टेशन पर यात्री और ठठेरा ले जाने वाली महिलाएं काफ़ी संख्या में है तों उन्हें एनाउंसमेंट इतने विलंब से नहीं करना चाहिए था. राज्यरानी कांड की आ गयी याद वर्ष 2013 के अगस्त महीने की 19 तारीख की वह सुबह जब सहरसा से धड़धड़ाते पटना के लिए रवाना हुई. राज्यरानी सुपरफास्ट एक्सप्रेस ने दर्जनों श्रद्धालुओं को धमारा घाट में अपनी चपेट में ले लिया था. घटना के बाद आक्रोशित लोगों ने राज्यरानी में आग लगा दी थी. घटना के वक्त केंद्र में यूपीए की सरकार थी. धमारा में हुई इस घटना ने पूरे देश को झकझोर कर रख दिया था. तत्कालीन रेल राज्य मंत्री अधीर रंजन चौधरी ने घटना के बाद धमारा घाट पहुंचकर स्थिति का अवलोकन किया था और दोषियों पर कार्रवाई की बात कही थी. घटना के कई साल बीत चुके हैं. लेकिन आज भी उस घटना से सीखते हुए हमें और रेलवे को सतर्क रहने की जरूरत है.

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