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Home बिहार सहरसा बजट पर अटका सहरसा-मानसी रेलखंड का दोहरीकरण, रेलवे बोर्ड में चल रहा मंथन

बजट पर अटका सहरसा-मानसी रेलखंड का दोहरीकरण, रेलवे बोर्ड में चल रहा मंथन

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बजट पर अटका सहरसा-मानसी रेलखंड का दोहरीकरण, रेलवे बोर्ड में चल रहा मंथन

डिवीजन स्तर पर दो बार संशोधित कर भेजा गया बजट प्रस्ताव, जून-जुलाई में मिल सकती है वित्तीय स्वीकृति

सहरसा.

सहरसा-मानसी रेलखंड के बहुप्रतीक्षित दोहरीकरण की योजना फिलहाल बजट संबंधी प्रक्रिया में उलझी हुई है. 41 किलोमीटर लंबे इस रेलखंड के दोहरीकरण के लिए वित्तीय स्वीकृति को लेकर रेलवे बोर्ड स्तर पर मंथन जारी है. हालांकि रेल अधिकारियों का दावा है कि बजट प्रस्ताव में आवश्यक संशोधन के बाद मामला अंतिम चरण में पहुंच गया है और जून या जुलाई में परियोजना को मंजूरी मिल सकती है.

दो बार संशोधित कर भेजा गया बजट प्रस्ताव

समस्तीपुर रेल मंडल के अधिकारियों के अनुसार, दोहरीकरण परियोजना के लिए प्रारंभिक रूप से करीब 1000 करोड़ रुपये का प्रस्ताव रेलवे बोर्ड को भेजा गया था. लागत अधिक होने के कारण रेलवे बोर्ड ने बजट में कटौती का सुझाव दिया. इसके बाद संशोधित प्रस्ताव में लागत घटाकर 724 करोड़ रुपये कर दी गई. फिर दिसंबर 2025 में नया प्रारूप तैयार कर 500 करोड़ रुपये से कम लागत का प्रस्ताव रेलवे बोर्ड को भेजा गया. अधिकारियों का कहना है कि इस प्रस्ताव की समीक्षा बोर्ड स्तर पर चल रही है और जल्द ही वित्तीय स्वीकृति मिलने की संभावना है.

वित्तीय स्वीकृति में लागत बनी बाधा

रेलवे बोर्ड सहरसा-मानसी रेलखंड के दोहरीकरण को पहले ही सैद्धांतिक मंजूरी दे चुका है. वर्ष 2023 में कराए गए सर्वेक्षण के आधार पर तैयार विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (डीपीआर) में इसकी लागत लगभग 1000 करोड़ रुपये आंकी गई थी. अधिक लागत के कारण रेलवे बोर्ड ने वित्तीय स्वीकृति नहीं दी और लागत कम करने को कहा. इसके बाद रेल मंडल ने संशोधित प्रस्ताव तैयार कर पुनः बोर्ड को भेजा.

वर्ष 2023 में हुआ था सर्वेक्षण

रेलवे बोर्ड के निर्देश पर वर्ष 2023 में सहरसा-मानसी रेलखंड का सर्वेक्षण कराया गया था. लगभग 80 लाख रुपये की लागत से हुए इस सर्वेक्षण का कार्य दिल्ली की एक एजेंसी को सौंपा गया था. रिपोर्ट तैयार होने के बाद इसे रेलवे बोर्ड को भेज दिया गया. नए प्रस्ताव में यात्रियों की सुविधा और माल ढुलाई को बेहतर बनाने पर विशेष जोर दिया गया है. जिन स्टेशनों पर रेक प्वाइंट की सुविधा है, वहां अतिरिक्त रेल लाइनें प्रस्तावित की गई हैं ताकि ट्रेनों का परिचालन अधिक सुचारु हो सके.

कई स्टेशनों पर बढ़ेगी लाइनों की संख्या

वर्तमान में सहरसा-मानसी रेलखंड के अधिकांश स्टेशनों पर तीन-तीन लाइनें हैं, जबकि हॉल्ट स्टेशनों पर एकल लाइन की व्यवस्था है. दोहरीकरण के बाद कई स्टेशनों पर अतिरिक्त लाइनें विकसित की जाएंगी.

सोनबरसा कचहरी स्टेशन : 7 लाइनें

बदला घाट स्टेशन : 8 लाइनें

धमारा घाट स्टेशन : 5 लाइनें

कोपरिया स्टेशन : 5 लाइनें

सिमरी बख्तियारपुर स्टेशन : 5 लाइनें

वहीं परमिनिया हॉल्ट, बाबा रघुनी हॉल्ट और फनगो हॉल्ट पर दो-दो लाइनें प्रस्तावित हैं.

पांच स्टेशन और तीन हॉल्ट से गुजरता है रेलखंड

सहरसा-मानसी रेलखंड में पांच प्रमुख स्टेशन और तीन हॉल्ट स्टेशन स्थित हैं. इस मार्ग पर कोसी और बागमती नदी सहित तीन बड़े रेल पुल भी हैं. प्रमुख स्टेशनों में सोनबरसा कचहरी, सिमरी बख्तियारपुर, कोपरिया, धमारा घाट और बदला घाट शामिल हैं.

वर्ष 2005 में हुई थी दोहरीकरण की घोषणा

सहरसा-मानसी आमान परिवर्तन परियोजना पूरी होने के बाद वर्ष 2005 में तत्कालीन रेल मंत्री लालू प्रसाद यादव ने बड़ी रेल लाइन का उद्घाटन किया था. उसी दौरान इस रेलखंड के दोहरीकरण का भी आश्वासन दिया गया था. हालांकि करीब दो दशक बाद भी यह परियोजना वित्तीय स्वीकृति की प्रतीक्षा कर रही है. वर्तमान में इस रेलखंड से वंदे भारत एक्सप्रेस, अमृत भारत एक्सप्रेस सहित कई महत्वपूर्ण ट्रेनों का परिचालन हो रहा है.

सिंगल लाइन के कारण बढ़ रही परेशानी

सहरसा-मानसी रेलखंड पर प्रतिदिन 30 से अधिक मेल, एक्सप्रेस, सुपरफास्ट और पैसेंजर ट्रेनों का परिचालन होता है. इनमें लगभग 23 ट्रेनें प्रतिदिन तथा सात ट्रेनें साप्ताहिक हैं. इसके अलावा 10 से 12 मालगाड़ियां भी प्रतिदिन गुजरती हैं. सिंगल लाइन होने के कारण ट्रेनों को विभिन्न स्टेशनों पर क्रॉसिंग के लिए रोकना पड़ता है, जिससे उनके परिचालन में विलंब होता है.

डबल लाइन बनने से मिलेगा बड़ा लाभ

दोहरीकरण पूरा होने के बाद ट्रेनों की क्रॉसिंग में लगने वाला समय बचेगा और परिचालन अधिक सुगम होगा. इंटरसिटी एक्सप्रेस, जनहित एक्सप्रेस, गरीब रथ और हमसफर एक्सप्रेस समेत अन्य ट्रेनों का विलंब कम होगा तथा अधिकांश ट्रेनें समय पर चल सकेंगी. मालगाड़ियों के परिचालन में भी तेजी आएगी.

सिमरी बख्तियारपुर से सहरसा के बीच की दूरी मात्र 15 किलोमीटर है और इस रेलखंड पर ट्रेनों की अधिकतम गति 110 किलोमीटर प्रति घंटा निर्धारित है. इसके बावजूद कई ट्रेनों को यह दूरी तय करने में एक घंटे से अधिक समय लग जाता है. क्रॉसिंग और परिचालन संबंधी बाधाओं के कारण ट्रेनों को कई बार आउटर पर रोकना पड़ता है, जिससे यात्रियों को अनावश्यक विलंब का सामना करना पड़ता है.

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