नवहट्टा(सहरसा) से विनय कुमार मिश्र की रिपोर्ट
Kosi Flood News: कोसी नदी का जलस्तर बढ़ते ही नवहट्टा प्रखंड के तटबंध के अंदर बसे गांवों में मुश्किलों का दौर फिर शुरू हो गया है. नेपाल के तराई क्षेत्रों में लगातार हो रही बारिश का असर अब सीधे लोगों की जिंदगी पर दिखने लगा है. गांवों को जोड़ने वाली सड़कें पानी में डूब चुकी हैं. कहीं घुटने भर तो कहीं कमर तक पानी है. कई जगहों पर सड़कें कीचड़ में बदल गई हैं. ऐसे में लोगों का घर से निकलना तक मुश्किल हो गया है.
सबसे ज्यादा चिंता उन परिवारों की है, जिनके घर में बुजुर्ग, गर्भवती महिलाएं, छोटे बच्चे या बीमार लोग हैं. स्कूल जाने वाले बच्चों की पढ़ाई प्रभावित हो रही है और मरीजों को अस्पताल पहुंचाने में भारी दिक्कत आ रही है. ग्रामीणों का कहना है कि हर साल बाढ़ के मौसम में यही हाल होता है, लेकिन स्थायी समाधान आज तक नहीं हो सका है.
बाढ़ का पानी गांवों तक पहुंचा, सड़कें बनी सबसे बड़ी चुनौती
नेपाल के तराई क्षेत्र में लगातार बारिश के कारण कोसी नदी का जलस्तर तेजी से बढ़ रहा है. इसका असर तटबंध के अंदर बसे सात पंचायतों पर पड़ने लगा है. खेतों से निकलकर बाढ़ का पानी गांवों को जोड़ने वाली कच्ची और जर्जर सड़कों पर फैल गया है.
कई स्थानों पर सड़कें पूरी तरह जलमग्न हैं, जबकि दूसरी जगहों पर घुटने भर कीचड़ जमा है. ऐसे में ग्रामीण जान जोखिम में डालकर पैदल आने-जाने को मजबूर हैं. प्रखंड और जिला मुख्यालय तक पहुंचना भी कठिन होता जा रहा है.
हर साल वही परेशानी, फिर भी नहीं मिला स्थायी समाधान
ग्रामीणों का कहना है कि तटबंध के अंदर की अधिकांश सड़कें वर्षों से बदहाल हैं. हल्की बारिश में भी इनकी स्थिति खराब हो जाती है और जलस्तर बढ़ते ही पूरा इलाका आवागमन संकट से जूझने लगता है.

लोगों का कहना है कि सरकार हर वर्ष 15 जून से 15 अक्टूबर तक बाढ़ अवधि घोषित करती है, लेकिन इस दौरान तटबंध के भीतर रहने वाले लोगों के लिए न तो सुरक्षित आवागमन की पर्याप्त व्यवस्था होती है और न ही स्वास्थ्य सेवाओं की तैयारी पर्याप्त दिखाई देती है.
यदि कोसी का जलस्तर इसी तरह बढ़ता रहा तो आने वाले दिनों में हालात और गंभीर हो सकते हैं.
Kosi Flood News: निर्माणाधीन पुल के पास जलजमाव ने बढ़ाई मुश्किलें
नवहट्टा प्रखंड की खड़का तेलवा पंचायत के वार्ड संख्या 7 और 8 स्थित चाही टोला में निर्माणाधीन पुल के समीप तेज जल बहाव से बाढ़ जैसी स्थिति बन गई है. इसके कारण सैकड़ों परिवार अपने घरों तक सीमित होकर रह गए हैं.

ग्रामीणों का कहना है कि बच्चों की पढ़ाई, मरीजों का इलाज और रोजमर्रा के कामों के लिए भी उन्हें पानी पार कर निकलना पड़ रहा है. बरसात के मौसम में यह समस्या और गंभीर हो जाती है.
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ग्रामीणों ने लगाया लापरवाही का आरोप, प्रशासन से की हस्तक्षेप की मांग
स्थानीय ग्रामीण बीरजू कुमार, प्रभा देवी, संगीता देवी, जासो देवी और जया देवी सहित अन्य लोगों का आरोप है कि निर्माण कार्य कर रही एजेंसी ने कलवर्ट उपलब्ध होने के बावजूद उसे स्थापित नहीं किया है. उनका कहना है कि यदि समय रहते जल निकासी की समुचित व्यवस्था कर दी जाती तो जलजमाव की स्थिति नहीं बनती.
इस संबंध में संवेदक का पक्ष जानने का प्रयास किया गया, लेकिन उनसे संपर्क नहीं हो सका. वे न तो मौके पर मिले और न ही फोन पर बातचीत हो सकी.
ग्रामीणों ने जिला प्रशासन से मांग की है कि तटबंध के अंदर पक्की सड़क, बेहतर स्वास्थ्य सुविधा और बाढ़ अवधि के दौरान वैकल्पिक आवागमन की व्यवस्था सुनिश्चित की जाए. साथ ही निर्माणाधीन पुल के पास शीघ्र कलवर्ट लगाकर जल निकासी की व्यवस्था की जाए. लोगों ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द समाधान नहीं हुआ तो वे आंदोलन करने को बाध्य होंगे.
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