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Home बिहार सहरसा जब तक जीवन में ज्ञान एवं वैराग्य का समन्वय नहीं, तब तक भक्ति पूर्ण नहीं : डॉ शिवानी

जब तक जीवन में ज्ञान एवं वैराग्य का समन्वय नहीं, तब तक भक्ति पूर्ण नहीं : डॉ शिवानी

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जब तक जीवन में ज्ञान एवं वैराग्य का समन्वय नहीं, तब तक भक्ति पूर्ण नहीं  : डॉ शिवानी

श्रीमद भागवत कथा ज्ञान यज्ञ के दूसरे दिन उमड़ै श्रद्धालु सहरसा . राजकीय कन्या उच्च विद्यालय पूरब बाजार के प्रांगण में सनातन श्री नारायण सेवा संस्थान द्वारा आयोजित श्रीमद भागवत कथा ज्ञान यज्ञ के दूसरे दिन शनिवार को श्रद्धालुओं की भीड़ लगी रही. कथा वाचक डॉ शिवानी कृष्ण शुक्ला ने भागवत कथा के महात्म पर विस्तार से प्रकाश डाला. उन्होंने कहा कि जब तक जीवन में ज्ञान एवं वैराग्य का समन्वय नहीं होता, तब तक भक्ति को पूर्ण नहीं माना जा सकता. सुखदेव परीक्षित संवाद का वर्णन करते उन्होंने कहा कि जीवन की हर परिस्थिति में मनुष्य को भगवत भजन का आश्रय नहीं छोड़ना चाहिए. भागवत कथा में जो भी श्रद्धालु सीखने या पाने की भावना से आते हैं, उसे यह कथा अवश्य कुछ ना कुछ प्रदान करती है. कथा में प्यासे बनकर, सीखने एवं आत्मकल्याण के उद्देश्य से आने वालों को भागवत कथा जीवन का सही मार्ग दिखाती है. संस्थान के मुख्य आचार्य डॉ नवनीत कुमार ने कहा कि मनुष्य जीवन विषय-वस्तुओं के भोग के लिए नहीं, बल्कि ईश्वर भक्ति के लिए मिला है. लेकिन आज का मानव भक्ति से विमुख होकर सांसारिक भोगों में लिप्त हो गया है. जो भी श्रद्धालु भागवत कथा के तट पर आकर विराजमान होता है, उसका भागवत सदैव कल्याण करती है. कथा से मानव समाज में व्याप्त कुविचारों व विकारों का नाश होता है एवं भक्तिभाव जागृत होता है. मुख्य यजमान डॉ प्राणमोहन सिंह एवं नीलू सिंह ने विधिवत पूजन किया. उन्होंने कहा कि संस्थान द्वारा कई धार्मिक कार्य किये जाते हैं. संस्थान का उद्देश्य क्षेत्र में अध्यात्म एवं भक्ति का प्रसार करना व सामाजिक सौहार्द बनाना है. वहीं आयोजन समिति सदस्य सागर कुमार नन्हें ने कहा कि यज्ञ स्थल पर श्रद्धालाओं के सुगमता का ध्यान रखा गया है. जगह-जगह पानी की व्यस्था की गयी है. कार्यकर्त्ता जगह-जगह घूमते हैं. जिससे किसी भी श्रद्धालुओं को किसी भी प्रकार का कोई समस्या नहीं है. जिन श्रद्धालुओं को बैठने में कठिनाई है, उनके लिए विशेष रूप से कुर्सी की व्यवस्था रहती है. वहीं मेला में बच्चों के मनोरंजन के लिए झूला भी लगाया गया है. कार्यक्रम को सफल बनाने में मेजर डॉ गौतम कुमार, पप्पू सिंह, विजय बसंत सिंह, कुमार अमरज्योति जायसवाल, राणा करणजीत सिंह, बुल्लू झा, विनय मिश्रा, विद्या सिंह राठोर, अनुष्का सिंह, प्रिया कुमारी, वैशाली कुमारी, शिवानी कुमारी, मोनू महाकाल, विनीत सिंह, बंटी झा, समीर कुमार मिठू, अंकित सिंह, अभिजीत सिंह रघुवंशी, प्रिंस सिंह, गोलू सिंह, रिशु सिंह, इसान सिंह, आर्यन, रामप्रेवश साह महादेव, रोहण सिन्हा गुलशन, रौनक सिंह, रवि सिंह, गोविंद पासवान, शंकर शशि यादव, मानस मिश्रा, संतोष सिंह, सोनू सिंह, छोटू, गांधी जी, अभिषेक गुप्ता सहित अन्य लगे हैं.

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