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Home बिहार पूर्णिया जय मां काली सीमावाली: पूर्णिया के इस पावन प्रवेश द्वार पर रोज लगते हैं जयकारे, जानें 54 साल पुरानी परंपरा

जय मां काली सीमावाली: पूर्णिया के इस पावन प्रवेश द्वार पर रोज लगते हैं जयकारे, जानें 54 साल पुरानी परंपरा

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जय मां काली सीमावाली: पूर्णिया के इस पावन प्रवेश द्वार पर रोज लगते हैं जयकारे, जानें 54 साल पुरानी परंपरा
सीमा काली मंदिर, जलालगढ़,पूर्णिया

पूर्णिया के जलालगढ़ से निकेश राय की रिपोर्ट

Jalalgarh Seema Kaali: बिहार के सीमांचल क्षेत्र में राष्ट्रीय राजमार्ग (NH-27) से गुजरने वाले यात्रियों के लिए जलालगढ़ प्रखंड का ‘सीमा गांव’ एक पावन पड़ाव माना जाता है. पूर्णिया जिला मुख्यालय से करीब 23 किलोमीटर उत्तर दिशा में पूर्णिया और अररिया जिले के बॉर्डर (सीमा) पर स्थित ‘जगत कल्याणी मां काली मंदिर’ असीम श्रद्धा और विश्वास का प्रतीक है. यह मंदिर न केवल राहगीरों की रक्षा करने वाली देवी के रूप में विख्यात है, बल्कि सुदूर इलाकों से आने वाले श्रद्धालुओं के लिए मन्नत पूरी करने वाला एक जाग्रत दरबार भी है.

राहगीर माता से ‘अनुमति’ लेकर ही बढ़ाते हैं कदम

एनएच-27 पर स्थित होने के कारण इस मंदिर की कड़ियां सीधे सफर करने वाले मुसाफिरों से जुड़ी हुई हैं. हर दिन इस फोरलेन हाईवे से गुजरने वाले सैकड़ों छोटे-बड़े वाहनों (ट्रक, बस, कार और बाइक) के पहिए मां काली के मंदिर के सामने आकर थम जाते हैं.

चालक और यात्री वाहन से उतरकर माता के दरबार में माथा टेकते हैं, चढ़ावा चढ़ाते हैं और सुरक्षित व मंगलमय यात्रा के लिए माता से आत्मिक अनुमति लेकर आगे बढ़ते हैं. स्थानीय लोगों का अटूट विश्वास है कि यहाँ हाजिरी लगाने वाले की यात्रा में कभी कोई विघ्न-बाधा नहीं आती.

लंबी दूरी के मुसाफिरों के लिए रमणीय विश्राम स्थल

हाईवे से बिल्कुल सटे होने और चारों तरफ हरियाली होने के कारण यह मंदिर परिसर बेहद रमणीय और शांत केंद्र बन चुका है. असम, सिलीगुड़ी, पटना या दिल्ली की ओर लंबी दूरी की यात्रा तय करने वाले यात्री और ट्रक चालक यहाँ रुककर कुछ समय विश्राम करते हैं. मंदिर के आसपास हमेशा चहल-पहल रहने से यहाँ का नजारा प्रत्येक दिन किसी छोटे मेले जैसा प्रतीत होता है.

वर्ष 1972 से जारी है दीपावली पर 48 घंटे का अखंड रामधुन

  • 54 वर्षों की अटूट परंपरा: मंदिर कमेटी के वरिष्ठ सदस्यों के अनुसार, इस पावन स्थल पर वर्ष 1972 ई. से लगातार दीपावली के शुभ अवसर पर 48 घंटे (दो दिवसीय) का अखंड रामकृष्णधुन संकीर्तन पूरी निष्ठा के साथ आयोजित किया जाता है.
  • चार दिनों का महापर्व: दीपावली के मौके पर यहाँ चार दिनों तक भव्य उत्सव चलता है, जिसमें सीमांचल के अलावा पड़ोसी देश नेपाल से भी श्रद्धालु आते हैं.
  • नूतन वर्ष पर महाभीड़: हर साल 1 जनवरी (नए साल के पहले दिन) को अपनी नई शुरुआत के लिए आशीर्वाद मांगने वाले युवाओं और परिवारों की यहाँ पैर रखने तक की जगह नहीं बचती.

Jalalgarh Seema Kaali: सावन में शिवभक्त कांवरियों के लिए 30 दिनों का महाशिविर

“काली मंदिर कमेटी और स्थानीय ग्रामीणों के सहयोग से सावन के पवित्र महीने में पूरे 30 दिनों तक देवघर और बासुकीनाथ जाने वाले शिवभक्तों (कांवरियों) के लिए एक भव्य और निःशुल्क सेवा शिविर लगाया जाता है. इस दौरान पूरे मंदिर प्रांगण में विशाल पंडाल, यज्ञ भवन की आकर्षक सजावट और अत्याधुनिक लाइटिंग की जाती है. राहगीरों, स्थानीय व्यवसायियों और श्रद्धालुओं द्वारा स्वेच्छा से दिए जाने वाले दान और भेंट की बदौलत ही आज इस मंदिर का स्वरूप दिन-प्रतिदिन भव्य और विशाल होता जा रहा है.”

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जैसे-जैसे एनएच-27 पर ट्रैफिक बढ़ रहा है, वैसे-वैसे ‘मां काली सीमावाली’ की ख्याति और महिमा भी देशव्यापी होती जा रहा है. स्थानीय राहगीर इसे पूर्णिया का सबसे सुरक्षित और आध्यात्मिक प्रवेश द्वार मानते हैं.

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