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Home बिहार पूर्णिया छह साल बाद लौटी बेटी, पिता की आंखों से छलक पड़े खुशी के आंसू

छह साल बाद लौटी बेटी, पिता की आंखों से छलक पड़े खुशी के आंसू

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छह साल बाद लौटी बेटी, पिता की आंखों से छलक पड़े खुशी के आंसू

पूर्णिया से रिपोर्ट :

मां की मौत के सदमे में घर से भटक गयी थी शाहजुरुन खातून

पूर्णिया के शांति कुटीर ने परिवार से कराया पुनर्मिलन

पूर्णिया. छह साल… किसी पिता के लिए यह सिर्फ समय नहीं, बल्कि हर दिन बेटी की राह देखते हुए बीता एक लंबा इंतजार था. एक ऐसी उम्मीद, जो धीरे-धीरे धुंधली पड़ रही थी लेकिन पूर्णिया के शांति कुटीर में बुधवार को जो दृश्य देखने को मिला, उसने साबित कर दिया कि अगर प्रयास सच्चे हों तो बिछड़े रिश्ते फिर से मिल सकते हैं. जब वृद्ध पिता मो सज्जाद ने छह साल बाद अपनी बेटी शाहजुरुन खातून को सामने खड़ा देखा, तो वे कुछ पल के लिए उसे निहारते ही रह गएये. फिर बेटी को सीने से लगाकर फूट-फूटकर रो पड़े. पिता की आंखों से बहते आंसू मानो उन छह वर्षों की पीड़ा, बेचैनी और इंतजार की कहानी कह रहे थे. बेटी भी पिता से लिपटकर रोती रही. वहां मौजूद हर शख्स की आंखें नम हो गईं.

मां की मौत के बाद गहरे मानसिक आघात में चली गई थी शाहजुरुन

दरअसल, किशनगंज की रहने वाली शाहजुरुन खातून अपनी मां की मौत के बाद गहरे मानसिक आघात में चली गई थी. सदमे ने उसका मानसिक संतुलन बिगाड़ दिया और एक दिन वह घर से निकल गई. परिवार ने उसे हर जगह तलाशा, लेकिन कोई सुराग नहीं मिला. समय बीतता गया और उम्मीदें टूटने लगीं. इधर, मार्च 2021 में पूर्णिया के के.हाट थाना क्षेत्र से मिली एक डरी-सहमी और असहाय युवती को पुलिस शांति कुटीर लेकर आयी. वह अपना नाम तक बताने की स्थिति में नहीं थी. संस्था ने उसे एक पहचान दी, सुरक्षा दी और अपने परिवार की तरह संभाला. उसका नाम अस्थायी तौर पर ””खेजू खातून”” रखा गया.

नाम व पता जानने में लग गये छह साल

शांति कुटीर की टीम ने हार नहीं मानी. वर्षों तक लगातार काउंसलिंग, देखभाल और आत्मीय व्यवहार के जरिए युवती को सामान्य जीवन की ओर लौटाने का प्रयास जारी रखा. आखिरकार 9 जून 2026 को वह दिन आया, जब शाहजुरुन ने अपना असली नाम और घर का पता बताया. इसके बाद समाज कल्याण विभाग और शांति कुटीर की टीम तुरंत सक्रिय हुई. स्थानीय वार्ड पार्षद की मदद से परिवार तक सूचना पहुंचाई गई. जैसे ही पिता को पता चला कि उनकी बेटी जीवित है और सुरक्षित है, उनकी खुशी का ठिकाना नहीं रहा.

जब एक-दूसरे को देखकर रो पड़े

सामाजिक सुरक्षा के सहायक निदेशक अमरेश कुमार के निर्देश पर परिजनों को तत्काल शांति कुटीर बुलाया गया. 10 जून को वर्षों से बिछड़ा परिवार एक-दूसरे को देखकर रो पड़ा. बेटी के चेहरे पर घर लौटने की खुशी थी, तो पिता की आंखों में अपनी खोई हुई दुनिया वापस मिलने का सुकून. सहायक निदेशक श्री कुमार के कुशल मार्गदर्शन में जिला प्रबंधक उषा कुमारी, प्रिया भारती, ए.एन.एम., शांति कुटीर की काउंसलर निकिता कुमारी, शांति कुटीर की केस वर्कर जया परवीन, कर्मी सोनी और अन्य कर्मियों के अथक प्रयासों के बाद सभी कानूनी प्रक्रियाएं पूरी की गईं और शाहजुरुन खातून को सम्मानपूर्वक उसके परिवार को सुपुर्द कर दिया गया.

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