बिहार में कैंसर का बढ़ता खतरा, बोले डॉ. वीपी सिंह- हर साल आते हैं 70 से 80 हजार नए केस

Savera Cancer Hospital: बिहार में हर साल 70 से 80 हजार नए कैंसर मरीज सामने आ रहे हैं, जो चिंता का विषय है. सवेरा कैंसर अस्पताल के डॉक्टर वीपी सिंह का कहना है कि देर से जांच और जागरूकता की कमी के कारण अधिकांश मामलों का पता अंतिम चरण में चलता है. ऐसे में समय पर स्क्रीनिंग और शुरुआती पहचान ही कैंसर से बचाव का सबसे प्रभावी उपाय साबित हो सकती है.

By Pritish Sahay | June 30, 2026 11:06 PM

Savera Cancer Hospital: कैंसर आज बिहार सहित पूरे भारत के लिए एक गंभीर सार्वजनिक स्वास्थ्य चुनौती बन चुका है। विभिन्न राष्ट्रीय कैंसर पंजीकरण केंद्रों और स्वास्थ्य रिपोर्टों के अनुसार बिहार में प्रतिवर्ष लगभग 70,000 से 80,000 नए कैंसर रोगियों की पहचान होती है। इनमें मुख, स्तन और गर्भाशय ग्रीवा कैंसर के मामले प्रमुख हैं। तंबाकू एवं गुटखा सेवन, जागरूकता की कमी तथा समय पर जांच न होने के कारण कैंसर के मामलों में लगातार वृद्धि देखी जा रही है।

मेरे अनुभव में कैंसर से होने वाली मृत्यु और विकलांगता का सबसे बड़ा कारण इसकी देर से पहचान है। बिहार में बड़ी संख्या में मरीज तब चिकित्सक के पास पहुंचते हैं, जब बीमारी तीसरे या चौथे चरण में पहुंच चुकी होती है। ऐसे में उपचार अधिक जटिल, महंगा और कम प्रभावी हो जाता है। मेरा हमेशा से मानना रहा है कि यदि कैंसर की पहचान शुरुआती अवस्था में हो जाए तो अधिकांश मरीजों का सफल उपचार संभव है।

इसी सोच के साथ हम (सवेरा कैंसर हॉस्पिटल एवं आर. एस. मेमोरियल कैंसर सोसाइटी) बिहार के विभिन्न जिलों में व्यापक कैंसर जांच और जागरूकता अभियान चला रहे हैं। हमारा मुख्य ध्यान मुख, स्तन और गर्भाशय ग्रीवा कैंसर की प्रारंभिक पहचान पर है। अब तक शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों में 300 से अधिक कैंसर जांच शिविर आयोजित किए जा चुके हैं, जिनमें 25,000 से अधिक लोगों की जांच की गई है।

हमारे अभियान की सबसे बड़ी विशेषता “सवेरा चला गांव की ओर” कार्यक्रम है। इसके तहत अत्याधुनिक सुविधाओं से लैस चलित कैंसर जांच बस गाँव-गाँव पहुंच रही है। इस बस में तापीय प्रौद्योगिकी (थर्मोलाइटिका)आधारित स्तन कैंसर जांच प्रणाली, वीआईए (सिरका अम्ल द्वारा दृश्य परीक्षण) आधारित गर्भाशय ग्रीवा कैंसर जांच सुविधा तथा उन्नत मुख कैंसर जांच यंत्र उपलब्ध हैं। मेरा उद्देश्य यह है कि लोगों को उनके घर के पास ही गुणवत्तापूर्ण कैंसर जांच की सुविधा मिले, ताकि दूरी या संसाधनों की कमी उनके उपचार में बाधा न बने।

जांच के दौरान जिन लोगों में कैंसर की आशंका मिलती है, उन्हें आगे की पुष्टि और उपचार के लिए निकटतम कैंसर केंद्र अथवा सवेरा कैंसर हॉस्पिटल भेजा जाता है। इससे मरीजों को समय पर सही इलाज मिल पाता है और बीमारी को शुरुआती अवस्था में ही नियंत्रित करने की संभावना बढ़ जाती है।

मेरा सपना “कैंसर मुक्त बिहार” का है। मेरा दृढ़ विश्वास है कि कैंसर के खिलाफ सबसे प्रभावी हथियार जागरूकता और समय पर जांच है। यदि हम गांव-गांव तक जांच सेवाएं पहुंचाएं, लोगों को तंबाकू छोड़ने के लिए प्रेरित करें और नियमित स्वास्थ्य जांच को जीवनशैली का हिस्सा बनाएं, तो कैंसर से होने वाली मौतों में उल्लेखनीय कमी लाई जा सकती है।

मैं बिहार के प्रत्येक नागरिक से अपील करता हूं कि वे कैंसर के लक्षणों को नजरअंदाज न करें, नियमित जांच कराएं और अपने परिवार व समाज को भी इसके प्रति जागरूक करें। यदि हम सभी मिलकर समय पर जांच, तंबाकू त्याग और स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता को जनआंदोलन बना दें, तो “कैंसर मुक्त बिहार” का सपना निश्चित रूप से साकार किया जा सकता है।
(लेखक डॉ. वीपी. सिंह कैंसर सर्जन हैं और सवेरा कैंसर हॉस्पिटल, पटना के निदेशक हैं)