भरत तिवारी एनकाउंटर पर फिर बोले जीतन राम मांझी, कहा- अगर कोई हम पर बंदूक ताने तो उसे कैसे छोड़ दें

Bharat Tiwari Encounter: भरत तिवारी एनकाउंटर मामले में सियासी हलचल तेज है. केंद्रीय मंत्री जीतन राम मांझी ने पुलिस कार्रवाई का समर्थन करते हुए एक बार फिर कहा कि अगर कोई हम पर बंदूक तानेगा, तो उसे कैसे छोड़ दें.

By Abhinandan Pandey | June 30, 2026 3:47 PM

Bharat Tiwari Encounter: भरत तिवारी एनकाउंटर मामले में केंद्रीय मंत्री जीतन राम मांझी ने एक बार फिर पुलिस की कार्रवाई का समर्थन किया है. उन्होंने कहा कि अगर कोई किसी पर बंदूक ताने, तो पुलिस उसे छोड़ नहीं सकती. उनके इस बयान के बाद एक बार फिर मामले को लेकर सियासी चर्चा तेज हो गई है.

‘पुलिस ने कोई बर्बरता नहीं की’

पटना में पत्रकारों से बातचीत के दौरान जीतन राम मांझी ने कहा कि अगर कोई उन पर रिवॉल्वर ताने, तो उसे छोड़ने का सवाल ही नहीं उठता. उन्होंने कहा कि अगर कोई हम पर रिवॉल्वर लहराए तो हम उसको कैसे छोड़ दें. इसी वजह से पहले भी कई पुलिसकर्मी मारे गए हैं. पुलिस मारी जाए तो कोई बात नहीं, लेकिन जब पुलिस कार्रवाई करे तो उस पर सवाल उठाए जाते हैं. मांझी ने साफ कहा कि उनके मुताबिक पुलिस ने इस मामले में कोई बर्बरता नहीं की है.

न्यायिक आयोग का भी किया जिक्र

केंद्रीय मंत्री ने कहा कि बिहार सरकार पहले ही इस मामले की न्यायिक जांच के लिए आयोग बना चुकी है. उन्होंने कहा कि जब मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने न्यायिक आयोग गठित कर दिया है, तो अब जांच का इंतजार करना चाहिए. उन्होंने कहा कि आयोग की रिपोर्ट आने से पहले बेवजह विवाद खड़ा करने का कोई औचित्य नहीं है.

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पहले भी पुलिस कार्रवाई का किया था बचाव

यह पहली बार नहीं है जब जीतन राम मांझी ने भरत तिवारी एनकाउंटर पर ऐसा बयान दिया हो. 17 जून को घटना के बाद भी उन्होंने कहा था कि अगर परिवार का दावा है कि भरत तिवारी मानसिक रूप से अस्वस्थ था, तो उसके हाथ में हथियार क्यों रहने दिया गया. उन्होंने यह भी कहा था कि अगर कोई पुलिस पर पिस्टल तानेगा, तो पुलिस की जवाबी कार्रवाई गलत नहीं मानी जा सकती.

सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई से किया इनकार

भरत तिवारी एनकाउंटर की स्वतंत्र जांच कराने की मांग वाली याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई करने से इनकार कर दिया है. शीर्ष अदालत ने याचिकाकर्ता को पटना हाईकोर्ट जाने की सलाह दी. याचिका में मामले की सीबीआई जांच और स्वतंत्र विशेषज्ञ समिति से जांच कराने की मांग की गई थी.

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