दानापुर निकाय चुनाव में आरक्षण का पेंच, प्रत्याशियों की बढ़ी चिंता

Danapur Nagar Nikay Election: दानापुर नगर निकाय चुनाव को लेकर आरक्षण रोस्टर जारी नहीं होने से मुख्य पार्षद और उपमुख्य पार्षद पद के दावेदारों में असमंजस की स्थिति बनी हुई है. परिसीमन और सीमा विस्तार के कारण चुनावी तैयारियां प्रभावित हुई हैं, जिससे निकाय चुनाव में देरी की संभावना जताई जा रही है.

By Karuna Tiwari | June 24, 2026 11:38 AM

पटना से संजय कुमार की रिपोर्ट
Danapur Nagar Nikay Election:
दानापुर नगर निकाय चुनाव को लेकर लोगों की निगाहें संभावित चुनाव कार्यक्रम पर टिकी हुई हैं, लेकिन आरक्षण रोस्टर जारी नहीं होने से विभिन्न पदों के दावेदारों के बीच असमंजस की स्थिति बनी हुई है. खासकर मुख्य पार्षद और उपमुख्य पार्षद पद के संभावित उम्मीदवार आरक्षण की स्थिति स्पष्ट होने का इंतजार कर रहे हैं.

आरक्षण रोस्टर नहीं होने से बढ़ी दावेदारों की चिंता

दानापुर नगर परिषद के परिसीमन और पुनर्गठन के बाद 45 वार्डों के चुनाव की तैयारियां शुरू हुई थीं. ऐसे में लोगों को उम्मीद थी कि जुलाई या अगस्त तक चुनाव संपन्न हो जाएगा, लेकिन वर्तमान परिस्थितियों को देखते हुए ऐसा होता नहीं दिख रहा है. आरक्षण रोस्टर जारी नहीं होने से संभावित उम्मीदवार अपनी रणनीति तय नहीं कर पा रहे हैं.

मुख्य पार्षद और उपमुख्य पार्षद पद पर टिकी नजर

मिली जानकारी के अनुसार मुख्य पार्षद और उपमुख्य पार्षद का चुनाव सीधे जनता द्वारा किया जाना है. सरकार की घोषणा के बाद चुनावी मैदान में उतरने की तैयारी कर रहे कई दावेदार अब आरक्षण की स्थिति स्पष्ट होने का इंतजार कर रहे हैं. इससे चुनावी गतिविधियों में भी सुस्ती देखी जा रही है.

परिसीमन और सीमा विस्तार से बढ़ी प्रशासनिक चुनौतियां

स्थानीय लोगों का कहना है कि नगर परिषद के परिसीमन और सीमा विस्तार के कारण राज्य निर्वाचन आयोग को नए सिरे से चुनावी तैयारियां करनी पड़ रही हैं. इसके तहत मतदाता सूची का पुनरीक्षण, नए वार्डों का गठन और अन्य प्रशासनिक प्रक्रियाएं पूरी की जानी हैं. यही वजह है कि निकाय चुनाव में देरी होने की संभावना जताई जा रही है.

चुनाव में देरी से विकास कार्यों पर पड़ सकता है असर

नगर परिषद क्षेत्र के पूर्व जनप्रतिनिधियों और ग्रामीणों का मानना है कि चुनाव समय पर नहीं होने से विकास कार्य प्रभावित हो सकते हैं। उनका कहना है कि निर्वाचित प्रतिनिधियों के अभाव में विकास योजनाओं की रफ्तार धीमी पड़ने की आशंका बनी हुई है।

छह माह तक स्थानीय निकाय बनाए रखेगा अधिकारिता

विभागीय निर्देशों के अनुसार बिहार नगरपालिका अधिनियम 2007 के तहत नवगठित नगरपालिका क्षेत्र में अधिसूचना जारी होने के बाद छह माह तक पूर्व स्थानीय प्राधिकार अपनी अधिकारिता बनाए रखेगा. इसके बावजूद चुनाव को लेकर लोगों के बीच तरह-तरह की चर्चाएं जारी हैं.

आयोग की मंजूरी के बाद जारी होगा आरक्षण रोस्टर

उपमुख्य पार्षद प्रतिनिधि राजनाथ जयसवाल उर्फ राजू ने बताया कि अभी तक आरक्षण रोस्टर जारी नहीं हुआ है. इसी कारण मुख्य पार्षद और उपमुख्य पार्षद पद को लेकर विभिन्न संभावनाओं पर विचार किया जा रहा है. उन्होंने कहा कि यदि पूर्व का आरक्षण रोस्टर लागू रहता है तो उम्मीदवारों की रणनीति में बदलाव किया जाएगा.

वहीं अवर निर्वाचन पदाधिकारी वीरेंद्र कुमार ने बताया कि निकाय चुनाव के लिए आरक्षण रोस्टर आयोग को अनुमोदन के लिए भेजा गया है. आयोग की मंजूरी मिलने के बाद आरक्षण रोस्टर जारी किया जाएगा. साथ ही मतदाता सूची का प्रकाशन भी कर दिया गया है.

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