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Home बिहार पटना दूसरे राज्यों की तर्ज पर बिहार में भी हो दलीय पंचायत चुनाव, बीजेपी विधायक ने उठाई मांग

दूसरे राज्यों की तर्ज पर बिहार में भी हो दलीय पंचायत चुनाव, बीजेपी विधायक ने उठाई मांग

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दूसरे राज्यों की तर्ज पर बिहार में भी हो दलीय पंचायत चुनाव, बीजेपी विधायक ने उठाई मांग
पंचायती राज मंत्री दीपक प्रकाश

Bihar Panchayat Election: बिहार में इस साल होने वाले पंचायत चुनावों को लेकर भाजपा विधायक कृष्ण कुमार ऋषि ने सरकार से मांग की है कि अब मुखिया, सरपंच और जिला परिषद के चुनाव भी पार्टियों के सिंबल जैसे कमल, लालटेन, तीर पर होने चाहिए. फिलहाल बिहार में ये चुनाव गैर-दलीय आधार पर होते हैं. यहां उम्मीदवारों को स्वतंत्र चुनाव चिह्न मिलते हैं.

मंत्री ने रखा अपना पक्ष

इस मांग पर पंचायती राज मंत्री दीपक प्रकाश ने सदन को बताया कि वर्तमान में बिहार पंचायती राज अधिनियम 2006 के तहत चुनाव कराए जाते हैं. इसमें पार्टी के आधार पर चुनाव का कोई प्रावधान नहीं है. उन्होंने कहा कि यह एक गंभीर विषय है. अगर राज्य की सभी राजनीतिक पार्टियां और आम जनता इस बदलाव के पक्ष में आती हैं तो सरकार इस पर आगे बातचीत कर सकती है.

दूसरे राज्यों जैसा हो सिस्टम

विधायक कृष्ण कुमार ऋषि ने तर्क दिया कि भारत के कई अन्य राज्यों में पंचायत चुनाव पार्टी सिंबल पर होते हैं. बिहार में अभी चुनाव के लिए करीब 6-7 महीने का वक्त है, इसलिए सरकार को सभी दलों से राय मशविरा कर इस पर फैसला लेना चाहिए. उनका कहा कि इससे चुनाव में पारदर्शिता आएगी और जवाबदेही बढ़ेगी.

अभी क्या है व्यवस्था?

मौजूदा समय में बिहार में मुखिया या वार्ड सदस्य के चुनाव में कोई पार्टी आधिकारिक तौर पर अपना सिंबल नहीं दे सकती. भले ही पार्टियां किसी उम्मीदवार को अपना समर्थन दें, लेकिन प्रचार के दौरान उम्मीदवार किसी पार्टी का झंडा या निशान इस्तेमाल नहीं कर सकता.

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नवंबर में हो सकते हैं चुनाव

बिहार में ग्राम पंचायतों का कार्यकाल दिसंबर 2026 में खत्म हो रहा है. ऐसे में उम्मीद जताई जा रही है कि नवंबर 2026 तक मतदान की प्रक्रिया पूरी कर ली जाएगी. निर्वाचन आयोग और पंचायती राज विभाग ने इसके लिए तैयारियां शुरू कर दी हैं. अब देखना यह है कि क्या चुनाव से पहले नियमों में कोई बड़ा बदलाव होता है या नहीं.

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परितोष शाही पिछले 4 वर्षों से डिजिटल मीडिया और पत्रकारिता में सक्रिय हैं. उन्होंने अपने करियर की शुरुआत राजस्थान पत्रिका से की और वर्तमान में प्रभात खबर डिजिटल की बिहार टीम का हिस्सा हैं. राजनीति, सिनेमा और खेल, विशेषकर क्रिकेट में उनकी गहरी रुचि है. जटिल खबरों को सरल भाषा में पाठकों तक पहुंचाना और बदलते न्यूज माहौल में तेजी से काम करना उनकी विशेषता है. परितोष शाही ने पत्रकारिता की पढ़ाई बनारस हिंदू यूनिवर्सिटी (BHU) से की. पढ़ाई के दौरान ही पत्रकारिता की बारीकियों को समझना शुरू कर दिया था. खबरों को देखने, समझने और लोगों तक सही तरीके से पहुंचाने की सोच ने शुरुआत से ही इस क्षेत्र की ओर आकर्षित किया. पत्रकारिता में करियर की पहली बड़ी शुरुआत बिहार विधानसभा चुनाव 2020 के दौरान हुई, जब उन्होंने जन की बात के साथ इंटर्नशिप की. इस दौरान बिहार के 26 जिलों में जाकर सर्वे किया. यह अनुभव काफी खास रहा, क्योंकि यहां जमीनी स्तर पर राजनीति, जनता के मुद्दों और चुनावी माहौल को बहुत करीब से समझा. इसी अनुभव ने राजनीतिक समझ को और मजबूत बनाया. इसके बाद राजस्थान पत्रिका में 3 महीने की इंटर्नशिप की. यहां खबर लिखने की असली दुनिया को करीब से जाना. महज एक महीने के अंदर ही रियल टाइम न्यूज लिखने लगे. इस दौरान सीखा कि तेजी के साथ-साथ खबर की सटीकता कितनी जरूरी होती है. राजस्थान पत्रिका ने उनके अंदर एक मजबूत डिजिटल पत्रकार की नींव रखी. पत्रकारिता के सफर में आगे बढ़ते हुए पटना के जनता जंक्शन न्यूज पोर्टल में वीडियो प्रोड्यूसर के रूप में भी काम किया. यहां कैमरे के सामने बोलना, प्रेजेंटेशन देना और वीडियो कंटेंट की बारीकियां सीखीं. करीब 6 महीने के इस अनुभव ने कैमरा फ्रेंडली बनाया और ऑन-स्क्रीन प्रेजेंस को मजबूत किया. 1 अप्रैल 2023 को राजस्थान पत्रिका को प्रोफेशनल तौर पर ज्वाइन किया. यहां 17 महीने में कई बड़े चुनावी कवरेज में अहम भूमिका निभाई. लोकसभा चुनाव 2024 में नेशनल टीम के साथ जिम्मेदारी संभालने का मौका मिला. इसके अलावा मध्य प्रदेश, राजस्थान और छत्तीसगढ़ विधानसभा चुनाव के दौरान भी स्टेट टीम के साथ मिलकर काम किया. इस दौरान चुनावी रणनीति, राजनीतिक घटनाक्रम और बड़े मुद्दों पर काम करने का व्यापक अनुभव मिला. फिलहाल परितोष शाही प्रभात खबर डिजिटल बिहार टीम के साथ जुड़े हुए हैं. यहां बिहार विधानसभा चुनाव के दौरान कई बड़ी खबरों को रियल टाइम में ब्रेक किया, ग्राउंड से जुड़े मुद्दों पर खबरें लिखीं और वीडियो भी बनाए. बिहार चुनाव के दौरान कई जिलों में गांव- गांव घूम कर लोगों की समस्या को जाना-समझा और उनके मुद्दे को जन प्रतिनिधियों तक पहुंचाया. उनकी कोशिश हमेशा यही रहती है कि पाठकों और दर्शकों तक सबसे पहले, सही और असरदार खबर पहुंचे. पत्रकारिता में लक्ष्य लगातार सीखते रहना, खुद को बेहतर बनाना और भरोसेमंद पत्रकार के रूप में अपनी पहचान मजबूत करना है.
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